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31 मार्च तक बिना टीपी के हो सकेगा खनिज पाउडर का निर्गमन

सरकार की ओर से खनिज पिसाई उद्योंगो को जो पाउडर टीपी से भेजने से छूट 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। फेडरेशन...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:30 AM IST
सरकार की ओर से खनिज पिसाई उद्योंगो को जो पाउडर टीपी से भेजने से छूट 28 फरवरी से बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। फेडरेशन ऑफ माइनिंग एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के मानद महासचिव अक्षयदीप माथुर व उपाध्यक्ष राधावल्लभ माहेश्वरी ने अर्पणा अरोड़ा शासन सचिव खान व ललित कुमार सयुंक्त सचिव खान से मुलाकात की। इसमें सचिवालय स्तर के लंबित मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। जिसमें मुख्यत अजमेर जिले में अतिरिक्त रॉयल्टी संग्रहण ठेकेदार द्वारा वसूले जा रहे जीएसटी को बंद करने, भारत सरकार के वन व पर्यावरण मंत्रालय के नोटिफिकेशन के मुताबिक पुराने मंशा पत्रों की कमियों की पूर्ति के लिये दिये गये 2 वर्ष की समय सीमा को राजस्थान अप्रधान खनिज नियम 2017 में दिये गए एक वर्ष की समय सीमा बढ़ाने के बारे में आग्रह किया।

ई-रवन्ना के लागू करने के पहले अग्रिम रॉयल्टी जमा करके जो रवन्ने दिए गए तथा बिना उपयोग के वापस जमा करा दिए थे। उनकी राशि पट्टाधारी के खाते जमा समायोजित करने के आदेश खनि अभियंताओं को, अजमेर जिले में अवैध खनन कार्य भारी पैमाने पर शुरू गया है क्योंकि ईआरसीसी ठेकेदार इस अवैध खनिज की रॉयल्टी वसूल नहीं कर सकता है और विभाग के पास न संसाधन हैं, न ही स्टाफ है और न ही दृढ़ इच्छाशक्ति है जिससे इस अवैध खनन कार्य पर अंकुश लग सके। मसूदा तहसील के कानाखेड़ा क्षेत्र में जो नीलामी के लिए प्लॉट बनाए गए उनकी नीलामी शीघ्र कराए जाने के बारे में भी आग्रह उपरोक्त मुद्दे में जीएसटी की वसूली बंद करने के बारे में वित्त विभाग को पत्र भेज दिया गया। पुराने मंशा पत्रों की कमी पूर्ति के लिए दिए गए 1 वर्ष की अवधि को 13 माह करने का नोटिफिकेशन कर दिया गया। हालांकि इस 13 माह की अवधि से आवेदकों को कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि राज्य स्तरीय पर्यावरणीय स्वीकृति समिति 31 मार्च तक कोई नया आवेदन नहीं लेगी और इस समिति का नया नोटिफिकेशन किया जाना है। इन मंशा पत्रों की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए ईएमपी के नक्शे शीघ्र खनि अभियंताओं को शीघ्र बनवाकर उनको स्वीकृत कराने के बारे में कहा गया जिन खनन पट्टाधारियों ने अपने बिना उपयोग में लिए गए रवन्ने विभाग में जमा करा दिए है और जिन्हें उन रवन्नाओं की राशि का समायोजन नहीं मिला है। खान विभाग के पास जो सीमित साधन है उनको देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि खान विभाग बिना टीपी के खनिज पाउडर के निर्गमन को रोक पाएगा। वास्तविकता यह है कि वर्तमान में तो बिना बिल व बिना टीपी के खनिज पाउडर का निर्गमन किया जा रहा है।

विभाग के पास न संसाधन हैं, न ही स्टाफ है और न ही दृढ़ इच्छाशक्ति है