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विधायक ने अस्पताल पहुंच कर जताया विरोध, कार्रवाई की मांग

राजकीय अमृतकौर की मदर चाइल्ड विंग में कमीशन की दवाओं का मामला उजागर हुआ है। शिकायत मिलने पर विधायक शंकर सिंह रावत...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 03:40 AM IST

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    राजकीय अमृतकौर की मदर चाइल्ड विंग में कमीशन की दवाओं का मामला उजागर हुआ है। शिकायत मिलने पर विधायक शंकर सिंह रावत राजकीय अमृतकौर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कमीशन की दवाएं लिखे जाने पर विरोध जताया। मामले की जानकारी मिलने पर कार्यवाहक पीएमओ डॉ. टीसी गगरानी अस्पताल पहुंचे। जहां विधायक ने उन्हें कमीशन की दवाएं लिखने के मामले में आड़े हाथों लिया। मामले की जानकारी मिलने पर एकेएच के नियमित पीएमओ डॉ. एमके जैन मौके पर पहुंचे। विधायक रावत ने उन्हें कमीशन की दवा लिखने के आरोपी डॉ. टीसी गगरानी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान एमआरएस सदस्य रामवतार लाटा, वीरेंद्र सिंह रावत, गोविंद गोविल, विकास सांचौरा समेत अन्य मौजूद थे।

    जानकारी के अनुसार एकेएच की मदर चाइल्ड विंग में प्रसूताओं को कमीशन की दवा लिखे जाने की शिकायत मिलने पर एमआरएस सदस्य रामावतार लाटा अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने देखा कि वार्ड में एक दो नहीं बल्कि करीब 9 मरीजों के एक जैसी दवाएं लिखी हुई थी। उन्हाेंने बताया कि निशुल्क दवा योजना के तहत ये दवाएं एकेएच में उपलब्ध है लेकिन कमीशन के चक्कर में डॉक्टर द्वारा कागज के टूकडे पर बाहर की दवाएं लिखी जा रही है। पूछताछ करने पर सामने आया कि जो दवा निशुल्क दवा योजना के तहत निशुल्क है अौर मार्केट में महज 30 रुपए में उपलब्ध है लेकिन कमीशन के चक्कर में वही दवा मरीजों को 178 रुपए में खरीदनी पड़ रही है। इसके साथ ही मरीजों को 360 रुपए के केप्सूल भी लिखे जा रहे हैं। शिकायत मिलने पर विघायक शंकर सिंह रावत मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। मरीजों के परिजनों दुजोडिया निवासी नाजमा, पुरानी ब्यावर निवासी सुमन, धोलिया निवासी पूजा और नया बाडिया निवासी निरमा के परिजनों ने बताया कि वार्ड में राउंड के दौरान डॉक्टर टीसी गगरानी ने उन्हें सादी कागज की पर्ची पर दवा लिखकर दी। जिस पर विधायक रावत ने तुरंत आरोपी डॉक्टर गायनी स्पेशलिस्ट डॉ. टीसी गगरानी को कॉल किया और अस्पताल बुलाया। विधायक रावत ने गगरानी को अाड़े हाथों लेते हुए जमकर लताड पिलाई और मरीजों को कमीशन की दवा लिखे जाने पर सख्त कार्यवाही की चेतावनी दी। इधर मामले की जानकारी मिलने पर नियमित पीएमओ डॉ. एमके जैन भी अस्पताल पहुंचे। जिनके समक्ष विरोध जताते हुए विधायक रावत ने सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कार्रवाई से अवगत करवाने के निर्देश दिए।

    कार्यवाहक पीएमओ हैं

    एमआरएस सदस्य रामावतार लाटा ने बताया कि रविवार को नियमित पीएमओ डॉ. एमके जैन का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण डॉ. टीसी गगरानी के पास ही पीएमओ का चार्ज है। लाटा ने रोष जताते हुए कहा कि जब खुद कार्यवाहक पीएमओ ही इस तरह कमीशन की दवाओं के खेल से जुडे हैं तो दुसरे डॉक्टरों का तो कहना ही क्या।

    टर्मिनेट हो सकते हो

    विधायक रावत ने मामले की जानकारी के बाद अस्पताल पहुंच कर मरीजों और उनके परिजनों ने बात की तथा उनसे जानकारी ली। परिजनों से बात करने के दौरान एक अन्य मरीज भी वही दवा लेकर वार्ड में पहुंचा तो विधायक रावत ने डॉ. टीसी गगरानी को बुलाया और उन्हें कमीशन की दवा लिखने को लेकर लताड़ पिलाई। उन्होंने डॉ. गगरानी को चेतावनी दी कि अगर ये ही स्थिति रही तो सरकार उन्हें ना सिर्फ सस्पेंड कर सकती है बल्कि टर्मीनेट भी कर सकती है।

    मरीजों को मिले राहत

    भाजपा की सरकार आम जनता को राहत देने के लिए लगातार प्रय|शील है। डॉ. गगरानी द्वारा कमीशन की दवाएं लिखे जाने की शिकायत मिली। इस संबंध में मरीजों से बात की गई तो शिकायत सही मिली। पीएमओ को बुलवा कर शिकायत दी गई है और कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।” -शंकर सिंह रावत, विधायक ब्यावर

    प्रसूताओं को लिखी जा रही कमीशन की दवाओं पर हंगामा

    ब्यावर. मरीजों से दवा लेकर देखते विधायक रावत एवं अन्य।

    सख्त कार्रवाई होगी

    मामले की जानकारी मिलने पर अस्पताल आया। विधायक साहब द्वारा की गई शिकायत की प्रारंभिक जांच में कमीशन की दवाएं लिखे जाने की पुष्टि हुई है। मामले को लेकर सोमवार को डॉ. गगरानी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा अौर जेडी के साथ ही विधायक रावत को कार्रवाई से अवगत करवाया जाएगा। नोटिस का जवाब मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” -डॉ. एमके जैन, पीएमओ, एकेएच ब्यावर

    विरोध के बाद सरकारी पर्ची में लिखी दवा

    मामले के सामने आने और एमआरएस सदस्य रामावतार लाटा के विरोध जताने के बाद डॉ. टीसी गगरानी ने उन्हें बताया कि मरीजों के हित को देखते हुए उन्होंने बाहर से दवा मंगवाई थी। उन्होंने बताया कि मरीज के निवेदन के बाद ही उन्होंने बाहर की दवा लिखी जो जरूरी थी। वहीं विरोध बढ़ता देख कर उन्होंने मरीजों को अस्पताल की सरकारी पर्ची पर निशुल्क दवा लिख दी। जो मरीजों को निशुल्क मिल गई।

    मरीजों के स्वास्थ्य के लिए लिखी

    प्रसव के बाद कुछ प्रसूता में खून की कमी की शिकायत रहती है। आवश्यक होने के कारण ही ये दवा लिखी गई। मरीजों के हित के लिए ही आवश्यक दवा लिखी है। सभी मरीजों को बाहर की दवा लिखने का आरोप गलत है।” -डॉ. टीसी गगरानी, कार्यवाहक पीएमओ

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