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शहर का विस्तार हुआ मगर विकास का इंतजार

ब्यावर शहर को बसे 183 साल हो चुके हैं। एक फरवरी, 1836 को 1955 परिवार से आबाद हुए शहर की आबादी 4 लाख के आंकड़े तक पहुंच चुकी है।...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:40 AM IST
शहर का विस्तार हुआ मगर विकास का इंतजार
ब्यावर शहर को बसे 183 साल हो चुके हैं। एक फरवरी, 1836 को 1955 परिवार से आबाद हुए शहर की आबादी 4 लाख के आंकड़े तक पहुंच चुकी है। राजस्थान के मैनचेस्टर कहलाने वाले ब्यावर काे प्रदेश में एक साथ तीन कपड़ा मिल होने का गौरव प्राप्त रहा है। कपड़ा मिलों ने ब्यावर की पहचान काे देश के कोने कोने तक पहुंचाया तो सबसे बड़ी ऊन मंडी होने का गौरव भी ब्यावर को ही मिला। ब्यावर में यूटीआई, विधि महाविद्यालय और सीएमएचओ कार्यालय रहा।

शहर का दुर्भाग्य रहा कि विकास के नए सोपान मिलने के स्थान पर ब्यावर से एक के बाद एक सौगातें छिनती गईं। साढ़े तीन दशक से ब्यावर को जिला बनाने की मांग चल रही है। सियासत के गलियारे में ब्यावर की ये हक की आवाज भी कहीं गुम हो गई। सरकार द्वारा टॉड़गढ रावली अभ्यारण्य के विकास को लेकर कई घोषणाएं की गई। पांच करोड़ का प्रस्ताव की योजना भी तैयार की गई। रिसर्जेंट राजस्थान के तहत टॉडगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने की कवायद भी शुरू की गई। लेकिन सालों से टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य के विकास के प्रस्ताव कागजों की शोभा बढ़ा रहे है।

मजार की भी नहीं हुई सफाई

स्थापना की पूर्व संध्या पर कर्नल डिक्सन की मजार पर सफाई तक नहीं हो सकी। स्थानीय प्रशासन द्वारा शहर के स्थापना दिवस को लेकर कोई विशेष कार्यक्रम भी आयोजित नहीं करवाया गया है।

अतिक्रमण का शिकार संस्थापक का प्यार

ब्यावर के संस्थापक कर्नल डिक्सन ने चांद बीबी से शादी की। चांद बीबी के निधन के बाद उनके शव को वर्तमान तहसील भवन के समीप ही दफनाया गया। जो स्थान चांद बीबी के मकबरे के नाम से शहर में प्रसिद्ध है। लेकिन पिछले लंबे अर्से से ये मकबरा अतिक्रमण का शिकार है। ट्रांसपोर्टर द्वारा उक्त मकबरे को गोदाम के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।

ब्यावर. मकबरा परिसर में रखा ट्रांसपोर्टर का सामान।

फैक्ट फाइल








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