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13 किलाे का ट्यूमर निकालकर बचाई बालिका की जान

शरीर में ब्लड की मात्रा काफी कम हो जाने के कारण जिस बालिका का प्रदेश व गुजरात के के कई डॉक्टरों ने आॅपरेशन से इनकार...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:37 AM IST
शरीर में ब्लड की मात्रा काफी कम हो जाने के कारण जिस बालिका का प्रदेश व गुजरात के के कई डॉक्टरों ने आॅपरेशन से इनकार कर दिया उसका पार्श्वनाथ चिकित्सालय एवं शोध संस्थान ने ऑपरेशन कर13 किलों का ट्यूमर निकाल दिया। हालांकि बालिका की जान बचाने के लिए उसका पैर काटना पड़ा। जानकारी के अनुसार समीपवर्ती ग्राम जवाजा के कुशालपुरा, बलाडी निवासी 15 वर्षीय किशोरी सुमन के सीधे पैर के घुटने में करीब 4 से 5 साल पहले एक मामूली गांठ हुई। गांठ में दर्द के कारण सुमन को तकलीफ होने लगी। देखते ही देखते गांठ का वजन बढ़ने लगा और एक साल पूर्व सुमन के पैर की गांठ बढ़ते बढ़ते 3 किलो तक हो गई। कुछ ही दिनों में सुमन के पैर की गांठ बढ कर 10 किलो से ज्यादा की हो गई। सुमन का बिस्तर से उठ पाना भी बंद हो गया।बीमारी से जूझ रही बालिका का खून इस गांठ की वजह से काफी कम हो गया था।

महज 3 ग्राम एचबी होने के कारण प्रदेश के नामी अस्पतालों के साथ ही गुजरात के डॉक्टरों ने भी आॅपरेशन से इनकार कर दिया। एेसे में पार्श्वनाथ अस्पताल के डॉ. डीआर चौधरी ने मंगलवार को ब्यावर में ही किशोरी का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसकी जान बचा ली। हालांकि इससे पूर्व किशोरी को 3 यूनिट ब्लड़ चढ़ाया गया। ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट डॉ. डीआर चौधरी अौर एनेस्थिसिया स्पेशलिस्ट डॉ. राजेश गौर की निर्देशन मे ऑपरेशन करने वाली टीम में ओटी के संदीप चौहान, नरेंद्र सिंह, डूंगर सिंह, राजकुमारी, कृष्ण कुमार और संध्या सांगेला शामिल थे।

दो घंटे चला ऑपरेशन, उपचार में देरी के कारण जीवन बचाने के लिए काटना पड़ा पैर

निशुल्क हुआ ऑपरेशन

मंगलवार को ऑपरेशन के बाद सुमन को होश आ गया और वह पहले से ज्यादा स्वस्थ्य लग रही थी। बुधवार को सुमन के पिता गोकुल सिंह ने बताया कि वह तो हर उम्मीद छोड़ चुके थे। एक रिश्तेदार ने उन्हें डॉ. चौधरी को चैक करवाने की सलाह दी। जिस पर उन्हें चैक करवाया गया। उन्होंने बताया कि निजी अस्पताल में उन्हें उपचार के लिए 75 हजार से डेढ़ लाख तक का खर्च बता रहे थे। लेकिन यहां डॉ. डीआर चौधरी ने भामाशाह कार्ड होने के कारण सुमन का ऑपरेशन बिल्कुल निशुल्क किया।