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अतिक्रमण का फोड़ा धीरे-धीरे बनता नासूर!

शहर में यातायात और पार्किंग व्यवस्था का जिम्मा कहने को तो नगर परिषद के कंधों पर है मगर हकीकत तो यह है कि अब यह...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 02:15 AM IST
अतिक्रमण का फोड़ा धीरे-धीरे बनता नासूर!
शहर में यातायात और पार्किंग व्यवस्था का जिम्मा कहने को तो नगर परिषद के कंधों पर है मगर हकीकत तो यह है कि अब यह समस्या प्रशासन के लिए भी नासूर बनती जा रही है। परिषद हो या फिर पुलिस की कार्रवाई न तो अतिक्रमियों को इसकी परवाह है और न ही बेतरतीब वाहन खड़े करने वालों को। बाजार हो या फिर मुख्य चौराहे कई ठेले तो ऐसे हैं जिन्हें न तो यातायात व्यवस्था से मतलब है और न ही अधिकारियों की टोका-टोकी से। मंगलवार को ऐसे ही एक मामले में अतिक्रमण शाखा प्रभारी के साथ एक ठेला संचालक हाथापाई तक उतारू हो गया। जिसे बाद में मौके पर पहुंचे आयुक्त ने अपनी हद में रहकर व्यापार करने के लिए पाबंद किया।

अतिक्रमण शाखा प्रभारी रतनसिंह पंवार और नगर परिषद के बाहर खड़े रहने वाले एक ज्यूस ठेला संचालक के बीच कहासुनी हो गई। काफी देर तक चली गहमागहमी के दौरान परिषद कर्मचारियों ने उसके ठेले का जब्त करना चाहा लेकिन ठेला संचालक की दंबगाई के कारण कर्मचारी ठेला नहीं ले जा सके। इस कार्रवाई के दौरान ठेले पर रखी कांच की गिलासें टूट गई। अतिक्रमण शाखा प्रभारी रतनसिंह पंवार ने इसकी सूचना आयुक्त सुखराम खोकर और सभापति बबीता चौहान को दी। मौके पर पहुंचे आयुक्त ने ठेले को वहां से हटाने के निर्देश दिए।

जानकारी मिली है कि ठेला संचालक इस दौरान अतिक्रमण शाखा प्रभारी को भला-बुरा कहते हुए उसे परेशान करने का आरोप लगा रहा था।

मालूम हो कि विगत उक्त ठेला संचालक तथा अन्य ख्रोमचे के ठेले वालों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। विवाद नगर परिषद पहुंचा तो अतिक्रमण शाखा प्रभारी ने उक्त ठेले वाले को नगर परिषद के सामने ठेला खड़ा नहीं करने के लिए पाबंद किया था। परिषद की पाबंदी के बाद भी ज्यूस ठेला संचालक अपने पूर्व निर्धारित स्थान पर खड़ा होने लगा। मंगलवार को जब इसकी जानकारी अतिक्रमण शाखा प्रभारी को हुई तो उन्होंने उसे वहां पर खडा नहीं होने के लिए कहा तो विवाद खड़ा हो गया।


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