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दिन-रात के तापमान में 22 डिग्री का अंतर फैलने लगी बीमारी, 450 बच्चे पहुंचे अस्पताल

मौसम बदलने के साथ ही बीमारियों का प्रकोप भी शुरू हो जाता है। दिन का तापमान करीब 33 डिग्री पार और रात का तापमान करीब 11.4...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 10, 2018, 02:25 AM IST

मौसम बदलने के साथ ही बीमारियों का प्रकोप भी शुरू हो जाता है। दिन का तापमान करीब 33 डिग्री पार और रात का तापमान करीब 11.4 डिग्री बना हुआ है। इस कारण अचानक से खांसी और निमोनिया के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। इसमें सर्वाधिक असर जिलेभर के बच्चों पर आ रहा है। सबसे पहले बच्चे इनकी चपेट में आते हैं। मौसम में उतार चढ़ाव व तेज गर्मी का बच्चों की सेहत पर सीधा असर देखा जा सकता है। ऐसे में घरों में खान पान व रहन सहन में परिजनों की थोड़ी सी लापरवाही बच्चों को बीमार कर रही है। इससे छोटे बच्चे मौसम में बदलाव से जल्दी बीमार होकर जिला एवं मातृ शिशु संस्थान में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अमूमन 250 से 300 तक रहने वाला बच्चों का आउटडोर इस समय 400 से 450 तक पहुंच गया है।

जिला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों में भी छोटे बच्चे उल्टी, दस्त, जुकाम, बुखार, खांसी में जकड़कर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जहां बच्चों को डॉक्टर की सलाह पर भर्ती भी किया जा रहा है। गत दिवस से दिन में तापमान ज्यादा रहने व रात में हल्की ठंडक से बच्च बुखार खांसी की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में बच्चों को देखते मिले डॉ अमरनाथ तंवर ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर हुआ है कि बच्चे जुकाम, खांसी व बुखार की चपेट में आ रहे हैं। पहली पारी में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। कई बच्चे निमोनिया की शिकायत पर भर्ती किए जा रहे हैं।

धौलपुर. सरकारी शिशु अस्पताल में बीमार बच्चों को देखते डॉ. तंवर।

घरों में पंखे हुए चालू, फ्रीज का ठंडा पानी गटका, अब बीमारियों की चपेट में

मौसम में एकदम तेज गर्मी से घरों में कूलर पंखों की घनघनाहट होने से बच्चों के प्रति लापरवाही से बच्चे बीमार हुए हैं। थोड़ी सी गर्मी लगने से बच्चों को बिना चादर ओढ़ाए सुलाना व फ्रीज का ठंडा पानी पीने से खांसी व निमोनिया की चपेट में बच्चे ज्यादा आए हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ धर्मसिंह मैनावत कहते हैं कि बच्चों को बुखार व खांसी होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। अन्यथा खांसी व निमोनिया का इलाज समय पर नहीं होने से बच्चे को दस्त हो सकते हैं। जिससे डिहाइड्रेशन की चपेट में आ सकता है।

इधर, बुजुर्ग भी प्रभावित

चार-पांच दिन से मौसम में उतार चढ़ाव हो रहा है। दिन में गर्मी और सुबह शाम ठंड रहती है। मौसम का असर से बच्चों के साथ बुजुर्ग को भी सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है। सर्दी, खांसी के साथ वायरल फीवर का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। होली के बाद से ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। फिजीशियन कक्षों के बाहर मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

बच्चों के खाने में प्याज, हरी सब्जियां, जूस, फल आदि शामिल करें।

बच्चे जब गार्डन में जाएं तो उन्हें समझाएं कि उन जगहों के पास न खेलें जहां थोड़ा भी पानी इकट्ठा हो।

कमरे में सोने से आधा घंटे पहले मच्छर मारने का मॉस्किटो अवश्य लगाएं।

बच्चों के कपड़ों को एकदम साफ रखें। रोजाना धुले ही कपड़े पहनाएं।

बाहर की चीजें न खलाएं। मन करे तो घर पर बनाकर खिलाएं।

बच्चों का ऐसे रखें ख्याल

बच्चों को रोज कम से कम 7-8 गिलास पानी पिलाएं। जिससे उनके शरीर में पानी की कमी न रहे।

घर से निकलने से पहले रूमाल मुंह पर निकलकर जाएं। ताकि दूसरे के छींकने या खांसने से कीटाणुओं से बचा जा सके।

फ्रीज के पानी से दूर रखें। बच्चों की पानी की बोतल में थोड़ा सा ग्लूकोज और तुलसी के पत्ते डालकर दें, गुनगुना पानी पिलाएं।

फास्ट फूड, आइसक्रीम, कोल्डड्रिंक, फ्रूटी इत्यादि से परहेज रखें।

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