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उप चुनाव को लेकर फिर गरमाई नपा की सियासत, बाड़ेबंदी का दौर शुरु

Bayana News - नगरपालिका के चेयरमैन पद के लिए आगामी २० अप्रैल को होने जा रहे उपचुनाव को लेकर पालिका की सियासत फिर से गर्माने लगी...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 04:25 AM IST
उप चुनाव को लेकर फिर गरमाई नपा की सियासत, बाड़ेबंदी का दौर शुरु
नगरपालिका के चेयरमैन पद के लिए आगामी २० अप्रैल को होने जा रहे उपचुनाव को लेकर पालिका की सियासत फिर से गर्माने लगी है। पूर्व पालिकाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षदों के असंतुष्ट खेमे का पलड़ा भारी है। बयाना नगरपालिका का अध्यक्ष पद एससी सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। वहीं उपचुनाव को लेकर अब नगरपालिका की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाने वाले पूर्व पालिकाध्यक्ष विनोद कुमार बट्टा भी तस्वीर में सामने आने लगे हैं। उपचुनाव के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी भी शुरु हो गई है। करीब नौ पार्षदों को बाड़ेबंदी कर प्रदेश की राजधानी जयपुर ले जाया गया है। मंगलवार तक कुछ और पार्षदों के जयपुर पहुंचने की संभावना है। इसके बाद इन सभी को अज्ञात स्थान पर ले जाएगा तथा चुनाव की तिथि २० अप्रैल को ही वापस लाया जाएगा। गौरतलब है कि गत दो फरवरी को बजट बैठक के बहिष्कार के बाद शुरु हुई सियासत तेज हो गई थी तथा असंतुष्ट खेमे के 21 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर गत 14 मार्च को पालिकाध्यक्ष मीना जाटव को पद से हटवा दिया था। इसके बाद से ही उपचुनाव की कवायद शुरु हो गई। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद असंतुष्ट खेमे के पार्षदों में मतभेद पनप गया और असंतुष्ट खेमे के पार्षद गुटों में बंटे नजर आने लगे थे। सूत्रों के अनुसार गत दिनों उपचुनाव के मसले को लेकर पालिका उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी, पूर्व पालिकाध्यक्ष विनोद बट्टा, भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष व पार्षद मुरारीलाल बारैठा, पार्षद गौरव शर्मा, सुंदर अग्रवाल, मणि अग्रवाल आदि के बीच बैठक हुई तथा उसमें मतभेदों को दूर करते हुए सहमति बनाई गई। इसके बाद से पार्षदों को बाड़ेबंदी के लिए भेजना शुरु कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार चेयरमैन पद के लिए वार्ड चार के पार्षद ओमप्रकाश कोली की दावेदारी मजबूती से उभर रही है और कोली के नाम पर सहमति भी बन चुकी है लेकिन उसका अभी खुलासा नहीं किया जा रहा है।

नगरपालिका की राजनीति में पिस रही आम जनता

नगरपालिका में पिछले काफी समय से चेयरमैन पद को लेकर जारी उठापटक का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। लोगों में चर्चा है कि अधिकतर पार्षदों की रुचि अपने वार्डों में व्याप्त जनसमस्याओं को दूर कराने व शहर के विकास को लेकर योजनाएं तैयार करने के बजाय अपना स्वयं का वजूद बनाने के लिए राजनीति की रस्साकशी में अधिक रहती है। पहले भी अविश्वास के दौरान करीब एक माह तक पार्षद बाड़ेबंदी में रहे थे। अब फिर से एक सप्ताह के लिए पार्षद बाड़ेबंदी में चले गए हैं। जब भी मौका मिलता है अधिकतर पार्षद बाड़ेबंदी का हिस्सा बनने से नहीं चूकते। सूत्रों की मानें तो बाड़ेबंदी के दौरान मिलने वाली ऐशोआराम की सुविधाएं इसके पीछे कारण है। अब ऐसे में सवाल ये है कि पार्षद तो बाड़ेबंदी में रहकर अपने स्वार्थ की पूर्ति में लिप्त हो जाते हैं पीछे से जनता को रामभरोसे छोड़ दिया जाता है। कई लोगों ने बातचीत में बताया कि उन्होंने पार्षदों को शहर के विकास के लिए चुना था लेकिन लगता वे अपने विकास में अधिक व्यस्त हो गए हैं। समस्याओं की बात की जाए तो शहर में सफाई, रोशनी के हालात खराब चल रहे हैं। कस्बे में हाईमास्ट लाइटें पिछले काफी समय से खराब पड़ी है। दमकल गाड़ी भी डेढ़ साल से खराब पड़ी है। लेकिन इस सबसे दूर अधिकतर पार्षद अपने स्वार्थों में व्यस्त चल रहे हैं। जबकि ढाई साल पूर्व हुए नपा चुनावों में शहर की जनता ने शहर के विकास की उम्मीद में अधिकतर नए चेहरों को मौका देखकर पार्षद चुना था। पर वोट देने वाले आपने आप को ठगा हुअा महसूस कर रहे हैं।

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