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टूटी सीटें, बार बार खुलती खिड़कियां, उसमें से अाती सर्द हवाओं का सामना कर रहे हैं रोडवेज यात्री
यदि आप रोडवेज की बस में सर्दी में सफर करने का मानस बना रहे हैं और यदि खिड़की के पास वाली सीट मिली है तो फिर आप सर्द हवाओं के थपेड़े सहने को भी तैयार रहिए, क्योंकि रोडवेज की अधिकांश बसों के खिड़की में कांच नहीं हैं तो किसी के लॉक या तो टूटे हैं या फिर ढीले हैं। ऐसे में यात्री को बार-बार खुलते कांच को बंद करने की मशक्कत करनी पड़ेगी। इसके अलावा टूटी सीटें भी परेशानी को और बढ़ाएंगी।
ब्यावर आगार में अनुबंधित बसों का बुरा हाल है। आगार प्रबंधन को खिड़की के शीशे नहीं होने के साथ लॉक के बार-बार खुलने या टूटे होने के साथ टूटी कुर्सियों की शिकायत रोजाना मिल रही हैं। इस पर गंभीरता जताते हुए आगार प्रबंधन ने अब मुख्यालय को इन शिकायतों से अवगत कराते हुए सर्दी में यात्रियों को इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। यात्री मुरारीलाल शर्मा ने बताया कि वह जयपुर सिंधी कैंप से ब्यावर के लिए सोमवार रात 8 बजे बस में सवार हुए। बस ने ज्योंही सिटी को पार किया तो सर्द हवाओं के थपेड़ों से बचने के लिए यात्रियों ने खिड़की के कांच बंद कर दिए। मगर कुछ किलोमीटर चलने के बाद फिर खिड़की के शीशे खुलने लगे। ऐसे में उनमें से आते सर्द हवाओं के थपेड़ों से बचने के लिए बार-बार खिड़की के शीशे बंद करने पड़े।
इसकी शिकायत जब उन्होंने ब्यावर पहुंचकर आगार प्रबंधन से की तो उनका कहना था कि पूर्व में खिड़की के शीशे के लॉक लोहे या एल्युमीनियम के थे मगर अब जो नई बसें आ रही है उनमें लॉक प्लास्टिक के लगे हैं। जो एल्युमीनियम की अपेक्षा कम टिकाऊ है। इसके अलावा यात्रियों ने बताया कि कई बसों में कांच नहीं है तो कई में सीटें टूटी हुई हैं।
रोडवेज प्रबंधन घाटे से उबरने के लिए ताे नित नई योजनाएं बना रहा है, मगर उन पर प्रबंधन अमल करने में कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा।
आगार के अधिकारियों ने बताया कि ब्यावर आगार में कुल 87 बसें संचालित हो रही हैं, इसमें रोडवेज की 26 बड़ी, 16 मिनी बसें हैं, वहीं 45 अनुबंधित बसें हैं। रोडवेज की अधिकांश बसे कंडम हो चुकी है। चलाई जा रही हैं।
इनका कहना है
यह बात सही है कि कई बार लॉक के बार-बार खुलने अाैर बसों की सीटें टूटी हाेने की शिकायतें मिली हैं। मुख्यालय को अवगत करवा दिया गया है। अनुबंधित बस मालिक को भी सुधार के लिए पाबंद किया गया है।
रघुराज सिंह, मुख्य प्रबंधक, ब्यावर आगार
ब्यावर. रोडवेज बस में टूटी सीटें।