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जलकुंभी: पहले ग्रास काॅर्प मछली फिर टेंडर, अब डिविडिंग मशीन

ब्रिटिशकाल में अंग्रेज अफसरों के लिए बने कंपनी गार्डन में बने तालाब के अस्तित्व पर मंडराती जलकुंभी के जाल को नगर...

Danik Bhaskar | May 26, 2018, 03:30 AM IST
ब्रिटिशकाल में अंग्रेज अफसरों के लिए बने कंपनी गार्डन में बने तालाब के अस्तित्व पर मंडराती जलकुंभी के जाल को नगर परिषद पिछले 8 साल में नहीं तोड़ सकी है। इस दौरान उसने ग्रास काॅर्प मछलियां छोड़ने, टेंडर जारी करने के साथ कई तरीके आजमाए, मगर अब तक उसे कोई सफलता हाथ नहीं लगी। एक बार फिर परिषद 6 लाख रुपए खर्च कर नगर निगम अजमेर द्वारा हाल में मुंबई से मंगवाई गई डिविडिंग मशीन को तालाब में उतारने जा रही है।

फिलहाल 15 दिन के लिए हुए करार के बाद ही तय होगा कि नई मशीन अपनी क्षमता के मुताबिक अब और कितने दिन में इस तालाब से जलकुंभी हटाकर उसे अजमेर की आनासागर झील जैसा कर सकती है। ब्यावर में डिविडिंग मशीन भेजने की एवज में शुक्रवार को 5 लाख 99 हजार रुपए का डिमांड नोट जारी किया गया। इस पर सहमति के बाद शुक्रवार को नगर निगम अजमेर के नाम इस राशि का चेक नगर परिषद प्रशासन ने जारी कर दिया। ऐसे में अजमेर निगम अधिकारियों की मानें तो निगम के खाते के पैसा जमा होने के बाद इस मशीन को सोमवार के बाद ब्यावर रवाना करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

2012 में छोड़ी थी ग्रास काॅर्प मछलियां

नगर परिषद ने वर्ष 2012 में फैले जलकुंभी के जाल को तोड़ने के लिए कोलकाता से करीब डेढ़ लाख मछलियां मंगवाकर उन्हें तालाब में छोड़ा था, मगर वे यहां के वातावरण में कुछ दिन भी जीवित नहीं रह सकी और परिषद की यह योजना फेल हो गई। इसके बाद परिषद तेजा मेला हो या फिर उद्यान में अन्य आयोजन जलकुंभी हटाने के नाम पर हजारों-लाखों के टेंडर जारी करती रही, मगर उसे सफलता नहीं मिली।

जलकुंभी को हटाना होगा मुश्किल : विशेषज्ञों के मुताबिक जलकुंभी एक बार जिस तालाब में आ जाती है, उसे वहां से निकालने के लिए काफी जतन करने पड़ते हैं। ऐसे में तालाब में नौकायन करना भी मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि जलकुंभी फैलने के बाद नौकायन का ठेका लेने वाले ने यहां ठेका अवधि पूरी होने से पहले ही अपनी नावें हटा ली थी। डिविडिंग मशीन को लेकर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अजमेर नगर निगम ने भी पहले उदयपुर से मशीन मंगवाई थी। उसके बाद मुंबई से खुद की मशीन खरीदने का निर्णय लिया। इसके बाद ही आनासागर झील साफ हो सकी।

फ्लोटिंग से फैलता जाल

जलकुंभी वाटर लिली की एक प्रजाति है। उसे फैलने के लिए सिर्फ पानी और हवा की जरूरत होती है। यही कारण है कि अपना जाल फैलाकर यह तालाब के वजूद को ही खत्म करने लगी है। हालांकि कमल भी इसी प्रजाति का है, लेकिन उसकी जड़ कीचड़ में होती है जबकि इसकी जड़ पानी में ही तैरती रहती है।

कभी रोशनी से जगमगाता था तालाब के बीच भजनकुंड : जलकुंभी फैलने से तालाब की दुर्दशा की बात करें तो तालाब में यह अपना जाल पूर्ण रूप से फैला चुकी है। यह इतनी तेजी से फैली कि तालाब के वजूद को भी खतरा होने लगा है। इतना ही नहीं जलकुंभी पनपने के बाद तालाब के बीच स्थित भजनकुंड की दीवारें ढह चुकी है।

प्रतिदिन 20 टन जलकुंभी हटाने की क्षमता : निगम की ओर से इसी साल मार्च में 1.33 करोड़ की यह मशीन खरीदी गई है, जो डेढ़ से दो मीटर गहराई तक की जलीय घास को काट सकती है। इसकी रफ्तार 20 किलोमीटर प्रतिघंटा है। एक्सपर्ट के मुताबिक यह मशीन तालाब से प्रतिदिन करीब 20 टन जलकुंभी हटाने की क्षमता रखती है। इसे ऑपरेट करने के लिए निगम की ओर से ही कर्मचारी भी उपलब्ध कराए जाएंगे।