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नौ माह में 10 प्रतिशत स्कूलों ने ही किया ‘क्लिक’

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 03:00 AM IST

शिक्षा विभाग की सेकंडरी व सीनियर सेकंडरी विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देकर डिजिटल युग की मांग के अनुरूप कौशल...
शिक्षा विभाग की सेकंडरी व सीनियर सेकंडरी विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा देकर डिजिटल युग की मांग के अनुरूप कौशल व व्यवसाय की तकनीकी चुनौतियां से निपटने में सक्षम बनाने की योजना क्लिक नौ माह बाद भी गति नहीं पकड़ पाई। अजमेर जिले में योजना के पात्र 303 स्कूलों में से सिर्फ 30 स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू हो पाई। इन स्कूलों में भी विद्यार्थियों का रुचि कम होने के कारण इन स्कूलों में भी योजना बंद होने के कगार पर है।

मॉनिटरिंग की खुली पोल : अजमेर जिले में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 479 है। यह योजना दो सौ से अधिक नामांकन वाले स्कूलों में शुरू होनी थी। जिले में 200 से अधिक नामांकन वाले 303 सरकारी स्कूल हैं। संबंधित विद्यालयों काे राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड(आरकेसीएल) के अधिकृत कम्प्यूटर ज्ञान केन्द्रों से एमओयू कर एक अप्रैल से शिक्षण शुरू करना था। अब तक 30 स्कूल में कम्प्यूटर शिक्षण शुरू हो सका है। इससे स्कूलों के साथ ही माध्यमिक शिक्षा महकमे की मॉनिटरिंग की भी पोल खुलकर सामने आ गई है।

इसलिए नहीं ले रहे रुचि

1. सरकारी स्कूलों में शिक्षा लगभग निशुल्क दी जा रही है और कंप्यूटर शिक्षा का शुल्क लिया जा रहा है, यह अभिभावकों को पसंद नहीं आया।

2. इन कक्षाओं का संचालन स्कूल समय में ही किया जा रहा है इससे विद्यार्थियों की अन्य कक्षाएं प्रभावित हो रही है।

3. कई स्कूलां में शिक्षण से असंतुष्ट होकर विद्यार्थियों ने कक्षा में आना बंद कर दिया।

रुझान की रही कमी

जिले में 273 स्कूल अब भी ऐसे हैं जिनमें यह योजना शुरू नहीं हो सकी है। योजना को शुरू करने के लिए जिले के 50 स्कूलों ने ही एसडीएमसी बैठक आयोजित की। जिनमें 32 स्कूलों ने बैठक में योजना को शुरू करने की सहमति दी। वहीं 18 स्कूलों ने योजना को शुरू करने के लिए मना कर दिया। जवाजा ब्लॉक में संचालित कुल 60 विद्यालयों में से 24 स्कूल 200 से अधिक नामांकन वाले हैं। इनमें से मात्र 6 स्कूलों में ही बैठक आयोजित हुई। जिनमें से 3 स्कूलों के एसडीएमसी सदस्यों ने योजना को शुरू करने की सहमति प्रदान की है। एक जुलाई से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय देवाता में ही कक्षाएं शुरू हो सकीं। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि विद्यार्थियों से फीस लेने के बाद भी फैकल्टी की ओर से कम्प्यूटर शिक्षा सही नहीं देने के कारण महज दो माह में कक्षाएं बंद हो गई। सरकार विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ कम्प्यूटर सिखाने के लिए फीस वसूल कर रही है। ऐसे में अभिभावक फीस चुकाने के लिए सहमत नहीं है।

योजना पर एक नजर : शिक्षा विभाग की ओर राजकीय उच्च माध्यमिक, माध्यमिक व स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों को कम्प्यूटर प्रशिक्षण प्रदान कर उनमें तकनीकी कौशल विकसित करने के लिए राजस्थान नाॅलेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आर.के.सी.एल) के अधिकृत सूचना प्रौद्योगिकी ज्ञान केन्द्रों के सहयोग से स्वैच्छिक व स्ववित्त पोषण आधारित कम्प्यूटर कौशल प्रशिक्षण के लिए क्लिक योजना शुरू की थी।

यह जानना भी आवश्यक

विद्यार्थी की सालाना फीस 960 रुपए

स्कूल में पाठ के साथ कम्प्यूटर शिक्षण।

आरकेसीएल से मिलेगा प्रमाण पत्र।

बाजार के मुकाबले आधी से कम दर पर कोर्स।

स्कूलों व आईटी में एमओयू का प्रावधान।

कम्प्यूटर कोर्स का शुल्क छात्राओं को ही देना है।

क्लिक योजना के तहत जिले के 30 स्कूलों का एमओयू होकर कक्षाएं संचालित हुई है। कई स्कूलों में कम्प्यूटर सिखाने के लिए विद्यार्थियों से फीस को लेकर समस्या अ रही है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है कि सभी स्कूलों में क्लिक योजना के तहत विद्यार्थियों को कम्प्यूटर शिक्षण दिया जा सके। रामनिवास गालव, अतिरिक्त जिला परियोजना अधिकारी रमसा, अजमेर

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Web Title: नौ माह में 10 प्रतिशत स्कूलों ने ही किया ‘क्लिक’
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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