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वंदे गौ मातरम वाट्स एप ग्रुप से 180 सदस्य जुड़े हैं सेवा के इस अभियान में

शहर के कई युवा गोमाता के प्रति सेवा के जज्बे के चलते शहरवासियों सहित अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन रहे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 02:35 AM IST

वंदे गौ मातरम वाट्स एप ग्रुप से 180 सदस्य जुड़े हैं सेवा के इस अभियान में
शहर के कई युवा गोमाता के प्रति सेवा के जज्बे के चलते शहरवासियों सहित अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन रहे हैं। कई लोग पालतू गायों को सड़क पर छोड़ देते हैं। इससे ये गायें सड़क पर लावारिस घूमती हैं। युवाओं को एक ग्रुप ऐसा है जो तीन सालों से निस्वार्थ गोवंश की सेवा कर रहे हैं। ‘वंदे गो मातरम‘ नाम से बने ग्रुप के सेवक शहर व ग्रामीण इलाकों में कहीं भी किसी गोवंश के घायल व बीमार होने की सूचना मिलते ही तुरंत गोवंश की सेवा कर उन्हें इलाज मुहैया कराते हैं। ग्रुप के सदस्य निशुल्क तौर पर गोवंश की सेवा करते हैं। ग्रुप की शुरुआत करने वाले तीन प्रमुख सदस्यों में शामिल दीपक रांकावत ने बताया कि नवंबर 16 में जयंत सोलंकी व भवानी सिंह सोलंकी के साथ मिलकर ्म वाट्स एप पर “वंदे गौ मातरम ग्रुप‘ का निर्माण किया। तीन साल बीतने के बाद ग्रुप में कुल लगभग 180 सदस्य जुड़ चुके हैं।

गोवंश घायल हो या बीमार, सूचना मिलते ही पहुंचते हैं सेवक, अब तक तीन साल में कर चुके हैं 3-4 हजार गायों का इलाज

हजारों गायों का करवा चुके हैं निशुल्क इलाज |ग्रुप के दीपक रांकावत ने बताया कि ग्रुप का निर्माण होने से लेकर अब तक सेवकों ने कुल लगभग 3 से 4 हजार गायों का निशुल्क इलाज व सेवा कर चुके हैं। आज भी रोजाना ग्रुप के सेवक लगभग 15 से 20 गायों की सेवा करते हैं। ग्रुप को हाल ही में रजिस्टर्ड भी करवाया गया है। गोवंश के इलाज के लिए एक पशु चिकित्सक को भी साथ रखा जाता है वह गोवंश की सेवा के साथ उनका इलाज करता है।

खुद वहन करते हैं इलाज का खर्चा | ग्रुप के सदस्य गायों की सेवा व इलाज में होने वाले खर्चा खुद वहन करते हैं। कई बार गायों को इलाज के लिए बाहर भी भेजना पड़ता है। इसका समस्त खर्चा ग्रुप सदस्यों की ओर से वहन किया जाता है। ग्रुप से जुड़े ज्यादातर सेवक युवा व छात्र हैं। ऐसे में ग्रुप को कई बार आर्थिक परेशानी भी होती है।

शहर के बाहर से भी जुड़े हैं सेवक |ग्रुप में शहर के अलावा बाहर आसपास के इलाकों से भी कई सेवक जुड़े हैं। शहर के बाहर के सेवक रविवार या अन्य अवकाश के दिन शहर में आकर ग्रुप पर बीमार व घायल गोवंश की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंच सेवा देते हैं। ग्रुप में कई स्कूल व कॉलेज में अध्ययनरत विद्य‌ार्थी भी जुड़े हैं।

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