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पेयजल संकट ग्रामीणों को टैंकर पर रहना पड़ता है निर्भर, बजट के अभाव में ग्राम पंचायत प्रशासन भामाशाह की मदद से भी उपलब्ध कराती है पेयजल

सरकार ने जवाजा और टॉडगढ़ के 199 गांवों में पेयजल संकट को देखते हुए करोड़ों की योजना तो शुरू की मगर अब तक किसी भी एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 02, 2018, 02:20 AM IST

पेयजल संकट 
ग्रामीणों को टैंकर पर रहना पड़ता है निर्भर, बजट के अभाव में ग्राम पंचायत प्रशासन भामाशाह की मदद से भी उपलब्ध कराती है पेयजल
सरकार ने जवाजा और टॉडगढ़ के 199 गांवों में पेयजल संकट को देखते हुए करोड़ों की योजना तो शुरू की मगर अब तक किसी भी एक गांव में पानी सप्लाई नहीं हो सका। इधर गिरते जलस्तर और तालाबों में पानी की आवक कम होने से साल-दर-साल पारंपरिक जलस्रोत के प्रमुख साधन कुओं का पानी नीचे जाने से अब तो वह भी सूखने लगे हैं। अकेले ग्राम पंचायत नूंद्री मालदेव की बात करें तो इसमें 60 में से 17 से अधिक कुओं का इन गर्मियों में पैंदा नजर आने लगा हैं। ग्रामीणों के सामने फसल तो दूर बल्कि खुद के पीने के लिए पानी के लिए भी शहर से मंगवाए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

ग्राम पंचायत नूंद्री मालदेव पर एक नजर

कुल आबादी - 14 हजार

प्रमुख राजस्व ग्राम - नूंद्री मालदेव, गणेशपुरा, शिवनाथपुरा, गोविंदपुरा।

ढाणी और बाडि़ए - 20 कॉलोनियां और 10 बाडि़ए बसे हैं।

पेयजल स्रोत - फूलसागर तालाब, पर बस्ती तालाब, बड़ा तालाब नूंद्री मालदेव और नया तालाब नूंद्री मालदेव, 60 कुएं (6 सरकार और शेष निजी)

जलस्तर कम होने से नूंद्री मालदेव में 4 तालाब और 17 कुएं सूखे

ब्यावर. गोविंदपुरा स्थित कुएं का पानी सूखने से उसका पैंदा साफ नजर आ रहा है।

ये कुएं जिनमें पानी सूख चुका है : शिवनाथपुरा स्थित 2 सार्वजनिक कुएं, मगनीराम का कुआं, गोविंदपुरा स्थित सार्वजनिक कुआ, गणेशपुरा स्थित सार्वजनिक कुआ, ईसाइयों का कुआं, गणेशपुरा निवासी किशनराम के घर के सामने स्थित कुआं, गणेशपुरा में त्रिलोक मेघवाल का कुआं, शिवनाथपुरा खातियों का कुआं, शिवनाथपुरा स्थित खारिया कुआं, शिवनाथपुरा स्थित बंटी का कुआंं, जीवण हापू का कुआं, गणेशपुरा स्थित गोपी महाराज का कुआं, रतन बाबा का बाडिय़ा स्थित कुआ और नूंद्री मालदेव पंचायत भवन के सामने स्थित कुएं का पानी सूख चुका हैं।

अभी क्या है व्यवस्था : सरपंच कानाराम गुर्जर बताते हैं कि फूलसागर स्थित सरकारी पंप हाउस से शिवनाथपुरा और गणेशपुरा के लिए मुश्किल से करीब एक टैंकर पेयजल सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा ग्रामीणों को अपने स्तर पर 400 रुपए प्रति टैंकर के हिसाब से ब्यावर से टैंकर मंगवाना पड़ता है। जब कभी भी जरूरत होती है तो ग्राम पंचायत बजट के अभाव में भामाशाह की मदद से टैंकर उपलब्ध कराती है। इसके लिए सरकार की ओर से कोई फंड उपलब्ध नहीं कराया गया।

सरकार ने क्या किया...

दो साल पहले सरकार ने सूखे कुओं को गहरा कराने के लिए मनरेगा में जोड़ने का प्रस्ताव लिया था मगर इस पर अब तक कोई अमल नहीं किया। जब भी सरकार ने फंड उपलब्ध कराया तब उन्हें गहरा कराने का प्रयास किया जाता है।

यह रही कुएं और तालाब सूखने की वजह...

आवक के रास्ते में छोटे-छोटे एनीकट बनना।

आवक के रास्ते पर विलायती बबूल का उगना।

तालाब के कैचमेंट एरिया में छोटे एनिकट और नाडी का निर्माण।

आवक के रास्ते पर अतिक्रमण।

यह है सुझाव : कैचमेंट एरिया में बने छोटे एनीकट और नाडी हटनी चाहिए। आवक के रास्ते को अतिक्रमण मुक्त किया जाए और इसके अलावा विलायती बबूल भी हटें, तब जाकर इन सूखे तालाबों में फिर से पानी की आवक हो सकती है।

पंचायत के 4 तालाब और 17 कुएं सूखे पड़े हैं। 14 हजार से अधिक आबादी को ब्यावर से टैंकर मंगवाना पड़ता हैं। इन गर्मियों में पेयजल समस्या विकट है। इसके बावजूद भी पिछले दो साल में टैंकर से जल परिवहन व्यवस्था भी ठप पड़ी है। कानाराम गुर्जर, सरपंच, नूंद्री मालदेव

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Web Title: पेयजल संकट ग्रामीणों को टैंकर पर रहना पड़ता है निर्भर, बजट के अभाव में ग्राम पंचायत प्रशासन भामाशाह की मदद से भी उपलब्ध कराती है पेयजल
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