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डेंगू व स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट नहीं छिपा सकेंगे अस्पताल

प्रदेश के राजकीय व निजी अस्पताल मच्छर के काटने से हुई मौत को छुपा नहीं सकेंगे। राज्य सरकार ने मलेरिया, डेंगू व...

Danik Bhaskar | Jun 02, 2018, 02:20 AM IST
प्रदेश के राजकीय व निजी अस्पताल मच्छर के काटने से हुई मौत को छुपा नहीं सकेंगे। राज्य सरकार ने मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू को नोटिफाइड डिजीज घोषित किया है। दो दिन पूर्व ही चिकित्सा विभाग के डिप्टी सेक्रेट्री पीसी जैन ने इस संबंध में सर्कुलर जारी किया है। इसके अनुसार उपरोक्त रोगियों की रिपोर्ट हर हाल में चिकित्सा विभाग को देनी होगी।

चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकारी व निजी अस्पतालों को मादा एनोफिलिज मच्छर के काटने से मलेरिया, एडीज एजिप्टाई मच्छर के काटने से डेंगू व स्वाइन फ्लू के एच 1 एन 1 मरीजों की रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। किसी भी संस्थान की ओर से पॉजिटिव केस पाए जाने पर मरीज की मौत होने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को मरीज का नाम, पता, मोबाइल नंबर व चल रहे इलाज के बारें में जानकारी देनी ही होगी। अगर कोई अस्पताल सूचना नहीं देता है और पता चलने पर सूचना नहीं देने वालो के खिलाफ सरकार द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। इसकी समस्त जिम्मेदारी उस अस्पताल की होगी।

विभागीय जानकारी के अनुसार अगर मरीज चाहे तो अपनी रिपोर्ट गोपनीय रख सकता है। इसके लिए जिस अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है उस अस्पताल प्रबंधन को लिखकर देना होगा। राज्य सरकार ने मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू को राजस्थान एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1957 के तहत नोटिफाइड डिजीज घोषित किया है। मालूम हो कि चिकित्सा विभाग के डिप्टी सेक्रेट्री पीसी जैन ने दो दिन पूर्व ही मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू को नोटिफाइड डिजीज घोषित करने का सर्कुलर जारी किया है।

मौत की सूचना देना होगा अनिवार्य: सरकार ने मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू को नोटिफाइड डिजीज घोषित करने से पॉजिटिव व मौत की रिपोर्ट देना सभी अस्पतालो के लिए अनिवार्य हो गया है। डेंगू की जांच अब एलाइजा टेस्ट से ही कर सकेंगे। यदि रेपिड डायग्नोस्टिक किट (आरडीटी) किट से करते है, तो कन्फर्म करना होगा। और मरीज की मॉनिटरिंग करनी होगी। मलेरिया की माइक्रोस्कोपिक जांच करनी पड़ेगी। किशनगढ़ क्षेत्र में 9 सहित अजमेर जिले में 41 मौतें इन्हीं रोगों से हुई है।

सूचना पर सर्वे अनिवार्य : उपरोक्त रोगों की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग को उस क्षेत्र में घर-घर सर्वे करना होगा। नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोगाम (एनवीबीडीसीपी) नई दिल्ली ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी की है। गाइडलाइन के अनुसार एंटीलार्वा गतिविधि, फोगिंग व पॉजिटिव केस पाए जाने पर आसपास के घरों का सर्वे करना पड़ेगा।