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साल का लक्ष्य 74, नसबंदी हुई 3 पुरुषों की, अंतरा से भी दूरी

ब्यावर| परिवार नियोजन कार्यक्रम में ब्यावर उपखंड काफी पिछड़ता दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 17-18 समाप्त होने को अब महज दो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:25 AM IST

ब्यावर| परिवार नियोजन कार्यक्रम में ब्यावर उपखंड काफी पिछड़ता दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 17-18 समाप्त होने को अब महज दो माह बचे हैं लेकिन महिला नसबंदी में अभी भी अाधा लक्ष्य ही हासिल हो सका है। महिला नसबंदी की स्थिति उपखंड में फिर भी अच्छी रही है। लेकिन इसमें पुरुष की भागीदारी नहीं के बराबर रही है। चिकित्सा विभाग का इस वित्तीय वर्ष में 31 मार्च से पहले 74 पुरूषों की नसबंदी करने का लक्ष्य दिया गया। लेकिन इसके विपरीत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा पूरे साल में महज 3 पुरूषों की ही नसबंदी कर पाया है। ऐसा नहीं है कि महिला नसबंदी में भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बेहद अच्छी हो। महिला नसबंदी में भी चिकित्सा महकमा अभी तक आधा लक्ष्य ही हासिल कर पाया है। चिकित्सा विभाग द्वारा महिला नसबंदी के लिए 669 केस का लक्ष्य दिया गया। लेकिन अभी तक उपखंड में महज 354 महिलाओं की ही नसबंदी करवाई जा सकी है।

अंतरा इंजेक्शन का भी उपयोग नहीं : परिवार नियोजन को लेकर आए दिन आने वाले परेशानी और टेबलेट से छुटकारा दिलवाने के मकसद से सरकार द्वारा अंतरा इंजेक्शन भी लॉन्च किया गया। एकेएच के परिवार नियोजन विंग को 270 इंजेक्शन दिए गए। एक इंजेक्शन लगाने के बाद तीन माह तक कोई अन्य गर्भनिरोधक लेने की आवश्यकता नहीं रहती। शुरूआती दिनों में 12 इंजेक्शन बांटे भी गए। लेकिन इसके साइड इफैक्ट की शिकायतों के कारण महिलाओं ने अंतरा से भी दूरी बना ली है।

नहीं है रुझान

चिकित्सा विभाग के सूत्रों की माने तो पुरूष नसबंदी को लेकर ना तो लोगों में रुझान है और ना ही फील्ड कार्यकर्ता पुरूषों को प्रेरित कर पा रहे हैं। ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र अधिकांश पुरूष नसबंदी के लिए महिलाओं को आगे करते हैं। ऐसे में परेशानी होती है और लक्ष्य भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

काउंसलिंग का अभाव...

अगर पुरूषों की समय पर अौर प्रॉपर काउंसलिंग की जाए तो लक्ष्य पाने में थोड़ी मदद मिलेगी। फील्ड कार्यकर्ताओं की भी समस्या है कि अधिकतर कार्यकर्ता महिलाएं हैं ऐसे में उन्हें पुरूषों की काउंसलिंग में परेशानी आती है। इतना ही नहीं चिकित्सा विभाग द्वारा लंबे अर्से से पुरूषों की काउंसलिंग के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया है। ऐसे में पुरूष नसबंदी में विभाग काफी पिछड़ रहा है।

भ्रांतियांं बनी परेशानी

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग खुद मानता है कि पुरूष नसबंदी को लेकर पुरूषों में कई प्रकार की भ्रांतिया बनी हुई है। पुरूषों में भ्रांति है कि नसबंदी के बाद कमजोरी अा जाती है और शारीरिक रूप से भी पुरूष कमजोर हो जाता है। ऐसे में लक्ष्य को लेकर परेशानी सामने आ रही है।

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