Hindi News »Rajasthan »Barmer» त्याग को प्राथमिकता देना ही सच्चे साधक का दृष्टिकोण : रोलसाहबसर

त्याग को प्राथमिकता देना ही सच्चे साधक का दृष्टिकोण : रोलसाहबसर

यह शिविर का यह सातवां प्रभात है। यहां बहुत से लोग नए हैं, कई एकाधिक बार आए हैं तो कई वर्षों से भी आ रहे हैं। लेकिन अब...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 07:05 AM IST

त्याग को प्राथमिकता देना ही सच्चे साधक का दृष्टिकोण : रोलसाहबसर
यह शिविर का यह सातवां प्रभात है। यहां बहुत से लोग नए हैं, कई एकाधिक बार आए हैं तो कई वर्षों से भी आ रहे हैं। लेकिन अब लग रहा है कि हम युगों से साथ रह रहे हैं। हमारा यह मिलन कितना सुंदर है, इसे आंखों से नहीं देखा जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। यद्यपि संसार का कुछ प्रभाव अभी भी हम पर है, जिसे हमें दूर करना है। इसके लिए सत्संग ही साधन है, जो यहां निरंतर चल रहा है। जिस प्रकार श्री राम के इन्द्रजीत के नागपाश में बंध जाने पर भगवान के वाहन गरुड़ को शंका हुई, उसी प्रकार हमें भी किसी विषय में शंका हो सकती है। गरुड़ अपनी शंका दूर करने नारद जी के पास गए। उन्होंने ब्रह्माजी के पास तथा ब्रह्माजी ने शंकरजी के पास भेजा। शंकरजी ने उन्हें काग भुशुंडी के सत्संग में भेजा। जहां जाकर उनकी शंका दूर हुई। जो जागरूक होकर सुनता है, उसकी शंकाएं मिट जाती है। यहां के हर कार्यक्रम में हमारी शंकाओं का समाधान है, आवश्यकता है केवल निष्कपटता और निर्मल हृदय की। यह बात क्षत्रिय युवक संघ के उच्च प्रशिक्षण शिविर में संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने शिविर के सातवें दिन प्रभात संदेश में कही।

शिविर में स्वयंसेवकों को ‘मेरी साधना’ पुस्तक पर चर्चा में बताया कि केसरिया ध्वज हमारी क्षात्र परम्परा का मूर्त प्रतीक है, जो हमारी साधना को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करता है। अर्थबोध में तनसिंह रचित ‘चिता जल रही है’ सहगीत पर चर्चा करते हुए बताया गया कि साधक जीवन में ऐसी भी स्थिति आती है। जिसमें दो श्रेष्ठ विकल्पों में से श्रेष्ठतर विकल्प का चयन करना होता है। राग और त्याग में त्याग को प्राथमिकता देना ही सच्चे साधक का दृष्टिकोण है। बौद्धिक में उत्तरदायित्व विषय पर प्रवचन हुआ, जिसमें बताया गया कि सृष्टि में जड़ पदार्थों से लेकर उच्च चेतना वाले प्राणियों तक, सभी का कुछ न कुछ उत्तरदायित्व होता है। संघ में भी साधक अपने परिवार, समाज, राष्ट्र, मानवता और स्वयं के प्रति उत्तरदायित्व को जानता है और उसे निभाने का अभ्यास संघ की सामूहिक कर्म प्रणाली में स्वयं को नियोजित करके प्रारंभ करता है।

बाड़मेर. क्षत्रिय युवक संघ के शिविर में प्रभात सत्र को संबोधित करते भगवानसिंह रोलसाहबसर।

भास्कर संवाददाता | बाड़मेर

यह शिविर का यह सातवां प्रभात है। यहां बहुत से लोग नए हैं, कई एकाधिक बार आए हैं तो कई वर्षों से भी आ रहे हैं। लेकिन अब लग रहा है कि हम युगों से साथ रह रहे हैं। हमारा यह मिलन कितना सुंदर है, इसे आंखों से नहीं देखा जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। यद्यपि संसार का कुछ प्रभाव अभी भी हम पर है, जिसे हमें दूर करना है। इसके लिए सत्संग ही साधन है, जो यहां निरंतर चल रहा है। जिस प्रकार श्री राम के इन्द्रजीत के नागपाश में बंध जाने पर भगवान के वाहन गरुड़ को शंका हुई, उसी प्रकार हमें भी किसी विषय में शंका हो सकती है। गरुड़ अपनी शंका दूर करने नारद जी के पास गए। उन्होंने ब्रह्माजी के पास तथा ब्रह्माजी ने शंकरजी के पास भेजा। शंकरजी ने उन्हें काग भुशुंडी के सत्संग में भेजा। जहां जाकर उनकी शंका दूर हुई। जो जागरूक होकर सुनता है, उसकी शंकाएं मिट जाती है। यहां के हर कार्यक्रम में हमारी शंकाओं का समाधान है, आवश्यकता है केवल निष्कपटता और निर्मल हृदय की। यह बात क्षत्रिय युवक संघ के उच्च प्रशिक्षण शिविर में संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने शिविर के सातवें दिन प्रभात संदेश में कही।

शिविर में स्वयंसेवकों को ‘मेरी साधना’ पुस्तक पर चर्चा में बताया कि केसरिया ध्वज हमारी क्षात्र परम्परा का मूर्त प्रतीक है, जो हमारी साधना को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करता है। अर्थबोध में तनसिंह रचित ‘चिता जल रही है’ सहगीत पर चर्चा करते हुए बताया गया कि साधक जीवन में ऐसी भी स्थिति आती है। जिसमें दो श्रेष्ठ विकल्पों में से श्रेष्ठतर विकल्प का चयन करना होता है। राग और त्याग में त्याग को प्राथमिकता देना ही सच्चे साधक का दृष्टिकोण है। बौद्धिक में उत्तरदायित्व विषय पर प्रवचन हुआ, जिसमें बताया गया कि सृष्टि में जड़ पदार्थों से लेकर उच्च चेतना वाले प्राणियों तक, सभी का कुछ न कुछ उत्तरदायित्व होता है। संघ में भी साधक अपने परिवार, समाज, राष्ट्र, मानवता और स्वयं के प्रति उत्तरदायित्व को जानता है और उसे निभाने का अभ्यास संघ की सामूहिक कर्म प्रणाली में स्वयं को नियोजित करके प्रारंभ करता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Barmer

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×