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ब्यावर में ही मिलेगी टीबी मरीजों को सीबी नॉट से जांच की सुविधा

Dainik Bhaskar

May 22, 2018, 03:35 AM IST

Beawar News - जिला क्षय रोग निवारण केंद्र ब्यावर में जल्द ही मरीजों को सीबी नॉट मशीन से जांच की सुविधा मिलेगी। सीबी नॉट मशीन...

ब्यावर में ही मिलेगी टीबी मरीजों को सीबी नॉट से जांच की सुविधा
जिला क्षय रोग निवारण केंद्र ब्यावर में जल्द ही मरीजों को सीबी नॉट मशीन से जांच की सुविधा मिलेगी। सीबी नॉट मशीन लगाने के लिए जिला क्षय रोग निवारण केंद्र में बनने वाली लैब के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सार्वजनिक निर्माण विभाग के अकाउंट में 1 लाख से अधिक की राशि जमा करवा दी गई है। सीबी नॉट लैब के लिए कार्य शुरू कर दिया जाएगा। एमडीआर(मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी से पीड़ित मरीजों को जांच के लिए अजमेर मेडिकल कॉलेज जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

एमडीआर टीबी की जांच अब जल्द ही ब्यावर स्थित जिला क्षय निवारण केंद्र में ही हो सकेगी। अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला तो जिला क्षय रोग निवारण केंद्र में भी मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना के तहत निशुल्क जांच हो सकेगी। इसके साथ ही मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए भी एक एक माह तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे मरीज का जल्दी ट्रीटमेंट भी शुरू हो सकेगा।

मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट टीबी ट्यूबर क्लोसिस की सबसे खतरनाक स्टेज है, मतलब टीबी का बिगड़ा हुआ रूप एमडीआर टीबी है। इसके बैक्टीरिया पर टीबी की सामान्य दवाएं नाकाम होने लगती है। आम टीबी कुपोषित या कमजोर शरीर वाले को अपनी गिरफ्त में लेती है जबकि एमडीआर टीबी में हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है। टीबी के मरीजों में सबसे ज्यादा मौतें एमडीआर टीबी के मरीजों की हो रही है। एमडीआर टीआर टीबी से ग्रसित होने के बाद मरीजों को कुछ खास दवाओं को मिलाकर लेना पड़ता है। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति तेजी से यह संक्रमण फैला सकता है। इसलिए यह मर्ज काफी घातक है। हालांकि एमडीआर टीबी का इलाज संभव है बशर्ते इलाज पूरा लिया जाए।

हर साल 1 हजार से ज्यादा मरीज आ रहे सामने

ब्यावर उपखंड और आस पास के क्षेत्रों में हर साल 1 हजार से 1 हजार 500 से ज्यादा मरीज टीबी की चपेट में आ रहे हैं। इनमें से जो मरीज टीबी का पूरा इलाज नहीं लेते वे एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इस कारण इलाज बेहद सख्त हो जाता है। डिस्ट्रिक ट्यूबर क्लोसिस सेंटर पर एमडीआर टीबी के 107 से अधिक पेशेंट है। जिनमें से 24 डिफॉल्टर हैं जिन्होंने बीच में इलाज अधूरा छोड़ दिया।

ये होना है कार्य : 1 लाख 50 हजार के बजट में लैब का जीर्णोद्वार करवाया जाएगा। जिसके बाद लैब में एयर कंडीशनर लगाया जाएगा, मशीन का इंस्टॉलेशन किया जाएगा और सीबी नॉट के लिए प्लेटफाॅर्म तैयार किया जाएगा।

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