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अपनों की ठुकराई बेटी का परिवार बना अमृतकौर अस्पताल

अमृतकौर अस्पताल के पालना गृह में रविवार रात मिली दूधमुंही बच्ची को अब अस्पताल स्टाफ उसे अपने परिवार जैसा प्यार...

Danik Bhaskar | Jun 02, 2018, 02:25 AM IST
अमृतकौर अस्पताल के पालना गृह में रविवार रात मिली दूधमुंही बच्ची को अब अस्पताल स्टाफ उसे अपने परिवार जैसा प्यार देने में जुटा है। अपनों की ठुकराई बच्ची के लिए महज तीन-चार दिन में ही पूरा अस्पताल स्टाफ उसका परिवार जैसा बन गया है। पूरा स्टाफ उस पर दोनों हाथों से ममता लुटा रहा है। हालांकि फिर भी नन्ही आंखें जितनी बार खुलती हैं उतनी बार आसपास अपनी मां को तलाशती हैं। बार-बार नन्हे हाथों से मां का स्पर्श पाने का प्रयास करती है लेकिन जब उसे मां का अांचल और स्पर्श नहीं मिलता तो वह मचल उठती है। उसके रोते ही नर्सिंग स्टाफ हो या डॉक्टर या यशोदा कर्मी सभी तुरंत उसे संभालते हैं। इतना ही नहीं मदर मिल्क बैंक मासूम के लिए वरदान साबित हो रहा है। दिन में तीन बार मासूम को तीन यूनिट दूध उपलब्ध करवाया जाता है।

ब्यावर. अपनों का इंतजार करती मासूम।

ब्यावर. अमृतकौर अस्पताल स्टाफ की गोद में मासूम।

अस्पताल में प्यार मिला, दुलार मिला और मिला नाम…

अपनी मां के प्यार और आंचल से वंचित मासूम को ना सिर्फ एसएनसीयू वार्ड के कर्मचारियों ने “शुभलक्ष्मी” नाम दिया है बल्कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ अौर यशोदा कर्मी उसे परिवार की तरह ही लाड, प्यार और दुलार दे रहा है। अब जब तक इस मासूम को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा तब तक वार्ड का हर स्टाफ शुभलक्ष्मी की खातिरदारी में जुटा हुआ है।

मासूम के दूध की जरूरत भी पूरी …

अस्पताल के पालना गृह में रविवार रात को मिली मासूम सोमवार सुबह भूख के कारण रोने लगी तो स्टाफ ने डॉक्टर के परामर्श पर मदर मिल्क बैंक से मां का दूध इश्यू करवाया। मदर मिल्क बैंक के स्टॉफ को भी जब इस मासूम के बारे में पता चला तो ना सिर्फ स्टाफ के सभी सदस्य उसे दुलार करने आए बल्कि अब उसे 30-30 एमएल का तीन यूनिट दूध उसे प्रतिदिन इश्यू कर रहा है। इसके साथ ही स्टाफ भी रोजाना जाकर इस मासूम की कुशलक्षेम पूछता है। हालांकि मासूम काफी छोटी है इस कारण अभी वह मुंह से दूध पीने में असमर्थ है इस कारण उसके नाक में नली लगा कर दूध दिया जा रहा है।

लाइव कैमरे की नजर में शुभलक्ष्मी| नवजात बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए एसएनसीयू पहले से ही सीसीटीवी कैमरे की नजर में है। शुभलक्ष्मी के मामले में अस्पताल प्रबंधन ज्यादा सतर्क है। शुभलक्ष्मी को ना सिर्फ कैमरे की नजर रखा गया है बल्कि उस पर लाइव कैमरे की भी नजर है। उस पर 24 घंटे किसी ना किसी स्टाफ की नजर जरूर रहती है।

मेरा क्या कसूर| हालांकि “शुभलक्ष्मी” बोल नहीं सकती। लेकिन उसकी आंखों में एक सवाल जरूर दिखता हैं। अगर वह बोल पाती तो समाज और अपने परिवार से ये जरूर पूछती कि “मां आखिर मेरा क्या कसूर है। मुझे सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि मैं लड़की हूं। मां इसमें मेरा क्या कसूर कि भगवान ने मुझे लड़की बनाया।