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बिना डिलीवरी किट दौड़ रही हैं 104 एंबुलेंस

आंगई मंडल की पीएचसी आंगई में भले ही राज्य सरकार सुरक्षित मातृत्व का दावा करती हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है ऐसा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 06, 2018, 02:20 AM IST

आंगई मंडल की पीएचसी आंगई में भले ही राज्य सरकार सुरक्षित मातृत्व का दावा करती हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है ऐसा ही मामला पीएचसी आंगई एवं बरौली 104 एंबुलेंस का हाल है। 104 एंबुलेंस में ना तो डिलीवरी किट है और ना ही थर्मामीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर सहित अन्य उपकरण नहीं है। जबकि 104 के साथ एक कंपाउंडर का होना भी जरूरी है बिना कंपाउंडर के कौन लगाएगा इंजेक्शन गर्भवती प्रसूताओं को लाने ले जाने की जिम्मेदारी 104 एंबुलेंस की होती है प्रसूताओं को घर से पीएचसी केंद्रों तक पीएचसी केंद्र से लेकर से लेकर घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी 104 की होती है। अगर किसी प्रसूता की तबीयत खराब हो जाती है तो रेफर के शव को ले जाने की जिम्मेदारी 104 एंबुलेंस की होती है। अगर बीच में किसी मरीज या प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ जाती है या कोई डिलीवरी केस हो जाता है तो बीच में कौन इनकी देखभाल करेगा एक और राज्य सरकार जननी सुरक्षा योजना पर विशेष जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार प्रसूताओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। जिले के चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया गया है यदि रास्ते में किसी को कोई परेशानी होती है या डिलीवरी होती है तो एंबुलेंस का स्टाफ कैसे सुरक्षित डिलीवरी कराएगा। आंगई से बाड़ी धौलपुर आए दिन रेफर केस या डिलीवरी केस होते रहते हैं जबकि आंगई से बाड़ी की दूरी 15 किलोमीटर है और आंगई से धौलपुर की 50 किलोमीटर की दूरी स्थित है अगर कोई बीच में कोई मरीज के साथ या डिलीवरी केस के साथ बीच रास्ते में तबीयत खराब हो जाती है तो कौन करेगा इनकी देखभाल कई बार बीच रास्ते में ही डिलीवरी केस हो जाता है।

आंगई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद की एंबुलेंस में नहीं है आवश्यक उपकरण व साथ में नहीं चलता है नर्सिंगकर्मी

आंगई. बिना किट के पीएचसी के पास खड़ी 104 एंबुलेंस।

ऐसे हालातों में जीवन बचाना मुश्किल

एंबुलेंस का उपयोग अक्सर आपातकालीन हालातों में ही मरीज की जान बचाने के लिए किया जाता है। लेकिन एंबुलेंस में अतिआवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं होने साथ ही नर्सिंग कर्मी के नहीं चलने से रोगी के जीवन खतरा बना रहता है। ऐसे हालातों में उसके जीवन बचाना मुश्किल ही होता है। ऐसा नहीं कि एंबुलेंस के बदहालों की जानकारी विभाग को नहीं हो।

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