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एकेएच के पालना गृह में गूंजी पहली किलकारी

राजकीय अमृतकौर अस्पताल के मदर चाइल्ड विंग में बने पालना गृह में एक साल बाद आखिर पहली किलकारी गूंजी। रविवार रात...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 28, 2018, 03:30 AM IST

एकेएच के पालना गृह में गूंजी पहली किलकारी
राजकीय अमृतकौर अस्पताल के मदर चाइल्ड विंग में बने पालना गृह में एक साल बाद आखिर पहली किलकारी गूंजी। रविवार रात करीब 9 बजकर 10 मिनट पर किसी ने एक थैले में करीब दो दिन की एक मासूम बालिका को पालने में छोड़ दिया। करीब 5 मिनट बाद एसएनसीयू वार्ड में लगा सायरन बजने पर स्टाफ को इसकी जानकारी हुई। जिस पर स्टाफ ने नवजात बालिका को तुरंत पजेशन में लिया और उसका उपचार शुरू करवा डॉक्टर को कॉल भिजवा दी। सूचना मिलने पर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एमएस चांदावत तुरंत मौके पर पहुंचे और नवजात की जांच शुरू कर उसका उपचार शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार रविवार रात किसी ने अज्ञात कारणों से एक नवजात बालिका को राजकीय अमृतकौर अस्पताल के आश्रय पालना गृह में छोड़ दिया। सायरन बजते ही लेबर रूम से नर्सिंग स्टाफ नीना जेस्मीन, एसएनसीयू का स्टाफ दीपक वैष्णव और यशोदा वीना टांक तुरंत पालना गृह पहुंचे। उन्होंने पालने की जांच की तो देखा कि पालने में एक नवजात है। जिसे तुरंत पजेशन में लिया गया और वार्ड में ले जाकर बच्ची की साफ सफाई कर जांच की। पालने में मिला नवजात कन्या है और करीब 1 से 2 दिन पूर्व प्रीमैच्योर प्रसव हुआ है। बच्ची की नाल पर बंधे धागे से अंदाजा लगाया जा रहा है कि बच्ची का घर पर ही प्रसव हुआ है। जांच के बाद डॉ. चांदावत ने बताया कि बालिका स्वस्थ है और करीब डेढ किलो वजन है। हालांकि नवजात को बुखार की आशंका है। उसका उपचार भी शुरू कर दिया गया।

इनका कहना है

ये अच्छी बात है कि किसी ने नवजात बच्ची को झाडियों या सड़क किनारे फैंकने से बेहतर उसे पालने में छोड़ दिया। जिससे ना सिर्फ उसकी जान बच सकेगी बल्कि उसे समय पर उपचार भी मिल सकेगा। कोई भी नवजात को झाडियों में ना फैंके बल्कि पालने में छोड़ जाए।” -डॉ. देवेंद्र कुमार अग्रवाल, स्टेट एडवाइजर राजस्थान सरकार

मदर चाइल्ड विंग में बने पालने में मिली पहली नवजात बालिका, सायरन बजने पर हुआ खुलासा

ब्यावर. राजकीय अमृतकौर अस्पताल के मदर चाइल्ड विंग में आए पहले शिशु के साथ स्टाफ।

‘शुभलक्ष्मी’ की सेवा में जुटा स्टाफ

रविवार रात को जैसे ही पालने में नवजात बालिका के आने की सूचना मिली एसएनसीयू में नर्सिंग स्टॉफ के साथ अन्य स्टाफ भी पहुंच गया। उन्होंने बच्ची को अपने हाथों में लिया और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ दीपक वैष्णव और यशोदा वीना टांक ने बच्ची का नाम शुभलक्ष्मी रखा। गौरतलब है कि सड़क किनारे और झाडियों में नवजात को फैंके जाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के मकसद से याेगगुरु और राज्य सरकार के स्टेट एडवाइजर डॉ. देवेंद्र कुमार अग्रवाल की निर्देशन में गत वर्ष ब्यावर में आश्रय पालना गृह का शुभारंभ किया गया था। जिसके करीब एक साल बाद रविवार को पालने में पहली बालिका मिली।

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Web Title: एकेएच के पालना गृह में गूंजी पहली किलकारी
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