अाधी कप चाय की कीमत पर दो परिवारों काे Rs.40 लाख का आर्थिक संबल

Barmer News - अाधे कप चाय से भी कम कीमत पर विपत्ति के समय अपने परिवार काे अार्थिक संबल दे सकते हैं। जी हां यह सच है अाैर यह भारतीय...

Nov 11, 2019, 07:06 AM IST
अाधे कप चाय से भी कम कीमत पर विपत्ति के समय अपने परिवार काे अार्थिक संबल दे सकते हैं। जी हां यह सच है अाैर यह भारतीय स्टेट बैंक ने कर दिखाया है। देश में किसी बैंक की यह अकेली याेजना है जाे किसी बड़ी विपत्ति में अापके परिवार के लिए अार्थिक संबल बन रही है। हर दिन 2.75 पैसे के खर्च पर बैंक परिवार काे 20 लाख का बीमा उपलब्ध कराती है। पिछले डेढ़ साल में बाड़मेर जिले में 10 एेसे परिवाराें काे यह अार्थिक संबल भी दिया। अब ये परिवार मजबूती से समाज में खड़े हैं।

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एसबीअाई अपने खाताधारियों काे 20 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी देने वाली देश की पहली सरकारी बैंक

भारतीय स्टेट बैंक ने अपने खाताधारियों काे बीमा की यह सुविधा उपलब्ध कराई है। खाता खाेलते समय बैंक बीमा की राशि के रूप में एक हजार रुपए जमा कराती है, जाे पूरे एक साल तक के लिए वैध हाेता है। इस बीच, खाताधारी की किसी हादसे में माैत हाे जाती है ताे उसके परिवार काे बैंक 20 लाख रुपए की राशि देती है। इसमें न केवल दुर्घटना बल्कि, सर्पदंश से हुई माैत काे भी शामिल किया गया है। इतना ही नहीं सिर्फ साै रुपए 2 लाख, दाे साै रुपए में 4 लाख, पांच साै रुपए में 10 लाख रुपए का बीमा याेजना शामिल है। बैंक ने समाज के कमजाेर, मध्यम अाैर उच्च वर्ग काे ध्यान में रखकर यह बीमा याेजना बनाई है। देश में एसबीअाई ही अकेली एेसी बैंक हैं जिसने अपने खाताधारियों काे यह सुविधा दी है।

बीमा नहीं हाेता ताे पिता की मृत्यु के बाद डाॅक्टर नहीं बन पाता

मैं एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था, अचानक 2017 में मेरे पिता की बायतु के पास एक दुर्घटना में मृत्यु हाे गई। मैं उस समय जयपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था। अचानक इस खबर से हम सब पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा। मुझे लगा कि मुझे पढ़ाई छाेड़कर वापस बाड़मेर जाना हाेगा अाैर घर परिवार की जिम्मेदारी संभालनी हाेगी। इस बीच मुझे एसबीअाई से काॅल अाया कि करीब डेढ़ माह पूर्व मेरे पिता ने महावीर नगर शाखा में सेविंग एकाउंट खाेला था, अाैर उस समय एक हजार रुपए जमा कराकर यह पालिसी ली थी,। बैंक ने मुझे बुलाकर बीमा की 20 लाख रुपए की राशि दी। मैंने फैसला किया कि उस राशि काे एफडी कर अपनी पढ़ाई पूरी करूंगा। मेरे लिए यह जीवन ज्याेति बनी अाैर मैं डाॅक्टर बन गया। अब मेरा भाई भी मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। - विशाल कुमार, बायतु बाड़मेर

केस 1

पति की दुर्घटना में माैत, एसबीआई ने दी ताकत

मेरे पति मंगला फैक्टरी में गार्ड थे। एक दिन वे वहां ड्यूटी पर थे कि फैक्टरी में ही ट्रक के बैक करते समय हादसे में उनकी माैत हाे गई। मेरा परिवार ताे पूरी ताैर पर सड़क पर अा गया। परिवार अाैर रिश्तेदाराें ने मुंह माेड़ लिया। मुझे बेटी की पढ़ाई अाैर उसकी शादी की चिंता भी थी। इस बीच एसबीअाई के अधिकारियाें ने संपर्क किया अाैर बताया कि पति के खाते के साथ बीमा हाेने के कारण बैंक ने मुझे 20 लाख रुपए का भुगतान करने के लिए बुलाया है। मेरे पति ताे नही रहे लेकिन उनकी यह सूझ बूझ से मेरा परिवार अार्थिक रूप से फिर खड़ा हाे गया है। मैंने यह राशि बेटी की पढ़ाई अाैर उसकी शादी के लिए बैंक में ही जमा करा दी है। अभी उसके ब्याज से बेटी की पढ़ाई करा रही हूंं।

- ममता देवी बाड़मेर

केस 2


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