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महिलाओं ने एनजीओ अधिकारियों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, विरोध हुआ तो बैंरग लौटे

Bari News - कस्बे के कुशवाह धर्मशाला में गुरुवार को प्रधानमंत्री आजीविका मिशन के अंतर्गत हुई स्वयं सहायता समूह की आम सभा में...

Dainik Bhaskar

Mar 23, 2018, 07:10 PM IST
महिलाओं ने एनजीओ अधिकारियों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, विरोध हुआ तो बैंरग लौटे
कस्बे के कुशवाह धर्मशाला में गुरुवार को प्रधानमंत्री आजीविका मिशन के अंतर्गत हुई स्वयं सहायता समूह की आम सभा में महिलाओं ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया और सभा का बहिष्कार कर दिया। महिलाओं का विरोध देखकर सभा में आए एनजीओ के अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा। स्वयं सहायता समूह की गुड़िया ने बताया कि महिलाओं ने आजीविका मिशन के तहत 2013 में समूह बनाकर बीओ बनाए और ब्लॉक स्तर पर सीएलएफ गठित की गई। जिसमें सरकार द्वारा करीब सवा लाख रुपए का अनुदान मिला था, जो उनको महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के स्वावलंबन पर खर्च करना था, लेकिन अधिकारी चाहते हैं कि अनुदान राशि को हड़प लिया जाए। जिसके चलते ही उन्होंने फर्जी आमसभा बाड़ी के कुशवाह धर्मशाला में बुलाई थी, लेकिन जब समूह की महिलाओं को पता चला तो उन्होंने जाकर मौके पर विरोध कर दिया। जिसके बाद आम सभा नहीं हो सकी।

इसीप्रकार कांसौटी खेड़ा शिव शंकर सहायता समूह चलाने वाली महिला हेमवती ने आरोप लगाकर बताया कि वह आजीविका मिशन से जुड़ी है और उन्हें सामान खरीद के लिए बीस हजार का बजट दिया गया था। जिसका सामान लेने के बाद जब स्वयं सहायता समूह का चेक अधिकारियों को दिया गया तो उन्होंने उसे दो लाख कर भुगतान उठाना चाहा। जिस पर चेक क्लियर नहीं हुआ और जब वापस समूह के पास आया तो मामले का खुलासा हो सका। इसकी शिकायत उन्होंने सहायता समूह से जुड़े अधिकारियों से की तो मामला रफा-दफा किए जाने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बाड़ी. आमसभा में उपस्थित महिलाएं एवं एनजीओ अधिकारी।

एनजीओ से किया अनुबंध तोड़ चुकी है सरकार, फिर भी कर रहे हैं एनजीओ कार्य : बाड़ी प्रोजेक्ट मैनेजर

आजीविका मिशन के बाड़ी ब्लॉक के प्रोजेक्ट मैनेजर जितेन्द्र सिंह का कहना है कि सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2013 में धौलपुर जिले में ये योजना प्रारंभ की गई। जिसमें सरकार के अनुदान से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन में स्टाफ की कमी के चलते तीन एनजीओ से अनुबंध किया और जिले के तीनों ब्लॉकों में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए योजना से जोड़ने का जिम्मा सौंपा, लेकिन इन एनजीओ की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगने से सरकार द्वारा 3 दिसम्बर-17 को इन एनजीओ के साथ किए गए करार को तोड़ दिया गया था, लेकिन ये एनजीओ आज भी कार्य कर रही हैं। महिलाओं द्वारा जब इन एनजीओ अधिकारियों का विरोध किया गया है, जोकि बिलकुल जायज है। इसको लेकर उक्त एनजीओ के खिलाफ पहले ही शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी है।

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