Hindi News »Rajasthan »Barmer» श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का वृतांत सुनाया, मंच पर सजी झांकी ने मन मोहा

श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का वृतांत सुनाया, मंच पर सजी झांकी ने मन मोहा

शिव शक्ति सेवा समिति द्वारा आयोजित की जा रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन समिति के संयोजक हरीश मिस्त्री...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 06:30 AM IST

  • श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का वृतांत सुनाया, मंच पर सजी झांकी ने मन मोहा
    +1और स्लाइड देखें
    शिव शक्ति सेवा समिति द्वारा आयोजित की जा रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन समिति के संयोजक हरीश मिस्त्री परिवार की ओर से भागवत कथा पोथी पूजन किया। आयोजन समिति के रमेशसिंह इंदा ने बताया की ईश्वर आराधना के बाद संकीर्तन करवाकर कथा के पहले सोपान में व्यास पीठ से लक्ष्मणदास महाराज ने चंद्र वंश का वर्णन सुनाते हुए बताया कि मथुरा नरेश कंस एक अत्याचारी राजा था। उससे जनता बड़ी त्रस्त थी। कंस के अत्याचार से पृथ्वी पर चारों तरफ आतंक छा गया। तब पृथ्वी माता ने गोमाता का रूप धारण कर ईश्वर की आराधना कर स्तुति कि। श्री हरि के वचन कंस तक पहुंचने पर कंस ने अपनी बहन देवकी व वासुदेव को कारागार में डाल दिया। 7 संतानों को कंस द्वारा मार दिया गया। आठवीं संतान के रूप में स्वयं श्री हरि श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया। कंस से बचाने के लिए वासुदेव ने श्री कृष्ण को गोकुल नगर में यशोदा व नंद बाबा के यहां पहुंचाया। गोकुल नगरी में कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा कि बाल कृष्ण ने कालिया नाग और पूतना का वध किया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण भगवान की झांकी का दृश्य देखकर श्रद्धालु आनंदित हो उठे।

    शोभालादर्शान में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

    सेड़वा | शोभालादर्शान स्थित कनीराम धाम में श्रीभागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचन करने हुए सीताराम महाराज ने कहा कि भगवान भाव का भूखा है। श्री कृष्ण को दुर्योधन ने अपने निवास पर भोजन के लिए निमंत्रण भेजा और श्रीकृष्ण ने निमंत्रण को स्वीकार कर लिया। तब दुर्योधन को श्रीकृष्ण के अपने निवास पर आने तथा भोजन करने पर अपने मन अहंकार का भाव होने पर श्रीकृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग को ठुकराकर विदुर के घर जाकर केले के छिलको का भोग लगाया। महाराज ने कर्दम ऋषि का वृतांत बताते हुए कहा कि ऋषि के नौ पत्रियां व एक पुत्र पैदा हुआ। लेकिन ऋषि ने कभी पुत्र व पुत्री के बीच भेद नहीं समझा। आज का स्वार्थी मनुष्य पुत्री के पैदा होने से पहले ही कोख में मार देते हैं। संत ने कहा कि भाग्य से पुत्र की प्राप्ति होती है तथा सौभाग्य से पुत्री की प्राप्ति होती है।

  • श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण का वृतांत सुनाया, मंच पर सजी झांकी ने मन मोहा
    +1और स्लाइड देखें
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Barmer

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×