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कमाई वाले रूट पर अब भी चहेतोंं को मिल रही ड्यूटी

Beawar News - रोडवेज में कमाई वाले रुट पर अब भी मिलीभगत के चलते मनमर्जी से ड्यूटी लग रही है। जबकि एक साल पहले ही मुख्यालय ने आदेश...

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2018, 02:26 AM IST
Beawer - duty still getting the money on the earning route
रोडवेज में कमाई वाले रुट पर अब भी मिलीभगत के चलते मनमर्जी से ड्यूटी लग रही है। जबकि एक साल पहले ही मुख्यालय ने आदेश जारी कर पाबंद कर दिया था कि सभी आगार में रुट चार्ट मैन्युअली न बनाकर उसे ऑनलाइन बनाए जाए।

मुख्यालय के इस आदेश के पीछे रुट निर्धारण में चालक, परिचालकों सहित आगार अधिकारियों की मनमर्जी पर लगाम लगाना था। आदेश के मुताबिक स्थानीय आगार प्रबंधन की जगह जयपुर से ही रुट चार्ट तय होना था। इसके लिए आगार प्रबंधन को जयपुर मुख्यालय को महज यह सूचना भिजवानी थी कि उसके पास कितनी बसें और उन्हें संचालित करने के लिए कितने चालक और परिचालक उपलब्ध है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यालय उपलब्ध संसाधन और कर्मचारियों के आधार पर रोटेशन प्रणाली के तहत रुट चार्ट तय करता। मगर यह सब महज कागजी आदेश बनकर ही रह गए। आगार के अधिकारियों ने इसके पीछे आगार में चल रही चालक-परिचालकों की कमी के साथ ही आगार में कम्प्यूटर खराब होने के चलते कम्प्यूटराइज्ड रुट प्रणाली का उपयोग नहीं करने की बात कह रहे है। वहीं निगम की मंशा इस योजना को चालू कर राजस्व में बढ़ोत्तरी करने के साथ ही आय की छीजत को रोकने का था।

अवकाश की भी मिलती राहत: कम्प्यूटराइज्ड रूट प्रणाली के ब्यावर आगार में लागू होने से ड्यूटी के प्रति सख्ती के साथ कार्मिकों को अवकाश की राहत भी प्राप्त होती। वर्तमान में चालक-परिचालक लम्बे रूटों पर चलने से अवकाश से वंचित रह रहे है। लेकिन कम्प्यूटराइज्ड प्रणाली शुरू होने के बाद एक माह में चालक-परिचालक को 24 दिन ड्यूटी पर आना होगा, जबकि शेष दिन अवकाश दिया जाना है। रोडवेज कर्मचारियों ने बताया कि इस योजना के अब तक लागू नहीं होने के कारण आगार में दर्जनों चालक-परिचालक ऐसे है जो बस संचालन के बजाए आगार कार्यालय में ही बैठकर कार्य कर रहे है। यदि आगार की ओर से कम्प्यूटराइज्जड प्रणाली लागू करने के बाद से मुख्यालय से सभी चालक-परिचालकों को बसों पर जाने की ड्यूटी लगेगी।

37 चालक बने परिचालक : आगार में कुल 158 पद परिचालकों के स्वीकृत है, जिनमें से 125 परिचालक आगार में कार्यरत है। इन 125 में से भी 45 चालकों से परिचालक का कार्य करवाया जा रहा है। इन 45 चालकों में से केवल 8 चालक ही ऐसे है, जिनकी मुख्यालय से नियुक्ति चालक व परिचालक दोनों कार्य के लिए हुई थी। लेकिन 37 चालकों की नियुक्ति केवल चालक पद पर हुई थी।

लम्बे समय से एक मार्ग पर ही चल रहे परिचालक : कर्मचारियों ने बताया कि मुख्यालय के कम्प्यूटराइज्जड प्रणाली के आदेश नहीं मानने के कारण वर्तमान में कई परिचालक ऐसे में है, जो कमाई वाले मार्गो पर लम्बे समय से कंडेक्टरी करते आ रहे है। अधिकारियों की मिलीभगत के कारण इन परिचालकों की बसों की जांच भी नहीं होती, जिस कारण आगार को राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। कर्मचारियों ने बताया कि ब्यावर से भीम, काछबली, टॉडगढ़ मार्ग पर चलने वाली रोडवेज बस में लम्बे समय से परिचालक प्रहलादचंद, मदन सिंह चाैहान, मांगलीलाल, भगवान सिंह द्वितीय ही चल रहे है। ब्यावर से भीम, काछबली, टॉडगढ़ मार्ग पर वर्ष 2017-18 में फ्लाईंग की ओर से तीन बार ही कार्रवाई हुई है। वह भी अन्य डिपो की फालाईंग की ओर से कार्रवाई की गई। दूसरी ओर ब्यावर से जीसीए मार्ग पर 37 तथा ब्यावर से नसीराबाद रूट पर फ्लाइंग की टीम ने 19 बार परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है।


कम्प्यूट्राइज्ड होने थे रूट चार्ट, मगर एक साल बाद भी रोडवेज प्रबंधन नहीं कर रहा मुख्यालय के आदेश की पालना, अधिकारी दे रहे स्टाफ की कमी व कम्प्यूटर खराब हाेने का हवाला

यह होनी थी व्यवस्था...

इस व्यवस्था के तहत आगार प्रबंधन स्वंय के स्तर पर चालक-परिचालक की रूट पर ड्यूटी नहीं लगा सकते थे। इस प्रक्रिया में ब्यावर आगार की ओर से उपलब्ध कराई चालक, परिचालक व बसों की सूची के आधार पर मासिक रूट तय किए जाने थे। जहां एक माह बाद फिर से कम्प्यूटराइज्ड सिस्टम से लॉटरी के आधार पर रूट तय किए जाने थे। जिसमें हर बार तय रूट में चालक-परिचालकों की जोड़ी भी बदलती रहनी थी। इससे रूट विशेष पर मुख्यालय को अनुमानित की तुलना में हो रही कम आय से निजात प्राप्त होती। रोडवेज कर्मचारियों ने बताया कि यह आदेश आगार में महज एक माह भी नहीं चल सके।

ब्यावर रोडवेज डिपो कमाई के मामले में अव्वल

ब्यावर आगार कमाई के मामले में पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है। आगार के मुख्य प्रबंधक रघुराज सिंह ने बताया कि शुक्रवार को ब्यावर आगार की बसों में सौ प्रतिशत यात्रीभार रहने से आगार को एक दिन में कुल 15 लाख 44 हजार 217 रुपए की आय प्राप्त हुई है। एक दिन में आगार की कुल बसें 33 हजार 137 किलोमीटर संचालित हुई। आगार को सबसे अधिक ब्यावर से पुष्कर, ब्यावर से बीकानेर, ब्यावर से जयपुर व ब्यावर से बांसवाड़ा मार्ग पर चली बसों से आय प्राप्त हुई है।

एक साल बाद आया आगार प्रथम स्थान पर : प्रदेश के 52 डीपो में से ब्यावर आगार एक साल बाद जाकर कमाई के मामले में प्रथम स्थान पर आया है। प्रबंधक रघुराज सिंह ने बताया कि इससे पहले आगार पूरे प्रदेश में 4 नवम्बर 2017 को प्रथम स्थान पर रहा था। उस वक्त आगार को 14 लाख 60 हजार 920 रुपए की आय प्राप्त हुई थी। उस वक्त भी पुष्कर मेले में संचालित हुई बसों के कारण आगार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।

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