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देश में 10 हजार किमी स्टेट हाइवे को बनाया नेशनल हाइवे, हमारे हिस्से में सिर्फ 20 किमी

शहरी क्षेत्र में खाली मकानों के मामले में राजस्थान देश में दूसरे पायदान पर है। केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को पेश...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 07:10 AM IST
शहरी क्षेत्र में खाली मकानों के मामले में राजस्थान देश में दूसरे पायदान पर है। केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को पेश किए आर्थिक सर्वे के अनुसार राजस्थान में शहरी क्षेत्र में 17.3 प्रतिशत मकान खाली हैं। गुजरात में देश में सर्वाधिक 18.5 मकान खाली पड़े हैं। खाली मकानों की संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र देश में सबसे ऊपर है। देशभर में खाली मकानों की संख्या 11.09 मिलियन है जो कुल मकानों की करीब 12.38 प्रतिशत है। देश के शहरों में गुड़गांव में सबसे ज्यादा 26 प्रतिशत मकान खाली हैं। आर्थिक समीक्षा में यह भी सामने आया कि आंध्रप्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग में बदले गए राज्य मार्गों की दूरी जहां 300 से लेकर 600 किलोमीटर तक रही है वहीं राजस्थान में सिर्फ 20 किलोमीटर दूरी के राज्य मार्गों को राष्ट्रीय मार्गों में बदला गया। केंद्र सरकार के पास विभिन्न राज्यों से 64 हजार किलोमीटर दूरी के राज्य मार्गों को राष्ट्रीय मार्ग में बदलने के प्रस्ताव आए थे, जिसमें से 10 हजार किलोमीटर दूरी के राज्य मार्गों को राष्ट्रीय मार्गों में बदला गया।

रियलिटी चैक

आर्थिक समीक्षा में राजस्थान की स्थिति : प्रदेश के शहरों में खाली पड़ा है हर 17वां मकान, गुजरात के बाद राजस्थान में ही खाली हैं सबसे ज्यादा मकान

राज्य मार्ग जिन्हें राष्ट्रीय मार्ग में बदला गया

आंध्रप्रदेश

बिहार

हरियाणा

महाराष्ट्र

पंजाब

उड़ीसा

त्रिपुरा

राजस्थान

अभी भी नहीं सुधरे शिक्षा के हालात

आरटीई के अनुसार हर कक्षा में छात्रों की संख्या 30 से कम होनी चाहिए, लेकिन राजस्थान में अभी भी 18 फीसदी विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कक्षाओं में 30 से ज्यादा छात्र हैं। हालांकि, वर्ष 2008-10 की तुलना में इसमें पांच प्रतिशत की कमी आई है। छात्र की संख्या के मामले में आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, केरल, पंजाब और उत्तराखंड राज्यों की स्थिति राजस्थान से बेहतर है, वहीं गुजरात, हरियाणा, बिहार, उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हालात खराब हैं।

020 किमी

160 किमी

193 किमी

228 किमी

676 किमी

395 किमी

387 किमी

530 किमी

पंचायतों में सबसे ज्यादा महिला प्रतिनिधित्व

राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या देश में सबसे ज्यादा है। पंचायतीराज संस्थाओं में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या 50% से अधिक है, वहीं पंजाब में यह 30% से भी कम है। राजस्थान के अलावा छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, केरल, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित 21 राज्य ऐसे हैं जहां पंचायतीराज संस्थाओं में महिला नेतृत्व 40% से ज्यादा है। हालांकि, ग्राम पंचायतों में उपलब्ध मानव संसाधनों के मामले में प्रदेश काफी पीछे है। केरल में हर ग्राम पंचायत में सचिव उपलब्ध है वहीं राजस्थान में 63% पंचायतों में ही ग्राम सचिव कार्यरत हैं। संसाधनों में राज्य की स्थिति उत्तरप्रदेश, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों जैसी ही है।

बेटों की चाह अब भी बेटियाें पर भारी

सरकारें भले ही बेटी बचाओ का नारा लगा रही हों, लेकिन राजस्थान सहित छह राज्य ऐसे हैं जहां अभी भी बेटियों को पैदा करने से परहेज किया जाता है। हरियाणा में जहां 1000 लड़कियों की तुलना में 1120 लड़के पैदा होते हैं, वहीं पंजाब 1180, जम्मू-कश्मीर में 1160 और राजस्थान में 1120 लड़के पैदा हो रहे हैं। देश में 46% महिलाएं ही गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करती हैं। महिलाओं के अपने स्वास्थ्य के संबंध में फैसले लेने के मामले में पिछले 10 साल में थोड़ा सुधार हुआ है। वर्ष 2004-05 में 62.3% महिलाएं ऐसे फैसले ले पाती थी जो अब बढ़कर 74.5% हो गया है। वर्ष 2004-05 में 37% महिलाओं को शारीरिक और भावनात्मक हिंसा का सामना करना पड़ता था जो अब घटकर 29 प्रतिशत रह गया है।

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