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कड़कनाथ से शादी की शर्त; सगाई की रस्म में ‘सुंदरी’ ने कहा- घर में शौचालय, गैस चूल्हा, आवास नहीं है तो नहीं करूंगी शादी

भास्कर न्यूज नेटवर्क | दंतेवाड़ा मुर्गों की शादी के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं का धरातल पर प्रचार कैसे करना है...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 05:45 AM IST

कड़कनाथ से शादी की शर्त; सगाई की रस्म में ‘सुंदरी’ ने कहा- घर में शौचालय, गैस चूल्हा, आवास नहीं है तो नहीं करूंगी शादी
भास्कर न्यूज नेटवर्क | दंतेवाड़ा

मुर्गों की शादी के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं का धरातल पर प्रचार कैसे करना है इसका अच्छा उदाहरण छत्तीसगढ़ में कड़कनाथ मुर्गा-मुर्गी की सगाई के वक्त देखने को मिला। रविवार शाम दंतेवाड़ा के हीरानार से ‘कालिया’ कड़कनाथ मुर्गा अपने परिजन के साथ ‘सुंदरी’ मुर्गी को देखने और सगाई पक्की करने के लिए कासोली गया। सुंदरी के परिजन ने कालिया और उसके परिवार का स्वागत किया। दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। सगाई पक्की होती, इसके पहले सुंदरी की तरफ से तमाम शर्तें रख दी गईं। इसमें कालिया से पूछा गया, क्या आपके घर शौचालय, पीएम उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हा, बिजली, पीएम जन-धन योजना का खाता और खुद का पक्का पीएम आवास है। तभी रिश्ता पक्का होगा। कालिया की तरफ से कहा कि शौचालय है, गैस चूल्हा भी है। पक्के आवास के लिए अभी स्वीकृति मिली है जल्द ही वो भी बन जाएगा। इसके बाद सुंदरी ने शादी के लिए हामी भरी। पारंपरिक विधि-विधान से कालिया व सुंदरी की सगाई की रस्म पूरी की गई। कालिया पक्ष की ओर से सल्फी, महुआ का रस भी ले जाया गया था। सगाई पक्की होते ही समधी आपस में मिले, मिठाइयां बांटी। दोनों पक्षों की ओर से परिजनों के अलावा हीरानार व कासोली के तमाम वरिष्ठजनों की मौजूदगी में विवाह की तारीख तय की। 3 को मंडपाच्छादन, 4 को तेल व 5 मई को शादी। दंतेवाड़ा से कसोली के लिए बारात निकलेगी। 6 को रिसेप्शन होगा। शादी में आने के लिए तोता, मैना, गौरेया, कबूतर व बत्तख ने भी शादी में पधारने की मीठी मनुहार की है। इस पूरे कार्यक्रम के लिए शादी के कार्ड बंटने शुरू हो गए हैं। कालिया के पिता लुदरूराम नाग कड़कनाथ व मां कमला, सुंदरी के पिता सुकालूराम कड़कनाथ व मां झुन्नीबाई ने इस अनोखी शादी के लिए क्षेत्र के लोगों को आमंत्रित किया है। कड़कनाथ मुर्गे की प्रजाति को किसानों की प्रॉपर्टी के रूप में स्थापित करने के बाद कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने मुर्गे की शादी का यह दिलचस्प तरीका अपनाया है।

केंद्र की योजनाओं का प्रचार करने के लिए छत्तीसगढ़ का कृषि विज्ञान केंद्र करा रहा कड़कनाथ मुर्गों की शादी

सामाजिक कार्यक्रम ही एक-दूसरे को बांधकर रखते हैं

दंतेवाड़ा में इस प्रजाति के मुर्गों का उत्पादन बढ़ा है। केवीके के वैज्ञानिक डाॅ. नारायण साहू ने बताया कि सामाजिक कार्यक्रम ही ऐसे माध्यम होते हैं जो सभी को एक-दूजे से बांधे रखते हैं। सगाई की रस्मों में केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र है, यह सिर्फ इसलिए कि लोग इन योजनाओं के प्रति जागरूक हो सकें। कड़कनाथ का यह अनूठा विवाह दंतेवाड़ा में जरूर बदलाव लाएगा।

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