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बिना मास्क क्षेत्रों में सर्वे कर रही आशा कार्यकर्ता

एक वर्ष पहले
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देश भर में कोरोना काे लेकर दहशत के बीच चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर घर सर्वे करवाया जा रहा है। सर्वे करने के लिए नर्सिंग विद्यार्थियों के साथ ही आशा कार्यकर्ताओं को भी लगाया गया है। लेकिन प्रतिदिन 10 से ज्यादा घरों में सर्वे करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को विभाग द्वारा मास्क तक उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। एक अाेर जहां कोराेना को लेकर घर घर सर्वे कर आशा कार्यकर्ता लोगों को बीमारी से बचने के लिए सलाह दे रही हैं तो वहीं दूसरी ओर खुद आशा कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना हुआ है। घर घर सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने वाली आशा कार्यकर्ताओं को विभाग द्वारा ना तो मास्क उपलब्ध करवाए जा रहे हैं ना ही किसी बीमारी से सुरक्षा के लिए वैक्सीनेशन हुआ है। ऐसे में इन कार्यकर्ताओं को ही संक्रमण होने का सबसे ज्यादा खतरा है।

दो साल पहले स्वाइन फ्लू के समय मिले थे मास्क

इस संबंध में जानकारी चाहने पर आशा कार्यकर्ताओं ने बताया कि 2018 में स्वाइन फ्लू के प्रकोप के दौरान अस्पताल से उनको मास्क उपलब्ध करवाया गया। सिंगल यूज वाले मास्क एक सप्ताह भी नहीं चल सका अौर उसके बाद आज तक कार्यकर्ताओं को मास्क उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं। एक आशा कार्यकर्ता ने बताया कि मास्क मांगने पर खुद मार्केट से मास्क खरीदने के लिए कहा जाता है।

मार्केट में मास्क का टोटा

गौरतलब है कि गत दिनों से कोरोना के संक्रमण के चलते शहर में मास्क की कालाबाजारी चल रही है। आम दिनों में बाजार में सिंगल यूज वाला मास्क 3 से 5 रुपए में मिल जाता है तो व हीं अब यही मास्क 20 रुपए तक मिल रहा है। स्थिति यह है बाजार में सैनेटाइजर तक नहीं मिल पा रहा है।

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