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हर इंसान मान-सम्मान चाहता है, काम नहीं हो रहे, इस्तीफा दे दूंगा: हेमाराम
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में विधायकों की इस्तीफे और उठा पटक के बाद अब राजस्थान में भी विधायकों की नाराजगी खुल कर सामने आने लगी है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार में विधायकों के इस्तीफे के बाद राजस्थान में गुड़ामालानी के मौजूदा विधायक और पूर्व केबिनेट मंत्री हेमाराम चौधरी की नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई है। चौधरी ने अब एक बार फिर सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि मेरा काम नहीं होता है तो मैं कभी भी इस्तीफा दे सकता हूं। प्रदेश सरकार में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। जनता ने जिन उम्मीदों के साथ विधायक चुने और जनता के काम नहीं होते है तो हमें पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। 14 फरवरी 2019 में ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्होंने अस्वीकार करते हुए कहा था कि एक बार रुको, आपकी पूरी सुनवाई होगी, लेकिन सवा साल में मैं जनता के वादों पर खरा नहीं उतर पाया हूं। इसलिए राजनीति से सन्यास लेने का विचार कर रहा हूं।
सवाल: सरकार से इतनी नाराजगी क्यों हैं?
जवाब: जब जनता के ही काम नहीं हो तो कैसे खुश हो सकता है। मैं तो तैयार बैठा हूं, कभी भी पद छोड़ सकता हूं। मुझे पद की चिंता नहीं है, मैं जनता के काम करना चाहता हूं। सवा साल हो गया, लेकिन अब जनता अाैर इंतजार नहीं कर सकती है।
सवाल: ऐसे क्या काम है कि जो नहीं हो रहे है, जिसको लेकर आप इतने नाराज है?
जवाब: मैं विधायक हूं और एक महिला कांस्टेबल का भी ट्रांसफर नहीं करवा सकता हूं ताे क्या मतलब है। पहले कर्मचारियों की दूसरे जिले में नियुक्ति के लिए पुरुष ट्रांसफर पर प्रतिबंध 7 और महिला के लिए 3 साल का प्रतिबंध था, लेकिन गत भाजपा सरकार ने 15 साल कर दिया। अब एक महिला दूसरे जिले में अकेले 15 साल कैसे रहेगी। मेरी विधानसभा में ये ही मांग थी कि इसे 3 साल किया जाए, कानून बनाने वाले भी हम ही है।
सवाल: आपने कहा कि राजनीति में भी वीआरपी होना चाहिए ऐसा क्यों?
जबाव: नौकरी में 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृति मिल जाती है, तो राजनीति में क्यों नहीं? मैं 72 साल का हो गया हूं, लेकिन राजनीति मेरा पीछा नहीं छोड़ रही है। मैं तो 2014 का भी चुनाव नहीं लड़ना चाहता था, लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष कह दें कि आपको चुनाव लड़ना तो उसे भी मना कैसे कर सकते है। 2019 में भी मुझे उच्च नेतृत्व ने कह दिया कि चुनाव आपको ही लड़ना है।
सवाल: राजस्थान में तो मध्यप्रदेश जैसे हालात नहीं बनेंगे?
जवाब: हर आदमी अपना मान सम्मान चाहता है, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी काम नहीं होने पर सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी थी तो मुख्यमंत्री बोले कि सड़कों पर उतरो कौन रोकता है। मुख्यमंत्री को उनकी समस्या सुननी चाहिए थी, इस तरह का कोई जवाब समाधान नहीं था। मैंने तो 14 फरवरी 2019 को ही विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी रुको।
सवाल: सरकार में सचिन-गहलोत को लेकर गुटबाजी है क्या?
जवाब: गुटबाजी है या नहीं, मैं सिर्फ मेरी बता सकता हूं। सरकार के हाथ क्यों बंधे है, सरकार के हाथ तो खुले होने चाहिए। सवा साल हो गया है, अंतिम साल तो सरकार कुछ भी करेगी तो जनता विश्वास नहीं करेंगी, उन्हें पता है सबकुछ वोट के लिए किया है। अब जनता बहुत समझदार हो चुकी है।