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बुरा न मानो होली है...

Bayana News - जगन्नाथ पहाड़िया के साथ उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। वे दो बार बयाना सीट से सांसद, वैर से विधायक, बिहार और...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 05:20 AM IST
बुरा न मानो होली है...
जगन्नाथ पहाड़िया के साथ उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। वे दो बार बयाना सीट से सांसद, वैर से विधायक, बिहार और हरियाणा के राज्यपाल, एआईसीसी के जनरल सेक्रेटी, केंद्र में डिप्टी मिनिस्टर और 1980 से 82 तक राजस्थान के सीएम रहे। किंतु जातिगत राजनीति, उम्र व परिवारवाद के कारण अब वे कांग्रेस कोर्डिनेशन कमेटी के मेंबर रह गए हैं।

जगन्नाथ पहाड़िया

जगन्नाथ पहाड़िया

गिर्राज प्रसाद तिवारी

गिर्राज प्रसाद तिवारी

ब्रजेंद्र सूपा

ब्रजेंद्र सूपा

ब्रज में होली के रंग...रसिया ढोल और छंद के संग

ब्रज में होली के रंग...रसिया ढोल और छंद के संग

जिनके साथ कॉर्डिनेशन नहीं, उन्हें कॉर्डिनेशन में लगाया

जगन्नाथ पहाड़िया के साथ उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। वे दो बार बयाना सीट से सांसद, वैर से विधायक, बिहार और हरियाणा के राज्यपाल, एआईसीसी के जनरल सेक्रेटी, केंद्र में डिप्टी मिनिस्टर और 1980 से 82 तक राजस्थान के सीएम रहे। किंतु जातिगत राजनीति, उम्र व परिवारवाद के कारण अब वे कांग्रेस कोर्डिनेशन कमेटी के मेंबर रह गए हैं।

अब समाज-संगठनों में बांट रहे हंसी-ठिठौली का प्रसाद

अब समाज-संगठनों में बांट रहे हंसी-ठिठौली का प्रसाद

विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष 97 वर्षीय गिर्राज प्रसाद तिवारी आज भी सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करते मिलेंगे, किंतु अब वे राजनीति में हाशिए पर चले गए। क्योंकि भरतपुर में जाति में भी उपजाति की राजनीति ने तिवारी जी की राजनीति से रंगहीन कर दिया। तिवारी जिला प्रमुख, बयाना और भरतपुर से विधायक रहे चुके हैं। 1985 में विधानसभा के अध्यक्ष रहे।

विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष 97 वर्षीय गिर्राज प्रसाद तिवारी आज भी सामाजिक कार्यक्रमों में शिरकत करते मिलेंगे, किंतु अब वे राजनीति में हाशिए पर चले गए। क्योंकि भरतपुर में जाति में भी उपजाति की राजनीति ने तिवारी जी की राजनीति से रंगहीन कर दिया। तिवारी जिला प्रमुख, बयाना और भरतपुर से विधायक रहे चुके हैं। 1985 में विधानसभा के अध्यक्ष रहे।

लालबत्ती का रंग ऐसा छूटा कि राजनीति बे-रंग हो गई

लालबत्ती का रंग ऐसा छूटा कि राजनीति बे-रंग हो गई

बयाना से 3 बार विधायक रहे ब्रजेंद्र सूपा को बयाना सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद घर बिठा दिया। यद्यपि उन्हें गुर्जर बहुल नगर विधानसभा सीट से भी कांग्रेस ने टिकट दिया, किंतु दूसरे इलाके में करामात नहीं दिखा सके। पार्टी की निष्ठा के कारण गहलाेत सरकार में पशुधन विकास बोर्ड को अध्यक्ष बना लालबत्ती भी मिल चुकी है।

श्याम रंग

श्याम रंग




रंग-बिरंगी करी श्याम नैं, ऐसौ करयौ कमाल।।


रंग-बिरंगी करी श्याम नैं, ऐसौ करयौ कमाल।।

बदल गए राजनीति के रंग, पकाैड़े तल रही पुरानी सरकार

स्वांग की परंपरा दो सदी पुरानी है। इसमें ब्रज और हरियाणा का पुट है। इसे समाज का आइना भी कहा जाता था। स्वांग के कई कलाकार थे, जिनमें किशन सिंह, छोटे, कंठा, नूरी, श्रवण आदि रियायत काल में काफी लोकप्रिय हुए। रियायत काल में किला स्थित महल खास और नेहरू पार्क के पास स्वांग का मंचन होता था, जिसमें महाराजा और मंत्रीमंडल शामिल होता था। जिसमें विसंगतियों को हास-परिहास के जरिए दिखाया जाता। इससे महाराजा को इशारा मिल जाता था और वे उसमें सुधार करवाते थे। मूसल सेना स्वांग का सबसे लोकप्रिय और प्राचीन खेल है। यह परंपरा अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही है।

सखियों की ठिठाेली

सखियों की ठिठाेली


भरि-भरि कै मारे पिचकारी, अंग-अंग रंग घोल।।


भरि-भरि कै मारे पिचकारी, अंग-अंग रंग घोल।।



भक्त प्रहलाद का गांव माने जाने वाले फालैन गांव में आज भी अग्नि परीक्षा होती है। यह सदियों पुरानी परंपरा है। भक्त प्रहलाद की परंपरा को जीवित करते हुए पंडा होली की धधकती आग से होकर गुजरता है। मेला पुरोहित पंडित भगवान सहाय ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के आधार पर फालैन को विष्णुभक्त प्रहलाद का गांव माना जाता है। ऐसी धारणा है कि प्रहलाद का गांव होने की वजह से ही फालैन के ब्राह्मण समाज का पण्डा उन्हीं के समान होलिका की अग्नि में से निकलने का चमत्कार कर पाता है और उसका बाल बांका भी नहीं होता।

सफाई पर कृपलानी की पिचकारी, मुख्यमंत्री वसुंधरा भी हंस पड़ीं

सफाई पर कृपलानी की पिचकारी, मुख्यमंत्री वसुंधरा भी हंस पड़ीं

मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने भरतपुर की सफाई व्यवस्था को लेकर व्यंग्य की ऐसी पिचकारी छोड़ी कि लोग अब तक याद कर हंसते हैं। अभी भरतपुर आईं सीएम भी सफाई के ही स्लोगन पर हंस पड़ीं।

मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने भरतपुर की सफाई व्यवस्था को लेकर व्यंग्य की ऐसी पिचकारी छोड़ी कि लोग अब तक याद कर हंसते हैं। अभी भरतपुर आईं सीएम भी सफाई के ही स्लोगन पर हंस पड़ीं।

कांग्रेस के रसिया अब घर में गा रहे फाल्गुन के गीत

कांग्रेस के रसिया अब घर में गा रहे फाल्गुन के गीत

पूर्व विदेश मंत्री नटवरसिंह नेहरू खानदान के खास लोगों में गिने जाते थे। उन्हें कांग्रेस सरकार में नीति निर्माता तक माना जाता था। उनकी गिनती कांग्रेस के टॉप थ्री नेताओं में होती थी, किंतु इराक से अनाज-तेल प्रकरण और माय इर्रेगुलर डायरी पुस्तक के बाद वे कांग्रेस में ही बेगाने हो गए। अब राजनीति से तौबा कर ली है। अधिकांश समय पठन-पाठन में बिता रहे हैं।

पूर्व विदेश मंत्री नटवरसिंह नेहरू खानदान के खास लोगों में गिने जाते थे। उन्हें कांग्रेस सरकार में नीति निर्माता तक माना जाता था। उनकी गिनती कांग्रेस के टॉप थ्री नेताओं में होती थी, किंतु इराक से अनाज-तेल प्रकरण और माय इर्रेगुलर डायरी पुस्तक के बाद वे कांग्रेस में ही बेगाने हो गए। अब राजनीति से तौबा कर ली है। अधिकांश समय पठन-पाठन में बिता रहे हैं।

रंगहीन समाज के फिर से रंगीन सपने देश रहे पंडितजी

पंडित रामकिशन की गिनती देश के प्रमुख सोशलिस्ट नेताओं में होती है, किंतु अब समाजवाद की राजनीतिक विचारधारा ही फेल हो गई है, किंतु पंडित ने साथ नहीं छोड़ा। अभी वे समाजवादी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष है। 92 वर्षीय पंडित दो बार वैर से विधायक ,दो बार भरतपुर से विधायक और वर्ष 1977 में सांसद रह चुके हैं।

मंत्री ने संत्री से जोड़ी बनाई तो बुरा मान गई होली

कामां के कद्दावर नेता मदनमोहन सिंघल भैरोंसिंह सरकार में मंत्री रहे, किंतु इसी दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात संतरी से उनकी निकटता ने ऐसा तूल पकड़ा कि उन्हें राजनीति नुकसान उठाना पड़ा। पिछले चुनाव में पार्टी ने उनके बेटे को लांच करने का आश्वासन दिया। हुआ कुछ नहीं। इसलिए पार्टी का लेकर आजकल फ्रस्टेशन के शिकार हैं।

कुं. नटवर सिंह

कुं. नटवर सिंह

पंडित रामकिशन

मदनमोहन सिंघल

मित्र मंडली तरुण समाज समिति द्वारा 49 साल से होली से एक दिन पहले महामूर्खाधिराज की शोभायात्रा निकाली जाती है। इस में ब्रज संस्कृति को बढ़ावा देने वाले को चुना जाता है। एक ही परिवार के दो सदस्यों को महामूर्खाधिराज बनने का मौका मिला है। इनमें पूर्व मंत्री नत्थीसिंह एवं उनके पुत्र अमरसिंह है।

सम्मान की बात

मूर्खाधिराज बनने को सम्मान की बात माना जाता है। इस बार राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके डॉ. सुभाष गर्ग को मूर्खाधिराज की उपाधि मिली। उन्हें बच्चों की तरह बोतल से दूध पिलाया गया।

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