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पुलिस- ये गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात कर रहे

पुलिस- ये गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात कर रहे थे, सजा दीजिए; कोर्ट- कहां लिखा है कि गाड़ी चलाते हुए फोन करना अपराध है ...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 06:10 AM IST
पुलिस- ये गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात कर रहे थे, सजा दीजिए; कोर्ट- कहां लिखा है कि गाड़ी चलाते हुए फोन करना अपराध है


एजेंसी | कोच्चि

केरल हाईकोर्ट ने अनोखा फैसला सुनाते हुए गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात करने के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया। याचिकाकर्ता पिछले साल 26 अप्रैल की शाम को गाड़ी चला रहा था। उसी दौरान वह मोबाइल फोन पर बात भी कर रहा था। उसे तभी पकड़ा गया था। सिंगल बेंच ने पाया कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना मोटर वाहन अधिनियम के सेक्शन 118 में अपराध है। डिविजन बेंच के जस्टिस एएम शफीक और जस्टिस पी सोमराजन ने यह फैसला दिया है। केरल संतोष एमजे की तरफ से बेंच के सामने इस संबंध में पीआईएल दाखिल की गई थी।

इसके बाद मामला डिविजनल बेंच के सामने आया क्योंकि सिंगल बेंच ने 2012 के अब्दुल लतीफ बनाम केरल राज्य मामले में जस्टिस एसएस सतीशचंद्रन के आदेश के विपरीत फैसला दिया था। 2012 के फैसले में जस्टिस सतीश चंद्र ने कहा था कि धारा118 में कहीं भी यह बात नहीं है कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना अपराध है। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के सेक्शन 184 में कहा गया है कि गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करना खतरनाक है।

सेक्शन 118-ई में आने वाले अपराध दंडनीय हैं, जिसके तहत दोषी को तीन साल तक की जेल या 10,000 रुपए जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। वहीं सेक्शन 184 में छह महीने तक की जेल या 1,000 रुपए जुर्माना या दोनों हो सकता है। दो सिंगल बेंच के अलग-अलग आदेशों को लेकर डिविजन बेंच ने सुनवाई की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एम नारायण नामबियर बनाम केरल राज्य का रिफरेंस लेते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर कोई गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करता है तो उस पर 118 सेक्शन की धारा नहीं लगेगी। बेंच ने जस्टिस सतीशचंद्रन के आदेश को सही माना।

केरल हाईकोर्ट ने गाड़ी चलाते हुए फोन करने के आरोपी व्यक्ति की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की

गाड़ी चलाते हुए फोन पर बात करने पर कोई कानून नहीं: कोर्ट