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विनाश से बचने के लिए धर्म के मार्ग पर चलें

ब्यावर| श्री अखिल भारतीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से चल रहे संस्कार शिविर में मंगलवार को...

Dainik Bhaskar

May 23, 2018, 03:30 AM IST
विनाश से बचने के लिए धर्म के मार्ग पर चलें
ब्यावर| श्री अखिल भारतीय श्वेताम्बर स्थानकवासी जयमल जैन श्रावक संघ की ओर से चल रहे संस्कार शिविर में मंगलवार को आचार्य पार्श्वचंद्र ने कहा कि विनाश के कगार पर खड़ी मानव जाति को धर्माचरण की आवश्यकता है। धर्म ही वह शाश्वत माध्यम है जिसके बलबूते संसार का कल्याण संभव है।

इसी मूल आधारभूत तत्व के बल पर ही संसार का शुभ कल्याण टिका है। सत्य, शुभ व कल्याणकारक आचरण ही धर्म का परम लक्ष्य है। आचार्य पार्श्वचंद्र ने विवेक को धर्म का प्राण बताया। उन्होंने कहा कि धर्म मनुष्य की अदूरदर्शिता को दूर कर गगन की तरह अनंत और उदार बना देता है। धर्म वह उच्च स्तरीय सत्ता है, जिससे मनुष्य का स्वभाव तक परिवर्तन होकर अंतर को सत्य से अटूट रूप से बांध देता है। इससे हमें निरंतर शुद्धि व पवित्रता की प्राप्ति होती है। अहिंसा की कसौटी पर खरा उतरे वहीं सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि एकता, समता, सहकारिता, सहिष्णुता धर्म का लक्ष्य है और इसी लक्ष्य को सैद्धांतिक रूप से व्यवहार में भी प्रकट करना चाहिए है।

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