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दयोदया रेल हादसा : दो माह बाद रेलवे ने 78 पेज की रिपोर्ट में विभागों को तो बख्शा...जिम्मेदार ठहराया पत्थरों को

Barmer News - भारतीय रेल यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। ट्रेन पलटने के लिए भी जांच कमेटी ने रेलवे के जिम्मेदारों पर कारर्वाई की...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 10:06 AM IST
shiv News - rajasthan news doyadia rail incident two months later railway has spared the departments in the 78 page report the stones attributed to it
भारतीय रेल यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। ट्रेन पलटने के लिए भी जांच कमेटी ने रेलवे के जिम्मेदारों पर कारर्वाई की बजाय पत्थरों को दोषी ठहरा दिया। मामला दो फरवरी का है। जबलपुर से जयपुर के रास्ते अजमेर को जा रही ट्रेन नंबर 12181 दयोदय एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन और एक एसएलआर कोच के पटरी से उतर गए थे। रेलवे की जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने ना तो किसी विभाग की गलती मानी है और ना ही किसी कर्मचारी को दोषी माना है। लेकिन इस रिपोर्ट में जिस कारण से हादसा होने की आशंका जताई गई है, वह चौंकाने वाला है। क्योंकि रेलवे ने हादसा होने के पीछे पटरी पर एक पत्थर का टुकड़ा रखा होने की आशंका जताई है यानि इसके लिए एक पत्थर के टुकडे़ को दोषी माना है। दरअसल, 2 फरवरी को दोपहर करीब 12:30 बजे जब ट्रेन जयपुर से 18 किमी पहले थी तब लोको पायलट को झटका महसूस हुआ। जब तक वजह कुछ करता, तब तक इंजन और उसके पीछे लगा एसएलआर (पार्सल कोच) बेपटरी हो गया था। गिट्टी में कोच के पहिए थम गए अन्यथा अन्य कोच भी पलट सकते थे। गनीमत रही कि किसी भी यात्री को ज्यादा चोट नहीं आई थी। इस हादसे की जांच रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी गई है। इसमें किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं मानी गई है।

मालगाड़ी के इंजन से चला रहे थे पैसेंजर, मेंटिनेंस भी अधूरी

रेलवे द्वारा दयोदय एक्सप्रेस को मालगाडी के इंजन से चलाया जा रहा था। नियमानुसार गुड्स (माल) और पैसेंजर ट्रेन के लिए अलग इंजन होते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों की गति असमान होती है। पैसेंजर की अधिकतम स्पीड 110 व गुड्स की 90-100 होती है। दोनों की पॉवर और कैरिज कैपेसिटी भी अलग होती है। ऐसे में किसी विशेष परिस्थिति में ही इंजनों की अदला-बदली की जाती है। इसके अलावा ट्रेन में मालगाडी का मेंटिनेंस भी बाकी थी। हादसा 2 फरवरी को हुआ और इंजन की मेंटिनेंस 25 जनवरी को होनी थी। करीब दो महीने तक एक-एक कर्मचारी के बयान लिए गए, इंजन को कई दिनों तक डीजल शेड में रखा गया और टीम बार-बार उसका मुआयना करती रही। हादसे के वक्त ट्रेन 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रही थी। बात इंजन में खामी की थी लेकिन जिम्मेदारी विभाग पर नहीं डाली गई। हादसे में इंजीनियरिंग व विद्युत विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे थे ऐसे में दोनों को बचा लिया गया।

शिवांग चतुर्वेदी | जयपुर

भारतीय रेल यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। ट्रेन पलटने के लिए भी जांच कमेटी ने रेलवे के जिम्मेदारों पर कारर्वाई की बजाय पत्थरों को दोषी ठहरा दिया। मामला दो फरवरी का है। जबलपुर से जयपुर के रास्ते अजमेर को जा रही ट्रेन नंबर 12181 दयोदय एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन और एक एसएलआर कोच के पटरी से उतर गए थे। रेलवे की जांच रिपोर्ट में अधिकारियों ने ना तो किसी विभाग की गलती मानी है और ना ही किसी कर्मचारी को दोषी माना है। लेकिन इस रिपोर्ट में जिस कारण से हादसा होने की आशंका जताई गई है, वह चौंकाने वाला है। क्योंकि रेलवे ने हादसा होने के पीछे पटरी पर एक पत्थर का टुकड़ा रखा होने की आशंका जताई है यानि इसके लिए एक पत्थर के टुकडे़ को दोषी माना है। दरअसल, 2 फरवरी को दोपहर करीब 12:30 बजे जब ट्रेन जयपुर से 18 किमी पहले थी तब लोको पायलट को झटका महसूस हुआ। जब तक वजह कुछ करता, तब तक इंजन और उसके पीछे लगा एसएलआर (पार्सल कोच) बेपटरी हो गया था। गिट्टी में कोच के पहिए थम गए अन्यथा अन्य कोच भी पलट सकते थे। गनीमत रही कि किसी भी यात्री को ज्यादा चोट नहीं आई थी। इस हादसे की जांच रिपोर्ट महाप्रबंधक को सौंप दी गई है। इसमें किसी विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं मानी गई है।

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