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लिफ्ट के लिए थ्री फेस की जरूरत, आए दिन फेस रिवर्ट होने से लिफ्ट खराब, अब डोर सेंसर हैंग से बंद

जनाना अस्पताल के बाद जिले में सबसे अधिक प्रसव करवाने वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल की गायनिक विंग की लिफ्ट पिछले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:25 AM IST

जनाना अस्पताल के बाद जिले में सबसे अधिक प्रसव करवाने वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल की गायनिक विंग की लिफ्ट पिछले लंबे समय से खराब पड़ी है। जिस कारण यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लिफ्ट को स्थापित करने वाली कंपनी ओटिस के टेक्नीशियन अरुण सोलंकी की माने तो लिफ्ट को थ्री फेस की जरूरत है और आए दिन फेस के रिवर्ट होने के कारण लिफ्ट खराब हो जाती है। सोलंकी ने बताया कि इलेक्ट्रिशियन की गलती से बार बार फेस रिवर्ट होता है। वहीं इस बार लिफ्ट का डोर सेंसर हैंग हो गया है। जिस कारण लिफ्ट बंद हो गई है। सोलंकी ने बताया कि जब लिफ्ट खराब होने की सूचना अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें समय पर नहीं दी जाती है। जिस कारण लिफ्ट को समय पर ठीक नहीं किया जा सकता है।

गर्भवती और प्रसूताओं के लिए लगी लिफ्ट: एकेएच की मदर चाइल्ड विंग में ग्राउंड फ्लोर पर लेेबर रूम है जहां नॉर्मल प्रसव होते हैं। वहीं प्रथम तल पर गायनिक ओटी के साथ ही गायनिक, पोस्ट गायनिक वार्ड बने है। नॉर्मल प्रसव के बाद प्रसूता को वार्ड में ले जाने के लिए लिफ्ट जरूरी है। वहीं सिजेरियन के लिए भी गर्भवती को ओटी में ले जाने के लिए लिफ्ट लगाई गई। लेकिन लिफ्ट खराब होने के कारण गर्भवती महिलाओं को सीढियों या रैंप से ले जाना पड़ रहा है।

ब्यावर. मदर चाइल्ड विंग में खराब पड़ी लिफ्ट।

मिस यूज से सेंसर खराब : मदर चाइल्ड विंग में मरीजों की सुविधा के लिए लिफ्ट लगाई गई है। टेक्नीशियन अरुण सोलंकी ने बताया कि मदर चाइल्ड विंग में स्थापित लिफ्ट में डोर सेंसर लगे हैं। ताकि इसमें मरीज या परिजन के शरीर का कोई भी अंग गेट में ना फंसे। सुरक्षा की दृष्टि से लिफ्ट में एक सुरक्षा गार्ड भी तैनात होना चाहिए। लेकिन पूरी विंग में एक ही गार्ड तैनात है जो नीचे आउटडोर में और वार्ड में ध्यान रखता है। ऐसे में लिफ्ट का मिस यूज होता है। बार बार लिफ्ट के डोर को खोलने और बंद करने से उसका सैंसर खराब हो गया।

दो दिन में ठीक हो जाएगी लिफ्ट

ओटिस कंपनी के अरुण सोलंकी के अनुसार कुछ दिन पूर्व 6 जनवरी को भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद उन्हें इस संबंध में शिकायत मिली। जिस पर आकर उन्होंने लिफ्ट की जांच की। उन्होंने बताया उस समय फेस रिवर्ट की प्रोब्लम काे ठीक कर दिया गया। लेकिन अब सेंसर की परेशानी होने के कारण नया सेंसर लाकर लगाया जाना है। सेंसर लाकर लगाने में दो से तीन दिन और लग सकते हैं।

60 हजार का खर्चा : टेक्नीशियन ने बताया कि एकेएच के मदर चाइल्ड विंग में लगी लिफ्ट अभी वारंटी पीरियड में है। इस कारण फिलहाल लिफ्ट की निशुल्क मरम्मत की जाएगी। लेकिन अगर वारंटी पीरियड समाप्त हो जाता है तो इस सेंसर को बदलने में करीब 60 हजार का खर्चा आ सकता है।

कागजों में काम कर रहे सुरक्षा गार्ड

एमआरएस मीटिंग में मदर चाइल्ड विंग की सुरक्षा के लिए 5 सुरक्षा गार्ड को लगाने का प्रस्ताव पास किया गया। प्रस्ताव के अनुसार सुरक्षा गार्ड की भर्ती भी की गई। लेकिन वेतन नियमानुसार नहीं मिलने और पुराने सुरक्षा गार्ड का वेतन समय पर नहीं बढ़ाने के कारण अधिकतर गार्ड ने यहां ज्वाइन ही नहीं किया। लेकिन कागजों में मदर चाइल्ड विंग की सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात है। जबकि हकीकत में पूरी बिल्डिंग की सुरक्षा के लिए हर समय महज 1 सुरक्षा गार्ड ही तैनात है।

फेस रिवर्ट होने की समस्या है। हाल ही में 6 जनवरी काे भास्कर में खबर प्रकाशित होने के बाद लिफ्ट की मरम्मत की गई थी। लेकिन फिर से डोर सेंसर खराब हो गया। इसे ठीक करने में 2-3 दिन लग सकते हैं। लिफ्ट में एनी टाइम एक सुरक्षा गार्ड रहना चाहिए। अरुण सोलंकी, टेक्निकल इंजीनियर, ओटिस

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