‘राष्ट्र के उत्थान के लिए समानता का भाव जरूरी’

Beawar News - श्री सनातन धर्म सत्संग सभा की ओर से स्थानीय गीता भवन में आयोजित कराए जा रहे प्रवचनों के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं...

Sep 14, 2019, 07:26 AM IST
श्री सनातन धर्म सत्संग सभा की ओर से स्थानीय गीता भवन में आयोजित कराए जा रहे प्रवचनों के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत धर्मानंद महाराज ने कहा कि ‘ ऊंच-नीच, जाति-पांति, छोटा बड़ा की भावना समाज व राष्ट्र के लिए घातक है।

उन्होंने कहा कि ‘समाज में समरसता व समानता का भाव होना जरूरी है, पुराने समय में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और क्षुद्र चार वर्ण होते थे चारों वर्ण एक दूसरे के पूरक होते थे और अपना-अपना कार्य करते थे। लेकिन मध्यकाल व वर्तमान में समाज में जाति व ऊंच-नीच का भाव आ गया है जो अनुचित है और राष्ट्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि कोई भी ग्रंथ या सद् साहित्य ऊंच नीच, जाति व छोटे बड़े का समर्थन नहीं करता है। कथा के जुड़े सुनील जैथल्या ने बताया कि व्यक्ति को स्वयं का दोष कभी नहीं दिखता है यह भावना अनुचित है। किसी में दोष व बुराई नहीं देखकर खुद को सुधारना ही श्रेष्ठ प्रक्रिया है। ‘हम सुधरेंगे, जग सुधरेगा’ की भावना समाज के लिए श्रेष्ठ है। भगवान को हम सखा, पुत्र, भाई, सर्वस्व मानकर भक्ति करें तो मन को सुकुन मिलता है और साधना आसान हो जाती है। हमारा एश्वर्य, धन-संपदा, सुख-दुख सब भगवान का दिया है और हम जो भी करें प्रभु के लिए करें ऐसी भावना ही समर्पण भावना है जो प्रभु के नजदीक ले जाता है।

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