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1000 साल पुराने व पाकिस्तान में 70 साल से बंद मंदिर के खोले कपाट
पाकिस्तान ने एक हजार साल पुराने और पिछले 70 साल से बंद मंदिर के कपाट हिंदूओं के लिए फिर खोल दिए हैं। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सियालकोट में शिवाला तेजा सिंह मंदिर का कपाट हाल ही में खोला गया है।
मंदिर के वास्तुशिल्प को देख कर पता चलता है कि मंदिर का निर्माण चोल वंश के राजाओं द्वारा किया गया था। आजादी के बाद पूरी तरह उपेक्षित हो चुके इस मंदिर की हालत तब और खराब हो गई, जब 1992 में अयोध्या बाबरी मस्जिद विवाद हुआ था। इस दौरान कट्टरपंथियों ने मंदिर को बम से उड़ा दिया था। फिलहाल अब इस मंदिर का कायाकल्प कर हिंदूओं के लिए खोल दिया गया है। वहां के लोगों का कहना है कि मंदिर का द्वार खुलने से उन्हें महसूस हो रहा है कि वो हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। मंदिर में बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर में एक ही परिवार की तीन पीढिय़ां भगवान के दर्शन करने पहुंच रही हैं। बताया जा रहा है कि सरदार तेजा सिंह ने शवाला तेजा सिंह मंदिर का निर्माण करवाया था। जब देश का विभाजन हुआ उस दौरान इसे बंद कर दिया गया था। पाकिस्तान अस्तित्व में आने के बाद मंदिर पूरी तरह बंद कर दिया गया। करीब 70 साल बाद सरकार ने अल्पसंख्यकों की सुनी है। जब लोग वहां से भारत चले आए तब वहां हिंदूओं की आबादी खासी कम हो गई थी। इसके बाद से मंदिर में पूजा नहीं की जा सकी। मंदिर भी जर्जर हो गया था। अब जाकर मंदिर को ठीक किया गया है। एेसा ही बडग़्राम के निकट कृष्ण मंदिर है जो पाक की स्थापना से पहले का है। यह भी जर्जर था, वक्फ विभाग ने इसका हाल ही में नवीनीकरण कराया है। यहां क्षेत्र के लोगों ने
मिलकर होली खेली।
पुजारी काशीराम ने कहा कि मजहबी काम के बीच हिंदू-मुस्लिम दखल नहीं देते हैं। हम जगराता यानि रात्रि जागरण करते हैं तो कोई मना नहीं करता। इस काम में मुस्लिम समुदाय के लोग भी हमारी मदद करते हैं। आज हमें अपने धर्म और मजहब का पता चल गया कि हमारा मजहब है। इससे पहले लोगों को हमारे धर्म के बारे में पता नहीं चलता था। अब लोगों को खासतौर पर पता चल गया कि हम हिंदू हैं और हमें हिंदू बनकर ही रहना है।
महिला श्रद्धालु अनमोल ने बताया कि हिंदू और मुस्लिम एक साथ रहते हैं। हम इसी धरती में पैदा हुए और हमारा मरना जीना इसी धरती के साथ जुड़ा हुआ है। जब यहां अजान होती है तब पूजा-पाठ बंद कर दी जाती है। ऐसा एहतराम के तौर पर किया जाता है। हम एक साथ चलते हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘दादा, बेटा और पोता। एक जगह बैठकर तीनों पूजा कर रहे हैं। दादा ने वो माहौल नहीं देखा था जो आज देख रहे हैं। आज हम बहुत खुश हैं कि हमारी तीनों नस्लें एक साथ शिवाला मंदिर में पूजा कर रही हैं।
पाकिस्तान के सियालकाेट में स्थित पुरातन मंदिर।