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दस साल से नहीं दिया बढ़ा किराया, अब होगी कार्रवाई

कृषि उपज मंडी में ऊन धुलाई का कार्य करने वाली श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति पर मंडी प्रशासन का...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:30 AM IST
कृषि उपज मंडी में ऊन धुलाई का कार्य करने वाली श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति पर मंडी प्रशासन का बढ़े हुए किराये के रूप में 9 लाख रुपए की राशि बकाया चल रही है। इसको लेकर मंडी प्रशासन की ओर से बार-बार नोटिस जारी करने के साथ ही आरोप पत्र तक जारी कर दिया गया है। लेकिन अब तक ऊन विकास सहकारी समिति ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसी को लेकर अब मंडी प्रशासन ने समिति पर कार्रवाई करने का मानस बना लिया है।

वहीं श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति के पदाधिकारी इन आदेश को स्वयं के ऊपर लागू नहीं होने की बात कह रहे है। मंडी अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 1994 में ऊन धुलाई के लिए श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति का गठन कर वाशिंग प्लांट लगाया गया था। उसके बाद से समिति की ओर से मंडी को प्रति माह 19 हजार 474 रुपए किराये के रूप में भुगतान किया जा रहा था। लेकिन कृषि विपणन बोर्ड ने वर्ष 2007 से दुकानों व ऊन वाशिंग प्लांट से प्रति वर्ष 5 प्रतिशत किराया राशि वृद्धि कर लिए जाने के आदेश दिए थे। लेकिन 10 वर्ष गुजर जाने के बाद भी आज तक वाशिंग प्लांट के अधिकारियों की ओर से पुराना किराया ही दिया जा रहा है। इसी कारण अब मंडी प्रशासन ने श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति पर कार्रवाई करने का मानस बना लिया है। मंडी अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई में वाशिंग प्लांट की कुर्की करने के साथ ही लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।

नहीं मानने पर वाशिंग प्लांट कर दिया जाएगा बंद

श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति शहर के कृषि उपज मंडी में 5 बीघा भूमि पर वर्ष 1994 में श्री ऊन विकास बोर्ड जोधपुर की ओर से ऊन व्यापार में बढ़ोत्तरी करने के उद्देश्य से ऊन वाशिंग प्लांट स्थापित किया गया था। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देशी ऊन धुलाई के लिए 1 रुपए व विदेशी ऊन धुलाई पर 2 रुपए प्रति किलो के हिसाब से लिया जाता है। इससे काश्तकारों को मंडी में ही ऊन धुलाई की सुविधा प्राप्त हो जाती है। यदि यह कार्य वह बाहर से करवाए तो काश्तकारों या व्यापारियों को 4 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चुकाना होगा। यदि सरकार के आदेश पर प्रति वर्ष 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करके दिया जाता है तो प्रति माह 35 रुपए का किराया देना होगा। जो ऊन वाशिंग लागत से कई अधिक होगा। इसके अतिरिक्त सरकार के यह आदेश मंडी की दुकानों पर लागू होते है ना की वाशिंग प्लांट पर यदि मंडी प्रशासन पर किराया देने के लिए दबाव बनाया जाता है तो वाशिंग प्लांट को बंद कर दिया जाएगा।

10 साल से पुराना किराया दे रही समिति

सरकार ने वर्ष 2007 में प्रति वर्ष 5 प्रतिशत किराया राशि वृद्धि कर वसूलने के आदेश दिए थे। लेकिन मंडी प्रशासन की ओर से नोटिस जारी करने के बावजूद सहकारी समिति वर्ष 1994 में तय की गई राशि ही किराए के रूप में दे रही है। ऐसे में 10 साल में बढ़ी हुई दर से किराया नहीं देने के एवज में समिति पर 9 लाख रुपए बकाया हो गया है। दस साल तक वाशिंग प्लांट को लेकर कार्रवाई नहीं करने पर मंडी अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी कर जब समिति के पदाधिकारियों से जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस आदेश के अधीन नहीं आने की बात कहते हुए बढ़ी हुई राशि देने से मना कर दिया। इस बारे में मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया, जहां अब जाकर मुख्यालय ने समिति से भी 5 प्रतिशत बढ़े हुए किराए के रूप में लेने के आदेश दिए है। इसी का नतीजा है कि मंडी अधिकारी भी इतने सालों बाद जाकर वाशिंग प्लांट पर कार्रवाई करने को लेकर जागे हैं।



नहीं मानने पर वाशिंग प्लांट कर दिया जाएगा बंद

श्री ऊन विकास सहकारी उद्योग लिमिटेड सहकारी समिति शहर के कृषि उपज मंडी में 5 बीघा भूमि पर वर्ष 1994 में श्री ऊन विकास बोर्ड जोधपुर की ओर से ऊन व्यापार में बढ़ोत्तरी करने के उद्देश्य से ऊन वाशिंग प्लांट स्थापित किया गया था। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि देशी ऊन धुलाई के लिए 1 रुपए व विदेशी ऊन धुलाई पर 2 रुपए प्रति किलो के हिसाब से लिया जाता है। इससे काश्तकारों को मंडी में ही ऊन धुलाई की सुविधा प्राप्त हो जाती है। यदि यह कार्य वह बाहर से करवाए तो काश्तकारों या व्यापारियों को 4 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चुकाना होगा। यदि सरकार के आदेश पर प्रति वर्ष 5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करके दिया जाता है तो प्रति माह 35 रुपए का किराया देना होगा। जो ऊन वाशिंग लागत से कई अधिक होगा। इसके अतिरिक्त सरकार के यह आदेश मंडी की दुकानों पर लागू होते है ना की वाशिंग प्लांट पर यदि मंडी प्रशासन पर किराया देने के लिए दबाव बनाया जाता है तो वाशिंग प्लांट को बंद कर दिया जाएगा।

10 साल से पुराना किराया दे रही समिति

सरकार ने वर्ष 2007 में प्रति वर्ष 5 प्रतिशत किराया राशि वृद्धि कर वसूलने के आदेश दिए थे। लेकिन मंडी प्रशासन की ओर से नोटिस जारी करने के बावजूद सहकारी समिति वर्ष 1994 में तय की गई राशि ही किराए के रूप में दे रही है। ऐसे में 10 साल में बढ़ी हुई दर से किराया नहीं देने के एवज में समिति पर 9 लाख रुपए बकाया हो गया है। दस साल तक वाशिंग प्लांट को लेकर कार्रवाई नहीं करने पर मंडी अधिकारियों ने बताया कि नोटिस जारी कर जब समिति के पदाधिकारियों से जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस आदेश के अधीन नहीं आने की बात कहते हुए बढ़ी हुई राशि देने से मना कर दिया। इस बारे में मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा गया, जहां अब जाकर मुख्यालय ने समिति से भी 5 प्रतिशत बढ़े हुए किराए के रूप में लेने के आदेश दिए है। इसी का नतीजा है कि मंडी अधिकारी भी इतने सालों बाद जाकर वाशिंग प्लांट पर कार्रवाई करने को लेकर जागे हैं।