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चीन को ताकत दिखाने के लिए मलेशिया के साथ भारतीय सेना ने लाॅन्च किया संयुक्त युद्धाभ्यास ‘हरिमो शक्ति’

डिफेंस कॉरेस्पोंडें | जोधपुर दक्षिण एशिया में भारत से घिरे देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव का जवाब देने के लिए भारत...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 06:30 AM IST
डिफेंस कॉरेस्पोंडें | जोधपुर

दक्षिण एशिया में भारत से घिरे देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव का जवाब देने के लिए भारत आसियान देशों में अपना वर्चस्व बढ़ा रहा हैं। सिंगापुर, इंडोनेशिया सहित 10 देशों से सैन्य संबंध मजबूत करने के लिए भारत रक्षा सहयोग कर रहा है। इसके तहत पहली बार मलेशिया के कुआलालंपुर में भारत और मलेशियन सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘हरिमो शक्ति’ सोमवार को लाॅन्च किया गया। इसमें जोधपुर स्थित कोणार्क कोर की एक सैन्य टुकड़ी आने वाले 13 दिन तक मलेशिया की सेना के साथ खास तौर से जंगल वारफेयर सहित आतंकवाद का मुकाबला करने का अभ्यास करेगी।

इंडो-मलेशियाई रक्षा सहयोग के तहत कुआलालंपुर के विडेबन शिविर में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने लिए ये युद्धाभ्यास शुरू किया गया हैं। इस मौके पर मलेशियाई सेना की 4 डिवीजन के कमांडर मेजर जनरल दातुक मोहम्मद जकरिया बिन हजयाडी ने भारतीय दल के जोधपुर स्थित कोणार्क कोर की यूनिट के साथ बातचीत की। 4 ग्रेनेडियर के सीओ कर्नल एसएन कार्तिकेयन ने 1 रॉयल रंजीर रेजिमेंट सीओ लेफ्टिनेंट कर्नल इरवान बिन इब्राहिम को ग्रेनेडियर रेजिमेंट के झंडे को सौंपने के साथ ही ये युद्धाभ्यास शुरू हो गया। ये युद्धाभ्यास आगामी 13 मई तक चलेगा। भारतीय दल में 90 जवान व अफसर तथा मलेशियाई दल में 113 लोग शामिल हैं।

दोनों सेनाएं सीखेंगी रण कौशल: दो हफ्ते के लंबे सैन्य अभ्यास को दो चरणों में बांटा गया है। पहले फेज में क्रॉस ट्रेनिंग दी जाएगी और दूसरे चरण में फील्ड ट्रेनिंग दी जाएगी।

दोनों सेनाओं द्वारा संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत काउंटर टेररिस्ट और काउंटर इंसरजेंसी में अपने सामरिक और तकनीकी कौशल को उभारा जाएगा। इस अभ्यास में एक क्रॉस ट्रेनिंग चरण शामिल होगा जिसके बाद हूलू लैंगट के जंगलों में सात दिनों के फील्ड प्रशिक्षण चरण होंगे, जिसमें दोनों सेनाएं संयुक्त रूप से प्रशिक्षण गतिविधियों की एक श्रृंखला को निष्पादित करेंगे। जंगल युद्ध में सामरिक परिचालन पर ध्यान केंद्रित रहेगा। अभ्यास हरिमो शक्ति दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक सकारात्मक कदम है।



जोधपुर स्थित कोणार्क कोर की एक टुकड़ी ले रही हिस्सा

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