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2012 में विधानसभा में सरकार ने कहा था सीमा विस्तार प्रगति पर, अब भी कागजों में प्रगति

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 10:45 AM IST

Barmer News - नगर परिषद बाड़मेर की सीमा विस्तार से वंचित कॉलोनियों के लोगों की सालों से लगातार मांग के बावजूद भी दर्जनों...

shiv News - rajasthan news in the assembly in 2012 the government had said that the border expansion progressed still progress in the paper
नगर परिषद बाड़मेर की सीमा विस्तार से वंचित कॉलोनियों के लोगों की सालों से लगातार मांग के बावजूद भी दर्जनों कॉलोनियां नगर परिषद की सीमा में शामिल नहीं हो पाई। जबकि 2002 के बाद कई बार नगर परिषद की साधारण सभा की बैठक में सीमा विस्तार की मांग को लेकर प्रस्ताव पास हो चुके हैं। 2012 में विधायक मेवाराम जैन ने विधानसभा के आठवें सत्र में तारांकित प्रश्न संख्या 3743 कर चुके हैं। इसके जवाब में सरकार ने कहा था कि सीमा विस्तार का काम प्रक्रियाधीन है। जबकि 7 साल से सीमा विस्तार पर कोई काम नहीं हुआ, गत साल सीमा विस्तार का जो आदेश जारी हुआ था उसे भी निरस्त कर दिया। ऐसे में अब लोगों ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। वंचित आबादी हक की लड़ाई के लिए 15 को बाड़मेर बंद का आह्वान किया है।

राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने 31 अगस्त 2018 को एक आदेश जारी कर 30 साल बाद शहर के आसपास आबाद कॉलोनियों को नगर परिषद में शामिल किया था। इनमें राजस्व गांव बाड़मेर आगौर, बाड़मेर मराग, गादान व बाड़मेर शहर का ग्राम भाग था। जबकि कुछ दिन पूर्व वर्तमान सरकार ने इस आदेश को निरस्त कर सालों बाद जगी हजारों लोगों की उम्मीद को तोड़ दिया। इसके बाद अब लोगों ने राजनैतिक कारणों से नगर परिषद में शामिल किए जाने से रोकने का आरोप लगाते हुए 15 जून को बाड़मेर बंद का आह्वान किया है।


2012 में विधायक ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा

बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने 2012 में 13वीं विधानसभा में सीमा विस्तार की मांग का मुद्दा उठाया था, जबकि अब सरकार ने इसे निरस्त कर दिया। इसके बाद 5 फरवरी 2013 को भी विधायक जैन ने स्वायत्त शासन विभाग से सीमा विस्तार जल्द करने की अनुशंसा भी की थी, लेकिन इसके बाद विधायक जैन सीमा विस्तार की मांग पर चुप्पी तोड़ नहीं रहे है। 2013 में तत्कालीन सांसद हरीश चौधरी ने भी 6 फरवरी को स्वायत्त शासन विभाग को फाइल भेज सीमा विस्तार की मांग उठाई थी।

ये कॉलोनियां है सीमा विस्तार से वंचित

ग्राम पंचायत बाड़मेर आगोर के बाड़मेर गादान, बाड़मेर मगरा, बाड़मेर ग्रामीण तीन राजस्व गांवों के बलदेव नगर, राजीव नगर, रामनगर, गंगाई नगर, विष्णु कॉलोनी, अरिहंत नगर, शरणार्थी बस्ती, दानजी की होदी, तिलक नगर, जाट कॉलोनी, शिव नगर, खेतेश्वर नगर, रामदेव नगर, रामदान नगर, रुप नगर, गायत्री कॉलोनी, श्रीयादे नगर, मेघवालों का टांका, प्रजापत कॉलोनी, शिवकर रोड सहित कई कॉलोनियां है।

भास्कर संवाददाता | बाड़मेर

नगर परिषद बाड़मेर की सीमा विस्तार से वंचित कॉलोनियों के लोगों की सालों से लगातार मांग के बावजूद भी दर्जनों कॉलोनियां नगर परिषद की सीमा में शामिल नहीं हो पाई। जबकि 2002 के बाद कई बार नगर परिषद की साधारण सभा की बैठक में सीमा विस्तार की मांग को लेकर प्रस्ताव पास हो चुके हैं। 2012 में विधायक मेवाराम जैन ने विधानसभा के आठवें सत्र में तारांकित प्रश्न संख्या 3743 कर चुके हैं। इसके जवाब में सरकार ने कहा था कि सीमा विस्तार का काम प्रक्रियाधीन है। जबकि 7 साल से सीमा विस्तार पर कोई काम नहीं हुआ, गत साल सीमा विस्तार का जो आदेश जारी हुआ था उसे भी निरस्त कर दिया। ऐसे में अब लोगों ने सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है। वंचित आबादी हक की लड़ाई के लिए 15 को बाड़मेर बंद का आह्वान किया है।

राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने 31 अगस्त 2018 को एक आदेश जारी कर 30 साल बाद शहर के आसपास आबाद कॉलोनियों को नगर परिषद में शामिल किया था। इनमें राजस्व गांव बाड़मेर आगौर, बाड़मेर मराग, गादान व बाड़मेर शहर का ग्राम भाग था। जबकि कुछ दिन पूर्व वर्तमान सरकार ने इस आदेश को निरस्त कर सालों बाद जगी हजारों लोगों की उम्मीद को तोड़ दिया। इसके बाद अब लोगों ने राजनैतिक कारणों से नगर परिषद में शामिल किए जाने से रोकने का आरोप लगाते हुए 15 जून को बाड़मेर बंद का आह्वान किया है।

कब-कब पास हुए प्रस्ताव

नगर परिषद ने वर्ष 2002, 2005, 2009, 2014, 2015, 2018 में सीमा विस्तार करने का प्रस्ताव पास किया था। बैठक में कई बार पार्षदों की ओर से सीमा विस्तार की मांग उठाई गई।

वंचित कॉलोनियों में विकास के नाम कुछ नहीं

सीमा विस्तार से वंचित कॉलोनियों में विकास के नाम कुछ नहीं है। सड़क, पानी, बिजली, नाली सहित मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। करोड़ों रुपए विकास शुल्क के नाम नगर परिषद को दिए है, लेकिन यहां आज दिन तक विकास नहीं हुआ। बारिश के दिनों में इन कॉलोनियों में हालात और बिगड़ जाते है। बरसाती पानी लोगों के घरों में घुस आता है। गंदे पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा नाली भी नहीं है, इससे घरों का गंदा पानी भी सड़कों पर पसरा रहता है। कई बार झगड़े हो चुके हैं। रोड लाइट, सड़क का अभाव है, इससे जगह-जगह बबूल की झाड़ियों से सड़कें अटी हुई है।

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