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नियम इतने सख्त कि नहीं बिक रहा माल, काश्तकार सस्ते में जिंस बेचने को मजबूर

सरकारी मानकों को पूरा ना कर पाने के कारण क्षेत्र के किसानों को अपनी जेबें कटानी पड़ रही है। सरकार द्वारा खोले गए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

नियम इतने सख्त कि नहीं बिक रहा माल, काश्तकार सस्ते में जिंस बेचने को मजबूर
सरकारी मानकों को पूरा ना कर पाने के कारण क्षेत्र के किसानों को अपनी जेबें कटानी पड़ रही है। सरकार द्वारा खोले गए समर्थन मूल्य पर खरीद केन्द्रों पर बीते 13 दिनों में महज 52 क्विंटल जिंस खरीदे गए है। इसी अवधि में मण्डी में 11 हजार क्विंटल से ज्यादा जिंसे व्यापारियों ने खरीदी। खरीद कमेटी की सख्ती के कारण किसानों की फसल खरीदी ही नहीं जा रही। मजबूरी में उन्हे अपनी फसले कम दामों में व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।

बस्सी कृषि उपज मण्डी में सरकार द्वारा 2 अप्रेल से खरीद केन्द्र चालू किया गया था। इस केन्द्र पर 90 दिनों तक सरसों, चना एवं गेहूं की खरीद होनी है। फसल की क्वालिटी चैक करने के लिए सरकार ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया। सरकार ने सरसों खरीद के लिए 6 तथा चना खरीद के लिए 7 मानक तय किए है। इन्ही मानकों के फेर में अन्नदाता की सारी फसलें खरीदने से इंकार किया जा रहा है। नतीजतन केन्द्र पर अब तक महज 52 क्विंटल सरसों ही खरीदी जा सकी है।

ये हैं खरीद के मानक

सरकार के तय मानकानुसार सरसों की फसल में विजातीय तत्व 2 प्रतिशत, अन्य खाद्यान्न 10 प्रतिशत, अविकसित दाने 4 प्रतिशत, क्षतिग्रस्त दाने 2 प्रतिशत, स्माल सीड्स 10 प्रतिशत तथा नमी आठ प्रतिशत तक स्वीकार्य है। इसी प्रकार चना खरीद में विजातीय तत्व एक प्रतिशत, अन्य खाद्यान्न व क्षतिग्रस्त दाने तीन-तीन प्रतिशत, टचड दाने चार प्रतिशत, अधपके दाने 6 प्रतिशत, अन्य किस्म का मिश्रण पांच प्रतिशत, घुने हुए दाने चार प्रतिशत तथा 14 प्रतिशत तक नमी स्वीकार्य है।

सरकारी खरीद केंद्रों का सच, जिम्मेदारों ने आंखे मूंदी

बस्सी. कृषि उपज मण्डी के बरामदे में ढेरियों के रूप में रखा जिंस।

बस्सी. समर्थन मूल्य केंद्र में पसरा सन्नाटा।

बाजार भाव से ज्यादा है समर्थन मूल्य

सरकार द्वारा बोनस सहित सरसों का समर्थन मूल्य चार हजार रुपए प्रति क्विंटल, चने का चार हजार 400 रुपए तथा गेहूं का समर्थन मूल्य 1735 रुपए प्रति क्विंटल तय किया। बाजार में इस समय सरसों 36 सौ रुपए, चना 37 सौ रुपए तथा गेहूं 1650 रुपए तक खरीदा जा रहा है।

ऑनलाइन करना होता है आवेदन

समर्थन केन्द्रों पर अपना माल बेचने के लिए किसान को ईमित्र केन्द्रों पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ किसान का भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, गिरदावरी एवं बैंक खाते की पासबुक भी लगानी होती है। आवेदन के बाद किसान के मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से सूचना भेज कर फसल बेचने का समय एवं दिन बताया जाता है।

एक फेरे पर 7 से 800 रुपए का खर्चा

किसान रायसिंह ने बताया कि गिरदावरी निकलवाकर आवेदन ऑनलाईन करवाने से लेकर मण्डी आने तक उनका करीब 800 रुपए का खर्चा हो गया। केन्द्र पर अभी केवल एक कार्मिक है। बिना दूसरे सदस्यों के वो फसल लेने से इंकार कर रहा है। करीब तीन घंटे से इंतजार कर रहे है, अभी तक कमेटी के दूसरे सदस्य नहीं आए। अगर इन लोगों ने माल नहीं खरीदा तो ये 800 रुपए का खर्चा सिर पर ही पड़ेगा। ऐसे मे यही किसी व्यापारी को माल बेच जाउंगा। आंधी से आए किसान रामफूल ने भी अपनी पीडा बताई कि वो करीब तीस क्विंटल माल साथ में लाए है, मगर केन्द्र वाले केवज 16 क्विंटल माल ही खरीदने के लिए कह रहे है।

केन्द्र पर खरीद का आंकड़ा

फसल केन्द्र पर खरीद मंडी में खरीद

सरसों 52 क्विंटल 2275 क्विंटल

चना 0 क्विंटल 532 क्विंटल

गेहूं 0 क्विंटल 8195 क्विंटल

कुल 52 क्विंटल 11002 क्विंटल

(2 अप्रैल से 15 अप्रैल तक)

मानक ही गलत

लोग अपनी फसल लेकर केन्द्र पर आ तो रहे है मगर सरकार द्वारा मानक ही ऐसे तय कर दिए गए है। इनके चलते हम चाह कर भी फसल ले ही नहीं पा रहे। ऐसे में किसानों को बैरंग लौटाना पड़ रहा है। शशिकान्त शर्मा, खरीद केन्द्र प्रभारी

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Web Title: नियम इतने सख्त कि नहीं बिक रहा माल, काश्तकार सस्ते में जिंस बेचने को मजबूर
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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