एक करोड़ रुपए की कमाई करने वाली कृषि उपज मंडी को कर्मचारियों की दरकार

Beawar News - हर वर्ष करोड़ों का राजस्व अर्जित करने वाली शहर की कृषि उपज मंडी कर्मचारियों की कमी के कारण अन्य मंडियों से पिछड़ती...

Nov 10, 2019, 07:16 AM IST
हर वर्ष करोड़ों का राजस्व अर्जित करने वाली शहर की कृषि उपज मंडी कर्मचारियों की कमी के कारण अन्य मंडियों से पिछड़ती जा रही है। मंडी एक तिहाई स्टाफ के भरोसे चल रही है, जिनमें तीन संविदा कर्मी कर्मचारी शामिल है। मंडी की सुरक्षा के लिए मात्र तीन चौकीदार हैं जबकि स्वीकृत पद दस हैं। चौकीदार कम होने से कई बार मंडी में चोरियां हो चुकी हैं। मंडी समिति कार्यालय में नियमन व आवंटन जैसी विशिष्ट शाखाओं का कार्य संविदा पर कार्यरत कार्मिकों के कंधों पर है।

मंडी सचिव पर काम का बोझ होने के कारण मंडी की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही है। इन तीन संविदाकर्मियों पर समस्त शाखाओं के कार्यों के पर्यवेक्षण, नियम, नीलामी, अनुज्ञापत्र, स्टोर शाखाओं, राजीव गांधी कृषक साथी योजना, कैश, चेकपोस्ट निगरानी, नीलामी, विक्रय पर्ची, संस्थापन शाखाओं की जिम्मेदारी सहित न्यायालय, सूचना का अधिकार, डिस्पैच, रिसीव आदि का कार्यभार है।

स्टाफ पर एक नज़र : कृषि उपज मंडी समिति में कुल 49 पद स्वीकृत है, जिनमें से मात्र 14 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। कनिष्ठ लिपिक के 15 पदों में से मात्र 2 ही कार्यरत है तथा 13 रिक्त चल रहे है। इन दो कार्यरत कनिष्ठ लिपिक के पास मंडी का अतिरिक्त कार्यभार है। इनमें से एक कनिष्ठ लिपिक उपखंड कार्यालय के साथ ही मंडी का कार्य देख रहा है, वहीं दूसरे लिपिक के पास बीएलओ का अतिरिक्त कार्यभार है। जिस कारण दोनों ही कर्मचारी सप्ताह में दो या तीन दिन आकर कार्यालय के कार्य को निपटाते है। ऐसे में वर्तमान समय पर सचिव, दो कनिष्ठ लिपिक सहित तीन संविदा कर्मी मंडी के समस्त कार्य कर रहे है। इससे मंडी के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे है। मंडी में लम्बे समय से एक सहायक सचिव,दो पर्यवेक्षक, दो वरिष्ठ लिपिक, 13 कनिष्ठ लिपिक, एक वाहन चालक, एक जमादार, एक चपरासी, चौकीदार के 7, जलवाहक का एक, सफाई कर्ता के 3 सहित इलेक्ट्रिशियन, पंप ड्राइवर व बागवान के पद रिक्त चल रहे है।

अतिवृष्टी से भी मंडी की आय हो गई प्रभावित : वर्तमान में कई स्थिति ऐसी है, जिससे मंडी के राजस्व में कमी आई है। सबसे बड़ा कारण इस बार हुई अतिवृष्टि के कारण बीते साल की तुलना में कई जींसों की आवक आधी रह गई है। इसमें मुख्य रूप से कॉटन व मूंग शामिल है। गत वर्ष कृषि उपज मंडी में कॉटन की आवक 11 हजार क्विंटल थी तो इस बार अब तक महज 5 हजार क्विंटल ही हुई है, इसी तरह मूंग गत वर्ष 12 हजार क्विंटल आई थी, जबकि इस बार महज 4 हजार क्विंटल की आवक हुई है। इसके अतिरिक्त मंडी को गत वर्ष तक फल सब्जी मंडी में आने वाली सब्जी व फल पर मंडी को 1.5 प्रतिशत मंडी शुल्क प्राप्त होता था, मंडी शुल्क माफ होने से राजस्व में कमी आ गई है।

इनका कहना है...


हजारों की संख्या में जिंस की होती है आवक

शहर की कृषि उपज मंडी उपखंड की सबसे बड़ी मंडी होने के कारण मंडी में निकटवर्ती ग्राम के अलावा पाली, जोधपुर, राजसंमद, भीलवाड़ा आदि जिलो के ग्रामीण क्षेत्रों के काश्तकार प्रतिदिन हजारों बोरी जिंस बेचान के लिए लाते है। सीजन के समय में यह आंकड़ा आठ से 10 हजार बोरी प्रतिदिन हो जाता है। इससे कर्मचारियों पर कामकाज का विशेष दबाव रहता है।

साल दर साल लक्ष्य पर एक नजर...

वर्ष लक्ष्य प्राप्त

2012-13 1 करोड़ 60 लाख 1 करोड़ 71 लाख 24 हजार

2013-14 1 करोड़ 60 लाख 1 करोड़ 48 लाख 36 हजार

2014-15 1 करोड़ 50 लाख 1 करोड़ 35 लाख 21 हजार

2015-16 1 करोड़ 22 लाख 15 हजार 1 करोड़ 05 लाख 75 हजार

2016-17 1 करोड़ 03लाख 50 हजार 1 करोड़ 36 लाख 10 हजार

2017-18 1 करोड़ 39 लाख 73 हजार 1 करोड़ 60 लाख 56 हजार

2018-19 1 करोड़ 76 लाख 62 हजार 1 करोड़ 76 लाख 62 हजार

2019-20 2 करोड़ 10 लाख 75 लाख रुपए(अक्टूबर तक)

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