--Advertisement--

ज्ञान, ध्यान के साथ ही सीख रहे संस्कार

अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी श्रीजयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में उदयपुर रोड़ स्थित आदर्श विद्या मंदिर...

Dainik Bhaskar

May 21, 2018, 02:25 AM IST
ज्ञान, ध्यान के साथ ही सीख रहे संस्कार
अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी श्रीजयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में उदयपुर रोड़ स्थित आदर्श विद्या मंदिर परिसर में आयोजित हो रहे 75 वें हीरक जयंती राष्ट्रीय स्तरीय जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान संस्कार शिविर में देश भर के 12 राज्यों के 750 से अधिक शिविरार्थी सिर्फ ज्ञान और ध्यान ही नहीं बल्कि संस्कार का भी ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। शिविर में 8 साल से 60 साल तक के शिविरार्थी नियमित रूप से भगवान महावीर के संदेश एवं उनकी शिक्षाओं के बारे में गहनता से ना सिर्फ जान रहे हैं बल्कि शिविर के बाद इन शिक्षाओं से अन्य को भी लाभांवित करेंगे। राष्ट्र स्तरीय शिविर में देश के 12 राज्यों से करीब 750 शिविरार्थी भाग ले रहे है। जिनमें संस्कारों का बीजारोपण करने के साथ-साथ जैन धर्म की विभिन्न शिक्षा दी जा रही है। शिविर में जैन अणुपेहा, ध्यान, योग साधना आदि के बारे में भी विस्तार से अवगत करवाया जा रहा है। इसके अलावा व्यक्तित्व विकास एवं सामाजिक विषयों के बारे में भी शिक्षा दी जा रही है। ब्यावर में आयोजित हो रहे शिविर को हीरक जयंती के रूप में आयोजित किया जा रहा है। जो लगातार 75 साल से आयोजित हो रहा है। उक्त जानकारी देते हुए श्रमणी प्रमुख निधि ने बताया कि सोजत के समीप सियाट में चौथमल जी मसा. द्वारा 1944 में इस पौधे को लगाया गया जो आज पूरे 75 वर्ष का पेड़ बन गया है। उन्होंने बताया कि 1944 में महज 35 शिविरार्थियों से शुरू हुए इस शिविर में आज 750 शिविरार्थी भाग ले रहे हैं जो अपने आप में एक कीर्तिमान है। शिविर के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इस शिविर के जरिए जो विशेष कार्य किया जा रहा है वो बच्चों को सभी प्रकार के व्यसनों से मुक्त किया जाना है। शिविर में आने वाले हर विद्यार्थी को व्यसन से दूर रह कर जीवन को व्यसन मुक्त बनाने की शिक्षा भी दी जा रही है। इसके अलावा पर्यावरण सुरक्षा, शाकाहार बनने, स्वच्छता के प्रति जागरूकता, किसी भी प्रकार की हिंसा प्रवृति से दूर रहने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान श्रमणी श्रतुनिधि, डा. सुयशनिधि एवं सुयोगनिधि ने भी शिविर के बारे में विस्तार से बताया। उक्त जानकारी देने हुए उन्होंने बताया कि जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान ध्यान, संस्कार शिविर देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित किया जाता है। शिविर में भाग लेने वाले शिविरार्थी का ना सिर्फ ऑन लाइन पंजीयन होता है बल्कि उन्हें शिविर में आने जाने के साथ ही शिविर में रहने खाने तक की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध करवाई जाती है। इस शिविर की खास बात ये है कि शिविर में 750 में से 150 से अधिक शिविरार्थी अजैन(अन्य समाज से) हैं। जिन्होंने भगवान महावीर की शिक्षा को अंगीकार किया है। प्रात 6 बजे ध्यान साधना से शिविर का शुभारंभ होता है। जिसके पश्चात विभिन्न पाठ्यक्रम, प्रवचन, ध्यान, साधना करवाए जाते हैं। इस शिविर में से 75 बेस्ट शिविरार्थियों को टेलेंट अवार्ड दिया जाएगा। इस दौरान शिविर में शिक्षा लेने के बाद आए परिवर्तन को लेकर शिविरार्थियों डिंपल, वंशिता और आलिशा ने भी अपने अनुभव साझा किए।

ध्यान शिविर एवं सहज समाधि कोर्स समाप्त : आर्ट ऑफ लिविंग परिवार की ओर से आयोजित प्राणायाम ध्यान शिविर एवं सहज समाधि कोर्स का रविवार को समापन हुआ। सुबह 5.30 से 8 बजे तक वर्द्धमान कॉलेज में आयोजित शिविर में शिक्षक महेश शर्मा ने ओम उच्चारण, कपालभाति, सूक्ष्म योग, भ्रस्तिका सहित योग की अन्य विधियों का अभ्यास कराया। शर्मा ने कहा कि जीवन में मुस्कुराहट, वाक्, संगीत, सेवा एवं साधना का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। शाम 4.30 से 7.30 बजे तक गीता भवन में सहज समाधि कोर्स में शिक्षक शर्मा ने सभी को नियमित रूप से ध्यान करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नरेश झंवर, अनिल शर्मा, मनमोहन शर्मा, राजेन्द्र खंडेलवाल, शंभूदयाल व्यास, वीणा झंवर, प्रीति शर्मा, शिल्पा जोशी ने सेवाएं दीं।

जयमल जैन आध्यात्मिक ज्ञान, ध्यान संस्कार शिविर में शिविर में शिक्षा लेते शिविरार्थी।

X
ज्ञान, ध्यान के साथ ही सीख रहे संस्कार
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..