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सन 2015 के बाद तहसीलदार के हस्ताक्षर से बना जाति प्रमाण अमान्य

काॅलेजों में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के लिए आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 अक्टूबर 2015 के बाद तहसीलदार...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 03:35 AM IST
सन 2015 के बाद तहसीलदार के हस्ताक्षर से बना जाति प्रमाण अमान्य
काॅलेजों में प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के लिए आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 अक्टूबर 2015 के बाद तहसीलदार द्वारा बनाया गया जाति प्रमाण पत्र मान्य नहीं होगा। यह जाति प्रमाण पत्र तभी मान्य होगा जब ये निर्धारित तिथि से पहले का बना हो। नए फैसले के अनुसार अब नया जाति प्रमाण पत्र बनाने का अधिकार एसडीएम के पास है। कॉलेजों में एसडीएम का बनाया जाति प्रमाणपत्र ही मान्य होगा। विशेष परिस्थितियों में जिला कलेक्टर द्वारा अधिकृत एसीएम के बनाए गए जाति प्रमाण-पत्र भी मान्य होंगे।

राजकीय काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सहदेवदान बारेठ ने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से जारी आदेश की प्रति कॉलेज आयुक्तालय से मिल गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 18-19 के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए समक्ष अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को ही स्वीकार किया जाए। राज्य सरकार ने एससी, एसटी एवं ओबीसी के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के 9 सितंबर 2015 और 20 अक्टूबर 2015 के निर्देशों की पालना की बात कही है। इस तिथि के बाद तहसीलदार के हस्ताक्षरों से जारी जाति प्रमाण पत्र मान्य नहीं होंगे। अधिकृत एसडीएम या सहायक कलेक्टर अधिकृत हैं।

जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने पर सामान्य कैटेगरी में गणना

प्रवेश नियमों के अनुसार अभ्यर्थी अधिकृत प्रमाण-पत्र पेश नहीं करता है तो उसके जाति प्रमाण पत्र को निरस्त मान लिया जाएगा और उन्हें सामान्य श्रेणी में शामिल कर लिया जाएगा। ऐसे अभ्यर्थी आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाएंगे। फिलहाल आवेदनों की जांच का काम चल रहा है। इस दौरान कुछ आवेदन तहसीलदार के जारी किए हुए मिले हैं। हालांकि ऐसे अभ्यर्थियों को उन्हें पहले फोन से सूचित करने का प्रयास किया जाएगा। जिससे अभ्यर्थी अपना दूसरा प्रमाण पत्र बनवा सके। इसके लिए उन्हें फोन पर सूचना देकर सूचित किया जाएगा।

आवेदन में गलती से लेकर कटऑफ तक की सूचना मोबाइल पर मिलेगी : राजकीय काॅलेज में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 जून तक चलेगी। आवेदन के दौरान विद्यार्थी अपना मोबाइल नंबर सही भरें, क्योंकि इसी नंबर पर दाखिले संबंधी तमाम सूचनाएं भेजी जाएंगी। ऑनलाइन आवेदन के बाद कॉलेज प्रशासन जांच करता है। जांच के दौरान आवेदन में त्रुटि होने पर मोबाइल पर सूचना देकर गलती सुधारी जाती है।

जिनके 10वीं-12वीं में 75 फीसदी अंक, उनकी पूरी फीस माफ : जानकारी के अनुसार कॉलेज आयुक्तालय के आदेश के अनुसार 10वीं व 12वीं की कक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की फीस माफ की जाएगी। बशर्ते ऐसे विद्याके पिता की आय 3.50 लाख से लेकर 5 लाख रुपए सालाना होनी चाहिए।

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