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सीएए, एनआरसी, एनपीआर जनता के सामने नया संकट

एक वर्ष पहले
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सीएए, एनआरसी, एनपीआर विरोधी जन आंदोलन समिति के बैनर तले विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व में केन्द्र सरकार की ओर से सीएए के बाद राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर एवं राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर एनआरसी लागू के नवीनीकरण की घोषणा कर जनता के सामने एक नया संकट उत्पन्न कर दिया है।

ज्ञापन में पदाधिकारियों ने बताया कि 1951 से देश में लगातार प्रति 10 वर्ष की जनगणना होती है। जिसमें सभी नागरिक सहयोग प्रदान करते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर लागू किया गया है। जिसके तहत पर्याप्त दस्तावेज मौजूद नहीं होने की स्थिति में उन्हें देश का नागरिक होते हुए भी डी यानी संदेहास्पद की में श्रेणी में रखा जाएगा। एनपीआर एवं एनआरसी में जमीन के स्वामित्व तथा स्कूल कॉलेज के प्रमाण पत्र भी मांगे जाएंगे। जबकि देश की 30 प्रतिशत जनता के पास जमीन नहीं है तथा 23 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। ऐसे में मांगे जाने वाले दस्तावेजों की पूर्ति किया जाना असंभव है। ज्ञापन में मांग की गई है कि एनआरपी पर रोक लगाई जाए। जिससे कि राज्य की जनता भय मुक्त हो सके। इस दौरान मुमताज अली, डॉ.जावेद हुसैन, अय्यूब गौरी, अजमत काठात, धन्नाराम खोरवाल, महबूब खान, हितेन्द्र कटारिया, चन्द्रगुप्त मौर्य, फरहा नाज, विश्वास गुजराती, सलीमुद्दीन, सिकन्दर काठात, रियाज हुसैन, जयदीप मेघवंशी सहित अनेक लोग मौजूद थे।

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