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पुरुष नसबंदी : हर माह तीसरे बुधवार को विशेष अभियान

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों के बाद भी पुरुष नसबंदी के आंकड़े...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 02:30 AM IST
जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों के बाद भी पुरुष नसबंदी के आंकड़े चिंताजनक है। परिवार नियोजन को लेकर सरकार द्वारा दिए गए लक्ष्य की बात करें तो महिला नसबंदी के टारगेट भी पूरे नहीं हो पाए हैं। वहीं पुरुष नसबंदी में तो स्थिति काफी दयनीय रही। ये स्थिति सिर्फ ब्यावर की ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश भर में रही। इस कारण परिवार कल्याण कार्यक्रम में पुरूषों की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से अब प्रदेश सरकार के निर्देश पर हर माह के तीसरे बुधवार को पुरुष नसबंदी वार के रूप में मनाया जाएगा।

राजकीय अमृतकौर अस्पताल में 16 मई से अभियान शुरू कर दिया गया। पीएमओ डॉ. एमके जैन ने बताया कि परिवार नियोजन के तहत स्थाई साधन अपनाने में पुरुष भागीदारी को बढ़ाने के लिए अस्पताल आउटडोर समय में नसबंदी शिविर का आयोजन किया जाएगा। गत वित्तीय वर्ष में अमृतकौर अस्पताल की बात करें तो महिला नसबंदी को लेकर तो स्थिति संतोषप्रद रही लेकिन पुरुष नसबंदी के आंकड़े चौंकाने वाले रहे। चिकित्सा विभाग का इस वित्तीय वर्ष में 31 मार्च से पहले 74 पुरुषों की नसबंदी करने का लक्ष्य दिया गया। इसके विपरीत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमा पूरे साल में महज 3 पुरुषों की ही नसबंदी कर पाया है। ऐसा नहीं है कि महिला नसबंदी में भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थिति बेहद अच्छी हो। महिला नसबंदी में भी चिकित्सा महकमा अभी तक आधा लक्ष्य ही हासिल कर पाया है। चिकित्सा विभाग द्वारा महिला नसबंदी के लिए 669 केस का लक्ष्य दिया गया। लेकिन उपखंड में महज 424 महिलाओं की ही नसबंदी करवाई जा सकी है।

पुरुषों में नहीं रुझान : चिकित्सा विभाग के सूत्रों की माने तो पुरुष नसबंदी को लेकर ना तो लोगों में रुझान है और ना ही फील्ड कार्यकर्ता पुरुषों को प्रेरित कर पा रहे हैं। ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र अधिकांश पुरुष नसबंदी के लिए महिलाओं को आगे करते हैं। ऐसे में परेशानी होती है और लक्ष्य भी पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

काउंसलिंग का अभाव

विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अगर पुरुषों की समय पर अौर प्रॉपर काउंसलिंग की जाए तो लक्ष्य पाने में थोड़ी मदद मिलेगी। फील्ड कार्यकर्ताओं की भी समस्या है कि अधिकतर कार्यकर्ता महिलाएं हैं ऐसे में उन्हें पुरुषों की काउंसलिंग में परेशानी आती है। इतना ही नहीं चिकित्सा विभाग द्वारा लंबे अर्से से पुरुषों की काउंसलिंग के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया है। ऐसे में पुरुष नसबंदी में विभाग काफी पिछड़ रहा है।

पुरुष नसबंदी की बढ़ेगी संख्या : चिकित्सा विभाग का मानना है कि फील्ड कार्यकर्ता पुरुषों की ठीक से काउंसलिंग नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में हर माह के तीसरे बुधवार को पुरुष नसबंदी वार के रूप में मनाया जाएगा। विभाग को उम्मीद है कि इससे ना सिर्फ पुरुषों की काउंसलिंग हो सकेगी बल्कि पुरुष नसबंदी की संख्या में भी इजाफा हो सकेगा।