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विभागों में तालमेल का अभाव, दे रहा सिलिकोसिस का घाव

खेती लायक भूमि के अभाव में पत्थर तोड़ने, खोदने और पत्थर पीसने के काम मिनरल फैक्ट्रियों में मजदूरी करने वाले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:50 AM IST

विभागों में तालमेल का अभाव, दे रहा सिलिकोसिस का घाव
खेती लायक भूमि के अभाव में पत्थर तोड़ने, खोदने और पत्थर पीसने के काम मिनरल फैक्ट्रियों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को सिलिकोसिस बीमारी की समय पर जांच करने के लिए मानवधिकार आयोग के निर्देश शुरू की गई मोबाइल मेडिकल यूनिट विभागों के आपसी तालमेल के अभाव में महज खानापूर्ति साबित हो रही है।

पिछले करीब दो साल में इस वैन से महज 56 एक्सरे ही हो सके हैं ताे वहीं ये वैन सिर्फ स्टॉफ को लाने ले जाने के लिए परिवहन का साधन बन कर रह गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट से श्रमिकों की जांच कर अगर सिलिकोसिस संदिग्ध हो तो उनका रजिस्ट्रेशन किया जाना था। ताकि ऐसे श्रमिकों को समय पर मुआवजा मिल सके जिससे उनके परिवार की गुजर बसर हो सके। मोबाइल मेडिकल यूनिट को माइनिंग क्षेत्र और मिनरल फैक्ट्रियों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों तक पहुंच कर उनकी जांच करने के लिए चिकित्सा विभाग, माइनिंग, रीको और श्रम विभाग के साथ ही फैक्ट्री मालिकों, संचालकों को भी आपस में तालमेल बनाते हुए ऐसे श्रमिकों की जांच कार्यस्थल के पास ही करने के निर्देश दिए गए। ताकि इन श्रमिकों को दिहाड़ी का नुकसान भी ना हो और बीमारी का प्राइमरी स्टेज पर पता चल सके तो एेसे श्रमिकों का उपचार शुरू किया जा सके।

विभागों में नहीं बन पा रहा सामंजस्य

मानवधिकार आयोग के निर्देश पर जिला क्षय रोग अधिकारी के निर्देशन में मोबाइल मेडिकल यूनिट सप्ताह में दो दिन श्रमिकों की जांच के लिए ब्यावर भेज दी गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जहां मिनरल क्षेत्रों में जाकर श्रमिकों की जांच करनी थी तो वहीं रीको द्वारा चिकित्सा टीम को फैक्ट्रियों की लिस्ट देनी थी लेकिन रीको द्वारा टीम को दो साल बाद भी फैक्ट्रियों की प्रॉपर लिस्ट उपलब्ध नहीं करवाई गई। श्रम विभाग द्वारा मिनरल क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की डायरी बनाने और रजिस्टर्ड श्रमिकों की सूची चिकित्सा विभाग की टीम को उपलब्ध करवाने थे। इसके साथ ही फैक्ट्री संचालकों को अपने यहां नियमित कार्यरत ऐसे श्रमिकों की जांच करवानी थी जो लंबे समय से उनके यहां कार्य कर रहे हैं। लेकिन दो साल बाद भी चिकित्सा विभाग की टीम के पास जहां माइनिंग विभाग द्वारा महज 84 फैक्ट्रियों की सूची उपलब्ध करवाई गई है तो वहीं श्रम विभाग द्वारा मिनरल क्षेत्र में एक भी कैंप लगाकर श्रमिकों की डायरी नहीं बनाई गई।

एक्सरे से श्रमिकों को खतरा

स्थिति ये है कि पिछले दो साल में लाखों रूपए का डीजल फूंकने के बाद भी इस मोबाइल मेडिकल यूनिट से महज 53 श्रमिकों के ही एक्सरे हो सके हैं। बार बार पटरी से उतरने के कारण ये एक्सरे मशीन लटकती रहती है। ऐसे में एक्सरे का प्रयास करने पर ये मशीन श्रमिक पर गिर सकती है। इस कारण एक्सरे को बंद कर दिया गया है।

इनका कहना है

चिकित्सा विभाग द्वारा हर सप्ताह वैन श्रमिकों की जांच के लिए भेजी जा रही थी। लेकिन रीको फैक्ट्रियों में हड़ताल के कारण वैन को बंद किया गया है। विभाग द्वारा उपलब्ध सूची में सिर्फ फैक्ट्रियों की पूरी डिटेल तक नहीं है ऐसे में फैक्ट्रियों को तलाश कर पाना बेहद कठिन है तो वहीं कई फैक्ट्रियां तो बंद पड़ी है। अन्य विभागों का सहयोग मिले तो श्रमिकों की समय पर स्क्रीनिंग हो सकती है।” -डॉ. संजय शर्मा, कार्यवाहक प्रभारी, टीबी क्लिनिक

एक माह से थमे हैं पहिए

लाखों की लागत से शुरू की गई मोबाइल मेडिकल यूनिट के पहिए पिछले एक माह से थमे हैं। दरअसल रीको क्षेत्र के लघु उद्योग संघ द्वारा पीएमओ एकेएच ब्यावर कार्यालय को पत्र लिखकर 1 मार्च से फैक्ट्रियों में कार्य बंद रहने का हवाला देते हुए 31 मार्च तक मोबाइल मेडिकल यूनिट को नहीं भेजने के लिए लिखा। जिस कारण पिछले एक माह से ये वैन पुराने सीएमएचओ कार्यालय परिसर में खड़ी है।

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