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एसडी कॉलेज : सरकार ने ली गर्ल्स हॉस्टल की सुध

सरकार ने उच्च शिक्षा में बालिकाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालयों में बने गर्ल्स हॉस्टल को...

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 03:30 AM IST
एसडी कॉलेज : सरकार ने ली गर्ल्स हॉस्टल की सुध
सरकार ने उच्च शिक्षा में बालिकाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजकीय महाविद्यालयों में बने गर्ल्स हॉस्टल को शुरू करने के कवायद शुरू कर दी है। निदेशालय ने एसडी कॉलेज के कई वर्षो से अधूरे पड़े गर्ल्स हॉस्टल की भी सूचना मांगी है।

निदेशालय के आदेशानुसार यूजीसी द्वारा निर्मित महिला छात्रावासों का कई वर्षो से संचालन नहीं हो रहा है। जिसे राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी को देखते हुए छात्रावासों को संचालन करने की कार्यवाही करने सहित छात्रावासों की वर्तमान स्थिति की सूचना तैयार कर सोमवार तक विभाग को भेजनी है। इस सूचना के बाद यूजीसी की ओर से बजट भेज कर जिन महाविद्यालयों में हॉस्टल का कार्य शेष है। उनमें कार्य करवा कर हॉस्टल को शुरू करवाया जाएगा।

यह देनी है सूचना

निदेशालय ने गर्ल्स हॉस्टल को संचालित करने के लिए महाविद्यालयों से जो सूचना मांगी है। उसमें मुख्य रूप से छात्रावास भवनों के निर्माण (वर्षो) एवं उनके वर्ष अनुसार उपयोग का पूर्ण विवरण, हॉस्टल की पूर्ण क्षमता का उपयोग किस प्रकार से किया जा रहा है, उसकी वर्ष अनुसार पूर्ण जानकारी देनी है। इसके अतिरिक्त निर्मित छात्रावास भवन का समय पर भौतिक सत्यापन नहीं करने का कारण व छात्रावासों के संचालन तथा इसके लिए फण्ड की व्यवस्था किस प्रकार की जा रही है आदि जानकारी सोमवार तक निदेशालय को भेजनी है।

इनका कहना है


कई वर्षो से बंद पड़ा है गर्ल्स छात्रावास

उपखण्ड के सबसे बड़े सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में करीब सात वर्षो गर्ल्स हॉस्टल का आधा अधूरा निर्माण हो रखा है। पूर्ण व्यवस्था नहीं होने के कारण वर्तमान समय तक गर्ल्स हॉस्टल शुरू नहीं हो सका है। कॉलेज अधिकारियों ने बताया कि गर्ल्स हॉस्टल में छात्राओं के लिए 16 कमरों का निर्माण यूजीसी से मिले 30 लाख रुपए के बजट बनवाया गया था। लेकिन बजट खत्म होने के कारण छात्रावास का पूर्ण निर्माण नहीं होने के कारण यह शुरू नहीं हाे सका है। ऐसे में छात्रावास में बने कमरों में कॉलेज के कर्मचारियों को हॉस्टल की देखरेख के लिए रखा हुआ है। यदि काेई छात्रा बाहर से आकर सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में पढ़ना भी चाहे, तो उसे किराए का कमरा लेकर अध्ययन करना पड़ता है। छात्रावास की सुविधा नहीं हाेने के कारण ही उपखण्ड की कई छात्राएं या तो शहर से बाहर जाकर महाविद्यालय में प्रवेश लेती है या फिर स्कूल तक शिक्षा ग्रहण कर घर में बैठ जाती है।

98 लाख रुपए का एस्टीमेट

कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि निदेशालय से मिले आदेश के बाद सार्वजनिक निर्माण की ओर से गर्ल्स हॉस्टल का सर्वे कर 98 लाख रुपए का तकमीना तैयार किया है। जिसमें हॉस्टल के दरवाजे लगाना, फ्लोरिंग कार्य, गार्डन विकसित करना सहित अन्य कार्य होने है। जहां कॉलेज प्रशासन पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के मुताबिक 98 लाख रुपए के बजट से हॉस्टल का कार्य करवाने की जानकारी भेजगा। ऐसे में कॉलेज की ओर से भेजी गई बजट की रिपोर्ट के बाद यदि समय पर बजट आंवटन होता है तो कॉलेज की छात्राओं को राहत प्राप्त होगी।

इन महाविद्यालयों से भी मांगी सूचना

आयुक्तालय ने ब्यावर के एसडी कॉलेज सहित राजकीय महाविद्यालय अजमेर, किशनगढ, डूंगरपुर, मेडतासिटी, पाली, नागौर, बीकानेर, भरतपुर, दौसा, प्रतापगढ, राजगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सिरोही, सूरतगढ़, टोंक, चित्तौडगढ, राजकीय कन्या महाविद्यालय गंगानगर, कन्या महाविद्यालय बांरा, कन्या महाविद्यालय कोटा, कन्या महाविद्यालय अलवर, कन्या महाविद्यालय दौसा व कन्या महाविद्यालय उदयपुर के गर्ल्स हॉस्टल के गर्ल्स हॉस्टल को संचालन करने सहित हॉस्टल की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मांगी है।

महाविद्यालय में गत सात वर्षो में यूं बड़ा छात्राओं का ग्राफ

सत्र छात्र छात्राएं

2011-12 2398 876

2012-13 2530 1040

2013-14 2520 1179

2014-15 2452 1308

2015-16 2401 1406

2016-17 2305 1526

2017-18 2226 1632

2018-19 2768 1945

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