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अनदेखी का शिकार हो रहा अमृतकौर अस्पताल

एक वर्ष पहले
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राजकीय अमृतकौर अस्पताल इन दिनों अनदेखी का शिकार हो रहा है। राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी और परिसीमन के बाद दो जिलों के बीच बंटे अस्पताल की दशा लगातार बिगड़ती जा रही है। लंबे अर्से से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में नर्सिंग कर्मियों की भी लगातार कटौती की जा रही है।

जानकारी के अनुसार अस्पताल में नर्सिंगकर्मियाें के 128 स्वीकृत पदों के विपरीत महज 78 नर्सिंग कर्मी ही कार्य कर रहे हैं। वहीं पिछले दिनों में ब्यावर के एकेएच से 15 और नर्सिंग कर्मियों का अन्य स्थान पर तबादला कर दिया गया। वहीं ब्यावर में सिर्फ 1 स्टाफ को लगाया गया जिन्होंने भी ब्यावर में अभी तक ज्वाइन नहीं किया। ऐसे में अस्पताल के कई वार्ड को बंद करने की नौबत आ गई है। स्थिति और ज्यादा विकट इसलिए हो गई है क्योंकि कुछ अर्से पूर्व तक एकेएच में जेडी के निर्देश से 12 नर्सिंग कर्मियों को निशुल्क सेवा देने के लिए लगाया गया था। इन नर्सिंग कर्मियों को उनके कार्य के बदले अस्पताल प्रबंधन द्वारा अनुभव का पत्र देना था। लेकिन पिछले दिनों निदेशालय द्वारा मिले निर्देशों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने किसी भी कार्मिक को अनुभव प्रमाण पत्र देने में असमर्थता जता दी। जिस कारण यहां निशुल्क कार्य कर रहे नर्सिंग कर्मियों ने भी यहां सेवाएं देने में असमर्थता जता दी। ऐसे में एकेएच की व्यवस्थाएं खुद वेंटीलेटर पर है।

306 बेड स्वीकृत, मरीजों का भार ज्यादा : हालांकि कागजों में ब्यावर के एकेएच में 306 बेड स्वीकृत हैं। लेकिन चार जिलों के मरीजों के यहां आने के कारण हर समय यहां करीब 360 से 400 मरीज एडमिट रहते हैं। कुछ वार्ड अभी तक स्वीकृति मिलने का इंतजार कर रहे हैं तो वहीं कुछ में मरीजों की क्षमता में वृद्धि की हो गई है। वर्तमान में एकेएच में सिर्फ 63 नर्सिंग कर्मी ही कार्यरत है जिसमें से भी कुछ का रिटायरमेंट नजदीक होने के कारण उन्हें वार्ड में नहीं लगाया जा सकता। इनमें से डे ऑफ, नाइट ऑफ, अन्य ड्यूटियां, आउटडोर में ड्यूटियां करने के बाद वार्ड के लिए महज 40 नर्सिंग कर्मी ही बचते हैं।

नर्सिंग अधीक्षक तक को करनी पड़ रही वार्ड में ड्यूटी : अस्पताल में नर्सिंग कर्मियों की कमी के चलते कई बार वार्ड में स्थिति बिगड़ जाती है। दो दिनों पूर्व एकेएच से एक साथ तीन नर्सिंग कर्मी अन्य स्थानों पर स्थानांतरण होने के कारण यहां से रिलीव हो गए। ऐसे में वार्ड में व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी। स्थिति बिगड़ते देख कर दो दिन से नर्सिंग अधीक्षक सीपी शर्मा को खुद को वार्ड में ड्यूटी करनी पड़ रही है। ऐसे में अस्पताल का मैनेजमेंट पटरी से उतर रहा है।

हर नर्सिंग कर्मी पर 30 मरीजों की जिम्मेदारी...
एकेएच में मरीजों के दबाव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्थाई पलंग की व्यवस्था की जाती है। औसतन एकेएच में करीब 400 मरीज भर्ती रहते हैं। नर्सिंग कर्मियों की कमी के कारण वार्ड में औसत एक समय में एक ही नर्सिंग कर्मी ड्यूटी पर रहता है और वार्ड में करीब 30 मरीज भर्ती रहते हैं। ड्यूटी के दौरान एक नर्सिंगकर्मी पर 30 मरीजों का भार रहता है। इतना ही नहीं 3 राष्ट्रीय राजमार्ग अौर चार स्टेट हाइवे होने के कारण अक्सर अस्पताल में मास कैजुअल्टी आती रहती है। ऐसे में स्थिति बिगड़ जाती है और आए दिन अस्पताल में हंगामे के मामले सामने आते रहते हैं।

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