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बिजलीघरों पर सुरक्षा उपकरण नहीं, जान जोखिम में डालकर काम करते हैं लाइनमैन

जोधपुर विद्युत वितरण निगम के बायतु स्थित सहायक अभियंता कार्यालय में कई अनियमितताएं सामने आई है। डिस्कॉम के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:45 AM IST

बिजलीघरों पर सुरक्षा उपकरण नहीं, जान जोखिम में डालकर काम करते हैं लाइनमैन
जोधपुर विद्युत वितरण निगम के बायतु स्थित सहायक अभियंता कार्यालय में कई अनियमितताएं सामने आई है। डिस्कॉम के कार्यवाहक सहायक अभियंता द्वारा वीसीआर शीटों में छेड़छाड़ कर डिस्कॉम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। इसी के साथ अवैध तरीके से विद्युत पोल लगाने व कनेक्शन शिफ्टिंग करने के भी मामले उजागर हुए है। यह सारे मामले उच्च स्तरीय अधिकारियों के ध्यान में होने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

वीसीआर शीटों में कांट छांट कर किया फर्जीवाड़ा

बायतु डिस्कॉम के कार्यवाहक सहायक अभियंता एवं तत्कालीन कनिष्ठ अभियन्ता ने कई बार वीसीआर शीट भरने के बाद जब उपभोक्ताओं द्वारा दबाव बनाया गया तो मौके पर भरी गयी शीटों की कार्यालय में आकर फिर से उसमें कांटछांट की गई। जो विभाग के नियमानुसार गलत है। तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता द्वारा जुलाई 2016 में भरी गई वीसीआर शीटों की यदि जांच करवाई जाए तो कई मामले सामने आ सकते है। वहीं पिछले दिनों बाटाडू जीएसएस से निकलने वाली लाइन से सिंगोडिया के नया बाटाडू निवासी एक छात्र की करंट से मौत हो गई थी। जिसमें डिस्कॉम ने यहां कार्यरत अधिकारी की गलती नहीं मानी। जबकि हकीकत में जब जीएसएस पर पता किया तो यहां पर निर्धारित मापदंड से ज्यादा की क्षमता के फ्यूज बंधे मिले। जो गलत है। अगर निर्धारित क्षमता के अनुसार फ्यूज बंधे होते तो करंट की घटना के दौरान फ्यूज अपने आप उड़ जाते।

बाटाडू. देखरेख के अभाव में जीएसएस पर टूटी पड़ी यार्ड लाइट।

संसाधनों का अभाव : इन बिजलीघरों में बिजली सप्लाई को ठीक करने के लिए रस्सा पुल्ली एवं चैन कूपी तक नही हैं। ऐसे में यहां ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। विद्युत सप्लाई ठीक करने एवं टूटे तारों को जोड़ते समय हादसे का अंदेशा बना रहता है। सामग्री नहीं होने के कारण लाइनमैन को मजबूरन जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। अधिकांश नए जीएसएस पर पानी के कनेक्शन नहीं हुए है।

जीएसएस पर नहीं यार्ड लाइटें, हादसे का खतरा

जेतोणियों की ढाणी जीएसएस पर पिछले लम्बे समय से यार्ड लाइटें नहीं होने के कारण जीएसएस अंधेरे में है। कर्मचारियों ने सुविधा के लिए अपने स्तर पर बल्ब लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की है,लेकिन पर्याप्त रोशनी के अभाव में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। रात के समय लाइट बारी बदलने के लिए कर्मचारियों को रोशनी की जरूरत रहती है। कम रोशनी में फ्यूज बदलने में परेशानी होती है। यही हाल 33 एवं 11 केवी जीएसएस बाटाडू, भीमडा, खनाजी का तला एव जोगासर जीएसएस के है। जीएसएस में मूंगिये की जगह ठेकेदार ने बड़े बड़े पत्थर डाल दिए है। बायतु स्थित डिस्कॉम कार्यालय में कार्यरत अधिकारी फोन पर ही निरीक्षण कर खानापूर्ति कर लेते है।

यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है।अगर वीसीआर शीटों में छेड़छाड़ हुई है तो जांच करवाएंगे। 10-15 दिनों में यार्ड लाइटें लगवा देंगे। -मांगीलाल जाट, अधीक्षण अभियन्ता, बाड़मेर

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