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तुलसी दया न छोड़िए, जब तक घट में प्राण

मानव जीवन प्रभु की देन है। यह हमें इसलिए प्राप्त हुआ है कि हम शुभ कर्म करते हुए प्रभु स्मरण करते रहें। पुरुषोत्तम...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:30 AM IST

तुलसी दया न छोड़िए, जब तक घट में प्राण
मानव जीवन प्रभु की देन है। यह हमें इसलिए प्राप्त हुआ है कि हम शुभ कर्म करते हुए प्रभु स्मरण करते रहें। पुरुषोत्तम मास में लिया गया नाम जन व किया गया शुभ कार्य अनन्त गुणा फल देता है। यह बात रामस्नेही रामद्वारा ट्रस्ट की ओर से रामद्वारा में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में संत उत्तम राम महाराज ने कही।

उन्होंने कहा कि दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान, तुलसी दया न छोड़िए, जब तक घट में प्राण। उन्होंने अहंकार को पाप की जड़ बताया, रावण सर्वगुण सम्पन्न था, लेकिन उसका अहंकार उसे ले बैठा। प्रभु चाहते हैं कि हम नम्र बनें) ताकि सभी के प्रिय रह सके।

भगवान ने हिरण्यकश्यप का उद्धार करने के लिए ही यह अधिक मास बनाया जो कि ज्योतिष गणना के अनुसार हर बत्तीस माह के बाद आता है। महाराज ने कहा कि प्रभु यही चाहते है कि अपने जीवन को सार्थक करने के लिए सत्संग का सहारा ले। सत्संग की महिमा अनंत है। बिन सत्संग विवेक न होई, राम कृपा बिन सुलभ न सोई। हम सत्संग कर रहे है, सह प्रभु की असीम कृपा है। मीडिया प्रभारी रामप्रसाद मित्तल ने बताया कि 13 जून तक प्रति दिन सुबह 8 से 9.30 बजे तक प्रवचन चलेंगे।

ब्यावर. रामद्वारा में प्रवचन के दौरान मौजूद श्रद्धालु।

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