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शहर भर में खुदी हुई हैं तमाम सड़कें, मरम्मत में नहीं किसी की रुचि

शहर में पानी की पाइप लाइन डालने के लिए तो कभी केबल डालने के नाम पर तो कभी मरम्मत के नाम पर जगह जगह पर सड़कों को खोद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 09, 2018, 02:35 AM IST

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    शहर में पानी की पाइप लाइन डालने के लिए तो कभी केबल डालने के नाम पर तो कभी मरम्मत के नाम पर जगह जगह पर सड़कों को खोद दिया गया। लेकिन सड़कों को वापस रीस्टोरेशन को लेकर ना तो खुदाई करने वाले गंभीरता दिखाते है और ना ही प्रशासन को इससे काेई सरोकार है। यहां तक की सड़के खोदने के दौरान सुरक्षा मापदंडों की भी अनदेखी की जाती है।

    खुदाई से पहले प्रशासन खुदाई करने वाली कंपनी और संस्था के समक्ष विभिन्न शर्तें रखता है। लेकिन हकीकत में इन शर्तों को पूरा करवाने में ना तो संबंधित एंजेसी गंभीरता बरतते हैं और ना ही प्रशासन को इन पर ध्यान देने की फुरसत। इसी कारण शहर में विभिन्न स्थानों पर निर्माण को लेकर खोदी गई सड़कें महीनों बाद भी जस की तस है और इस कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। जबकि नियमानुसार अगर खुदाई करने वाली एजेंसी तय समय सीमा में क्वालिटी रीस्टोरेशन नहीं करे तो ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। परमिशन देते वक्त ली जाने वाली बैंक गारंटी को जब्त कर उस राशि से सड़क का रीस्टोरेशन करवाया जा सकता है।

    ये है नियम…

    खुदाई के तीन दिन के भीतर रीस्टोरेशन पूरा करना होता है।

    खुदाई या पुर्ननिर्माण के दाैरान दुर्घटना से बचाव के लिए साइन बोर्ड और बेरिकेट्स लगाए जाने चाहिए।

    रीस्टोरेशन तय मापदंडों के अनुरूप लेयर्स में किया जाना चाहिए।

    खुदाई करने और खोदी गई सड़कों के वापस निर्माण के दौरान प्रशिक्षित इंजीनियरों की देखरेख में काम होना चाहिए, और उसके निर्देशों का पालन होना चाहिए।

    अगर काम लंबा और ज्यादा खुदाई का हो तो खुदाई 200-200 मीटर के चरणों में की जानी चाहिए और पिछली खोदी गई सड़क के रीस्टोरेशन के बाद ही आगे की खुदाई की जानी चाहिए।

    हकीकत...

    महीनों से हुई खुदाई के रीस्टोरेशन की कोई सुध नहीं है।

    खुदाई के दौरान ना तो बेरिकेट का पता है और ना ही सुरक्षा के अन्य साधनों का। जिससे दुर्घटना का खतरा रहता है।

    कुछ स्थानों पर रीस्टोरेशन के नाम पर डामर की पतली परत बिछा दी गई जो मजबूत नहीं है।

    कहीं भी इंजीनियर की देखरेख में कार्य नहीं होता।

    काम पूरा हो जाने के बाद कभी कभार रीस्टोरेशन का काम शुरू कर दिया जाता है।

    इनका कहना है.

    आम आदमी अगर कोई काम करता है तो प्रशासन उसे परमिशन और शर्तों के नाम पर कई नियम बता देता है। लेकिन बड़ी एजेंसियां सड़के खाेद कर बिना वापस बनाए चली जाए तो कोई सुनने वाले नहीं है। नोरत मल बाबेल, शहरवासी

    पाइप लाइन या केबल डालने के लिए या अन्य किसी भी विकास के काम के लिए सड़कों को खोदना गलत नहीं है। लेकिन नियमानुसार उन्हें समय पर लेवलिंग कर वापस बना दिया जाए तो आम लाेगों को परेशानी नहीं होगी। रमेश रामचंदानी, व्यापारी

    ब्यावर. शहर में खोदी गई सड़क। जिसका रीस्टोरेशन अभी तक नहीं किया गया है।

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