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चार माह में मिनी ट्रेन का इंजन हाे गया फेल

सुभाष उद्यान में पिछले चार साल से कभी सर्पीले मोड़ तो कभी लोकार्पण से पहले ही इंजन के हांफने से ट्रेक पर ही खड़ी...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 02:15 AM IST
सुभाष उद्यान में पिछले चार साल से कभी सर्पीले मोड़ तो कभी लोकार्पण से पहले ही इंजन के हांफने से ट्रेक पर ही खड़ी ट्रेन हरी झंडी दिखाने के महज चार महीने बाद ही एक बार फिर ट्रेन पसर गई। ऐसे में ठेकेदार को नकारा इंजन को बदलना पड़ा। जिस इंजन को परिषद के तकनीकी अधिकारियों ने ओके बताया था वह दरअसल बरसों पुराने मॉडल का 5 एचपी का तीन सिलेंडर वाला इंजन है जो छोटी नाव या कश्ती में लगता है। दो दिन से ट्रेक पर ही पसरी ट्रेन को चलाने के लिए ठेकेदार को अब 4 सिलेंडर वाला डीआई इंजन लगाना पड़ा है।

चार साल पहले भी लोकार्पण कार्यक्रम इसलिए धरा रह गया क्योंकि ट्रेन के हांफने के बाद तकनीकी अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में इंजन के पुराना होने की आशंका जताते हुए सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। आखिरकार सभापति बबीता चौहान ने इसे चलाने के लिए परिषद कोष से खर्च करने की बजाय ठेकेदार की जेब से खर्च कराकर बीओटी की तर्ज पर लागत वसूलने का निर्णय लिया। इसी तर्ज पर परिषद प्रशासन ने प्रकाश रिणवा को वर्क ऑर्डर जारी किया। जिन्होंने अब तक ट्रेक की मरम्मत, प्लेटफार्म का निर्माण आदि के लिए 2 लाख रुपए खर्च करने के बाद 11 अक्टूबर 2017 से इस ट्रेन को संचालित किया। तब से अब तक ठेकेदार अपने स्तर पर इस ट्रेन को संचालित करते आ रहे हैं।

चलते हुए अचानक बंद हुआ इंजन

ठेकेदार प्रकश रिणवा ने बताया कि दो दिन पहले ट्रेक पर शहरवासियों को लेकर दौड़ रही ट्रेन का इंजन अचानक तेज आवाज के साथ बंद हो गया। ऐसे में बीच रास्ते में ही सवारियों को उतारने के बाद जैसे-तैसे ठेकेदार इंजन को प्लेटफार्म तक लाए और उसकी जांच कराई। जिसमें पता चला कि इंजन की क्रेंक टूट जाने की वजह से फिलहाल इसे चालू नहीं किया जा सकता।

5 एचपी का है पुराना इंजन : जब मैकेनिक ने इंजन को उतारा तो पता चला कि जिसे 12 एचपी क्षमता का इंजन बताया जा रहा है वह तो दरअसल तीन सिलेंडर वाला महज 5 एचपी का इंजन है। जो ऐसी किसी ट्रेन को खींचने के बजाय छोटी नाव में लगाया जाता है। ठेकेदार को ऐसे में मजबूरी के चलते वैकल्पिक व्यवस्था के तौर अपनी महेंद्रा कंपनी का 4 सिलेंडर वाला 8 एचपी का डीआई इंजन लगवाना पड़ा। इस काम के लिए उसे करीब 70 हजार रुपए का खर्च वहन करना पड़ा। जबकि पुराने इंजन को उसने ठीक कराने के बाद विकल्प के तौर पर रखने का निर्णय लिया है। जिससे ऐसी किसी भी तकनीकी खामी के समय ट्रेन नहीं रूके।

नागपुर की कंपनी ने लगाया था इंजन...

5 साल पहले नागपुर की रोहित इंडस्ट्रीज ने 25 लाख 92 हजार 500 रुपए में ट्रेन और ट्रेक बिछाने के लिए वर्क ऑडर्र मिलने के बाद तय शर्तों के मुताबिक उद्यान में ट्रेन उपलब्ध करवा दी थी। मगर चार साल तक परिषद प्रशासन ट्रेन को हरी झंडी नहीं मिल सकी थी। ट्रेक पर दौड़ने से पहले ही इंजन के कुछ पाटर््स में खराबी आ गई थी।

90 मॉडल का इंजन...

ठेकेदार प्रकाश रिणवा के मुताबिक मैकेनिक ने जब जांच की तो पता चला कि ट्रेन में किर्लोस्कर कंपनी का 3 सिलेंडर वाला 5 एचपी का करीब 1990 मॉडल का इंजन लगा था। इसके लिए उन्होंने जब कंपनी में बात की तो प्रतिनिधि का जवाब था कि उन्हें तो 3 साल पहले ही एनओसी मिल गई।

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